
मुख्यमंत्री चौहान को पटवारी की चिट्ठी..!
कमलनाथ सरकार में क़द्दावर मंत्री रहे जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कई घटनाओं में आड़े हाथों लेते हुए उन्हें एक पत्र लिखा है जिसमें कई सवालों के साथ तंज भी है
पत्र कुछ इस तरह से है
आदरणीय शिवराज जी,
● आज एक विशेष संदर्भ के साथ यह पत्र आपको भेज रहा हूं. इस व्यक्तिगत आग्रह के साथ कि पत्र में दिए गए सुझाव का, आप गंभीरता से अध्ययन करें और यह प्रयास भी करें कि इन्हें अनुसरण कर, व्यवहार में कैसे लाया जा सकता है.
● आपके 17 वर्षीय कार्यकाल में ऐसे अनेक अवसर आए हैं, जब व्यक्तिगत रूप से मैंने अनुभव किया है कि आपकी कथनी और करनी में, आसमान-पाताल जैसा अंतर है. आपके व्यक्तित्व और कार्यप्रणाली को लेकर यह कोई सतही वैचारिक असहमति नहीं है. इस धारणा के पीछे तर्क-तथ्य के साथ ऐसे अनेक प्रमाण हैं, जो आपके दोहरे चरित्र को प्रकाश में ले आते हैं.
● कोरोनाकाल में आपकी सरकार की “आपराधिक लापरवाही” के कारण मेरे मध्यप्रदेश में हजारों “सरकारी-हत्याएं” हो गईं! दवा, इंजेक्शन, ऑक्सीजन, रेमडेसिविर जैसी अनेक जीवन रक्षक जरूरतों को लेकर, जिस तरह की अफरा-तफरी और अराजकता का माहौल प्रदेश में देखा गया, उस “कलंक कथा” को कभी भी भुलाया नहीं जा सकेगा. अस्पतालों से श्मशान-कब्रिस्तान तक मौत के तांडव ने, प्रदेश के एक-एक बाशिंदे को बुरी तरह से डरा दिया था. मध्यप्रदेश का ज्ञात इतिहास भी प्रमाण है कि अंतिम संस्कार के लिए कतार लगाने की स्थिति पहली बार निर्मित हुई.
● यह भी सर्वविदित है कि बेकसूर आम इंसान से लेकर कोरोना से पीड़ित-प्रताड़ित परिवार ने, एक स्वर में इस बात को स्वीकार किया कि यदि सरकारी इंतजाम समय पर हो जाते, तो महामारी की विभीषिका से काफी हद तक बचा जा सकता था. दुर्भाग्य से आपके नेतृत्व में काम कर रही प्रदेश भाजपा सरकार का आपदा प्रबंधन पूरी तरह से ध्वस्त था, इसलिए हजारों निर्दोष परिवारों को पीड़ा-प्रताड़ना का अंतहीन दौर देखना पड़ा.
● आपके स्तर से लगातार यह बयान दिया जाता रहा कि महामारी के इस विपरीत कालखंड में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग हटकर, सभी सियासी दलों को एक साथ, जनहित में कार्य संपादित करना चाहिए. आपके इस आग्रह को व्यक्तिगत रूप से मैंने और मध्यप्रदेश के एक-एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने, मन-वचन-कर्म से ना केवल आत्मसात किया, बल्कि पीड़ित मानवता की सेवा के लिए जमीनी स्तर पर काम भी किया.
● लेकिन, मुझे यह कहते हुए बड़ा दुख हो रहा है कि आपने अपनी उम्र, अपने अनुभव और अपने राजनीतिक अभ्यास के विपरीत जाकर, “एकला-चलो” की नीति का ही अशोभनीय प्रदर्शन किया. आप केवल दिखावे के लिए विपक्ष से आह्वान करते रहे कि – “आइए, मिलकर लड़ते हैं, मिलकर जीतते हैं.” किंतु, यह केवल जनता के सामने संवेदनशीलता दिखाने का झूठा उपक्रम था. कोरोनाकाल में आपके नेतृत्व में पूरी भाजपा केवल श्रेय के संघर्ष में जुटी रही. सरकार मीडिया-मार्केटिंग के जरिए यह प्रयास करती रही कि सरकारी सच, शब्दों पर सवार होकर अखबारों तक ना पहुंच जाए. लेकिन, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं मध्यप्रदेश की जनता आपकी सतही-सोच के विपरीत, इस सत्य-तथ्य से भलीभांति परिचित है कि हजारों निर्दोषों की मौत का जिम्मेदार केवल मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान है.
● अब एक तात्कालिक संदर्भ. शुक्रवार को इंदौर प्रशासन ने मुझे सूचना दी कि शनिवार को मुख्यमंत्रीजी इंदौर आ रहे हैं. इस दौरान होने वाली समीक्षा बैठक में कोरोना को लेकर भी मंथन होगा. आप सादर आमंत्रित हैं. मैं शुक्रवार देर रात केवल आपसे चर्चा के लिए ही भोपाल से इंदौर पहुंचा. शनिवार को जब निर्धारित समय पर बैठक की भागीदारी के लिए समन्वय किया गया, तो जानकारी मिली की इस बैठक में केवल प्रशासन और भाजपा के पदाधिकारी-जनप्रतिनिधि ही शामिल हैं. बहुत स्वाभाविक है कि एकतरफा बैठक का यह निर्णय आपके स्तर पर ही लिया गया. केवल इसलिए कि विपक्ष की उपस्थिति से होने वाली असहजता से मुंह छुपाया जा सके.
● आपत्ति का एक बड़ा और गंभीर विषय यह भी है कि यह एक अकेली घटना नहीं है जो आपके दोहरे चरित्र को प्रमाणित करती है. आपने कोरोना कालखंड में केवल और केवल भाजपा के चाल, चरित्र और चेहरे को ही प्राथमिकता दी. इसका परिणाम यह हुआ कि मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता, नेता और जनप्रतिनिधियों तक पहुंची जमीनी हकीकत, काफी प्रयासों के पश्चात भी सरकार तक पहुंच ही नहीं पाई. बावजूद इसके कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्ण समर्पण के साथ, कोरोना मरीजों की सेवा की है. उन्हें हर संभव सहायता देने का भी ईमानदार प्रयास भी किया है.
● आज इंदौर में हुई बैठक में कांग्रेस विधायकों को शामिल नहीं करके आपने इंदौर के मतदाताओं का भी अपमान किया है. आपने इस बात का भी पुख्ता प्रमाण दे दिया है कि आप लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को सिरे से खारिज करते हैं. आप जनता की परेशानियों को केवल अपनी सुविधा के लिए भाजपा के चश्मे से ही देखना चाहते हैं. आप यही चाहते हैं कि निरंकुश-नौकरशाही आप तक वही सरकारी कागज पहुंचाएं, जो आपकी झूठी उपलब्धियों और प्रशंसा से भरे हुए हों. यह प्रयास-प्रयोग इंदौर का मतदाता बड़ी सहजता से समझता है और उसे इस सच को स्वीकार करने में भी अब कोई संदेह नहीं है कि श्रेय की राजनीति के लिए छटपटाती भाजपा, अब पूरी तरह से असंवेदनशील हो चुकी है.
● मुख्यमंत्रीजी, मैं आज की समीक्षा बैठक में आपको बताना चाहता था कि कैसे कोरोना-योद्धाओं का अपमान किया जा रहा है. जरूरत के समय जान की बाजी लगाने वाले सेवाभावियों को किस तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है. मुआवजा देने की घोषणा को अमल में लाने में क्या-क्या व्यवहारिक परेशानियां आ रही हैं. स्कूलों का दबाव प्रबंधन कैसे काम कर रहा है और स्कूल फीस माफी को लेकर कैसे अभिभावकों को राहत दी जा सकती है. कोरोना खत्म होने के बाद भी सामाजिक प्रताड़ना के मामलों पर क्यों कार्रवाई नहीं हो रही है. अंशकालिक सेवाओं के नाम पर, जो पूर्णकालिक प्रबंधन किया गया, कोरोना के बाद कैसे बलपूर्वक ऐसे सेवाभावियों को “सिस्टम” से हटाया जा रहा है. चिकित्सकों का सम्मान और उनके साथ काम करने वालों को सेवामुक्त करने का दंड कैसे दिया जा रहा है.
● मुख्यमंत्रीजी, मेरा बहुत स्पष्ट रूप से मानना है कि अब आपमें सच का सामना करने का साहस ही नहीं बचा है. आप विपक्ष को नजरअंदाज कर, अपनी इज्जत बचाना चाहते हैं. आप यह भी दिखाना चाहते हैं कि कोराना समीक्षा की सरकारी बैठकें हो रही हैं और मुख्यमंत्री संभाग-संभाग में भटक-भटक कर, खुद निगरानी कर रहे हैं. लेकिन, दुर्भाग्य से यह केवल सस्ती लोकप्रियता और अपनी उपस्थिति को गैर जरूरी तरीके से दर्शाने का असफल प्रयास है. इंदौर और मध्यप्रदेश की जनता अब इतनी अबोध भी नहीं है कि आपकी इस “इमेज बिल्डिंग एक्सरसाइज” को समझ ना पाए.
● मुख्यमंत्रीजी, मेरे मध्यप्रदेश का बच्चा-बच्चा इस बात को जानता है कि आपने चोरी से सरकार बनाई है. मेरे प्रदेश का जनादेश आपके खिलाफ था. लेकिन, आप कुर्सी की छटपटाहट में स्वार्थ और सिद्धांत का अंतर भूल बैठे. आप धोखे से मुख्यमंत्री तो बन गए लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करना, आपको अब तक नहीं आ पाया है. आप जनहित में लड़ने नहीं, केवल डरने वाले मुख्यमंत्री हैं. एक ऐसा मुख्यमंत्री जिसे हमेशा अपनी कुर्सी बचाने के लिए संघर्ष करते रहना है. एक ऐसा मुख्यमंत्री जिसे अपनी निष्ठा-प्रतिष्ठा को हर स्तर पर प्रमाणित करना है. एक ऐसा मुख्यमंत्री जो केंद्र सरकार से मध्यप्रदेश के हितों के लिए ना बोल सकता है, ना लड़ सकता है.
● मुख्यमंत्रीजी, आप कोरोना से अकेले ना पहले लड़ पाए हैं, ना ऐसी ही किसी महामारी से भविष्य में लड़ पाएंगे. इसलिए, आपसे पुनः आग्रह है लोकतांत्रिक परंपराओं का ईमानदारी से पालन करें. राजनीतिक कटुता को मन से दूर करें और एक ऐसे मध्यप्रदेश का निर्माण करें, जिसकी स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं को मिसाल के रूप में हमेशा याद किया जाता रहे.
आदर सहित,
जीतू पटवारी
विधायक,
राऊ विधानसभा क्षेत्र
कार्यकारी अध्यक्ष,
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी