

हजारों को रोज खाना… सोशल मीडिया पर मिल रही दुआएं…
जीतु पटवारी की पहल
कोरोना के इस बुरे दौर में छोटी मदद भी संक्रमण से लड़ रहे लोगों का हौसला बढ़ाती है। जिन परिवारों में सभी सदस्य संक्रमित हो गए हों, वहां खाने-पीने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। इसी तरह के डेढ़ हजार परिवारों को चिन्हित कर संस्था लक्ष्य उनको खाना पहुंचाने का काम कर रही है। इसके लिए हेल्प लाइन नंबर जारी किया है। अब सोशल मीडिया पर खाने के पैकेट पाने वाले लगातार संस्था का धन्यवाद करते देखे जा सकते हैं।
संस्था लक्ष्य पूर्व मंत्री जीतू पटवारी संचालित करते हैं। विपक्ष में रहने के बावजूद उन्होंने लोगों की मदद करने का एक नया तरीका इजाद किया है। उनकी विधानसभा में ऐसे हजारों परिवार हैं, जो नौकरी की तलाश में इंदौर आए हैं, जो संक्रमित हो गए हैं। उनके भोजन-पानी का बंदोबस्त संस्था लक्ष्य कर रही है। चार सौ पैकेट से शुरुआत हुई थी, जो अब सत्रह सौ पैकेट पर आ गया है।
एक पैकेट में पूरे परिवार के लिए भोजन होता है। एक दिन पहले सूची तैयार की जाती है। उसके हिसाब से ही अगले दिन पौष्टिक भोजन बनाया जाता है। कोरोना संक्रमण की इस लड़ाई में कारगर खाद्य पदार्थों का ज्यादा इस्तेमाल होता है। सोशल मीडिया पर संस्था और पटवारी के प्रति लोग लगातार धन्यवाद लिख रहे हैं।
हालांकि इस मामले में विधायक पटवारी का कहना है कि मैंने यह रसोई किसी का धन्यवाद लेने के लिए नहीं खोली थी। जब मैं क्षेत्र में गया, तो होम आइसोलेशन में जो मरीज थे, उनके लिए दवा से ज्यादा बड़ी दिक्कत खाना थी। वहीं से मुझे प्रेरणा मिली कि इस तरह की रसोई चालू की जाए। हमारे पास राशन है। जरूरत पडऩे पर ढाई हजार लोगों का खाना भी दोनों वक्त बना सकते हैं।
सिलीकॉन सिटी के आंध्रप्रदेश के संतोष का कहना है कि मैं यहां पर नौकरी के कारण अकेला रहता हूं और कोरोना संक्रमित होने के कारण घर पर खाने का बंदोबस्त नहीं कर पा रहा था। ऐसे में संस्था लक्ष्य ने मेरी मदद की और आठ दिन से मेरे लिए खाना भेजा। इसी तरह से राऊ के नीरज जैन का कहना है कि मेरे परिवार को इस बुरे दौर में मदद करने के लिए संस्था लक्ष्य का जितना धन्यवाद करूं, उतना कम है। घर जैसा खाना भेजा जा रहा है, जो वक्त पर पहुंच जाता है।
राऊ के कुलदीप मौर्या ने कहा कि मेरे काका मोतीलाल मौर्या कोरोना संक्रमित हो गए थे। उनके खाने से लेकर रेमडेसिविर इंजेक्शन तक का बंदोबस्त जीतू पटवारी की संस्था लक्ष्य ने करके दिया, जिससे उनकी जान बच सकी। रितेश चंदेल का कहना है कि मुझे किसी राजनीतिक दल से मदद लेना पसंद नहीं, मैंने फिर भी क्षेत्रीय विधायक जीतू पटवारी को फोन लगाया, तो उन्होंने महज कुछ घंटी के बाद फोन भी उठा लिया और मदद भी भेज दी। परिवार के लोगों के लिए भोजन और दवाइयों का पैकेट लिए संस्था लक्ष्य के वालेंटियर थोड़ी ही देर में मेरे घर पहुंच गए। इस तरह के कई उदाहरण सामने आए हैं।