सिंगाजी पावर प्लांट 3 नम्बर यूनिट को बंद हुए कल 300 दिन पूरे हो गए है । कांग्रेस का विरोध – जितु पटवारी

सिंगाजी पावर प्लांट 3 नम्बर यूनिट को बंद हुए कल 300 दिन पूरे हो, कांग्रेस का विरोध – जितु पटवारी

35 दिनो से बंद है,, 600 मेगावाट की नंबर दो यूनिट

757 करोड़ रुपयों के फिक्स चार्ज का नुक़सान…???

संत सिंगाजी पावर परियोजना की चार इकाइयों मे से दो इकाइयां बंद पड़ी है ,660 मेगावाट की इकाई नंबर तीन एच पी टरबाइन मे आई खराबी के कारण 05 अगस्त 2020 करीब 10 माह से बंद पड़ी है जिसे दुरुस्त करने के लिए निर्माता कंपनी एल एंड टी पावर ने गुजरात भेजा गया था, जिसका रोटर , रविवार 30 मई 2021को दुरुस्त होकर वापस परियोजना वापस आ गया है ,300 दिनो से बंद पड़ी इस इकाई के रोटर को दोबारा लगाने में और उसके बाद बिजली उत्पादन में एक माह से भी ज्यादा समय लगने की सम्भावना है , वही 600 मेगावाट की इकाई नंबर दो 26 अप्रेल से बंद हुए 35 दिन से ज्यादा का समय हो चुका है इस इकाई को बिजली की मांग नही होने के नाम पर बंद रखना अधिकारियो द्वारा बताया जा रहा है । इस मामले में अब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आवाज़ उठायी है उन्होंने कहा है जिस तरह से इतने महंगे प्रोजेक्ट को सरकार सौतेली निगाह से देख रही है उसी के कारण प्रदेश के लोगों को महँगी बिजली ख़रीदनी पड़ रही है पटवारी ने बताया की 660 मेगावाट की तीन नंबर इकाई के 300 दिनो से बंद रहने के कारण करीब दो हजार करोड़ रुपये की उत्पादन हानि एवं इकाई नंबर दो से 35 दिनो मे करीब दो सौ करोड़ की उत्पादन नुक़सान कुल मिलाकर 2200 करोड़ रुपयों की नुक़सान अब तक इकाइयों के बंद रहने से एम पी जेनको को को उठाना पड़ चुकी है
मध्यप्रदेश सरकार के पावर जेनरेटिंग कम्पनी की सबसे उन्न्त टेक्नोलॉजी की ,2520 मेगावाट के सुपर थर्मल प्लांट संत सिंगाजी बिजली की इकाइयों से सबसे महंगी दरों पर बिजली का उत्पादन हो रही है, वहीं यह परियोजना आजतक सफेद हाथी साबित हो रही है, क्योंकि इस बिजली घर का बिजली उत्पादन प्रदेश के पुराने प्लांटो से भी कम हो रहा है ,
2020 -21 में अमरकंटक थर्मल प्लांट का सालाना बिजली उत्पादन 88.34% पी एल एफ प्रदेश में सबसे बढ़िया के साथ
सारणी की 10 एवम 11 नम्बर यूनिट 82 एवं 88.08 पी एल एफ रहा,
संजय थर्मल प्लांट बीरसिंहपुर की 500 मेगावाट की यूनिट 87.97% तथा 25 से30 साल पुरानी यूनिट को मिलाकर SGTP काम्प्लेक्स का संयुक्त सालाना उत्पादन 73.40 % पी एल एफ रहा ।
जबकि संत सिंगाजी प्लांट खण्डवा की 600 मेगावाट की 1 एवं 2 नम्बर यूनिट से संयुक्त 48.28 %पी एल एफ रहा
तथा नए 660 मेगावाट की सुपर क्रिटिकल 3 नम्बर यूनिट मात्र 04.87% एवम 4 नम्बर यूनिट 09.88 % पी एल एफ बिजली उत्पादित ही वर्ष 2020-21 में कर अपनी स्थिति को स्वयं साबित कर रहीं हैं ।
जानकार बताते है कि विद्युत नियामक आयोग के मापदण्डो के अनुसार 85% पी एल एफ सालाना बिजली बननी चाहिये जिससे 1392 करोड़ रु फिक्स चार्ज जेनको को मिलते, परंतु उत्पादन कम होने से 757 करोड़ रु का नुक़सान हुआ है यहां पर स्थापित पहली और दूसरी 600 मेगावाट की यूनिटों का परफॉर्मेंस गारंटी टेस्ट कई बरस गुजरने और कामर्शियल विद्युत उत्पादन शरू होने के बाद भी नही न होना जेनको की दोषी कार्य प्रणाली स्वयं बयां करता है वहीं नवीनतम 660 मेगावाट की 3 और चार नम्बर यूनिट से भी कमर्सिअल विद्युत उत्पादन शुरू होने के बाद भी परफॉर्मेंस गारंटी टेस्ट (पी जी टी )नही हुआ पटवारी ने कहा कि परियोजना और जबलपुर मुख्यालय के जिम्मेदारों की भूमिका पर भी संदेह है, क्योंकि कहा यह जा रहा है कि अगस्त 2020 में जब पी जी टी का हो हल्ला समाचार पत्रों और टी व्ही न्यूज़ चैनलों में प्रमुख हेड लाइन से चली और विधानसभा में विपक्ष ने सदन में महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सरकार को घेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, आपाधापी में यूनिट निर्माण संचालन में हुई घोर लापरवाही अनियमितता भृष्टाचार की भेंट चढ़ गई ,यह इकाइयां और नतीजा क्या हुआ किसी से छुपा नही है,आज 300 दिनों से यूनिट से बिजली उत्पादन ठप्प अरबों की बिजली उत्पादन हानि हो चुका पर जेनको के उच्च पदों पर बैठे जिम्मेदारों के चेहरे पर शिकन तक नही ,क्यों !!!
सिंगाजी प्लांट की नवीनतम टरबाईन की स्थापना के चंद महीनों में ही एच पी टरबाईन की ब्लेड टूटने की थर्मल इतिहास की शायद पहली घटना जानकार बताते हैं वहीं निर्माण में हुई भारी लापरवाहियां एवम निम्न स्तर सामग्री का उपयोग भी इसका प्रमुख कारण है।

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