मनावर में सरकारी कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की 12वीं की छात्रा पार्वती वर्मा ने 14 अगस्त की रात फांसी लगाकर जान दे दी। मृतिका ने सुसाइड नोट और सहेलियों से बातचीत में स्कूल की तीन शिक्षिकाओं पर मानसिक प्रताड़ना और अपमान का आरोप लगाया। पुलिस ने रविवार रात तीनों शिक्षिकाओं के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा 107 बीएनएस में केस दर्ज किया है। सोमवार दोपहर में तीन सदस्यीय जांच दल स्कूल में जांच के लिए पहुंचा है।
मनावर में 12वीं छात्रा का सुसाइड, तीन टीचर्स पर प्रताड़ना का केस दर्ज
जांच में सामने आया कि छात्रा को ड्रेस चोरी का आरोप लगाकर पूरे स्कूल के सामने अपमानित किया गया था और शिक्षिकाएं आए दिन उसे ताने मारकर परेशान करती थीं। पुलिस की जांच में सहेली का बयान भी सामने आया है, जिसमें उसने कहा कि पार्वती ने रोते हुए बताया था कि तीनों टीचर उसे टॉर्चर करती हैं। छोटी-छोटी बात पर ताने मारती हैं। इसी प्रताड़ना से परेशान होकर उसने सुसाइड किया।

सुसाइड नोट में आरोप
छात्रा ने मरने से पहले 8 लाइन का सुसाइड नोट लिखा। उसमें तीनों शिक्षिकाओं के नाम लेकर मानसिक प्रताड़ना और बेइज्जती का जिक्र किया। परिजनों के मुताबिक, मौत से कुछ घंटे पहले पार्वती ने अपनी सहेलियों से कहा था कि वह टीचर्स की प्रताड़ना से तंग आकर जीवन खत्म करना चाहती है लेकिन सहेलियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया

धारा 107 बीएनएस क्या है
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 107 आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है। खासकर जब पीड़ित 18 साल से कम उम्र का बच्चा हो या मानसिक रूप से बीमार हो। इसमें दोषी पाए जाने पर मृत्युदंड, आजीवन कारावास या 10 साल से अधिक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
शिक्षा विभाग की कार्रवाई
घटना के बाद शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की। अतिथि शिक्षिका आरती चौहान की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। प्रभारी प्राचार्य सारिका ठाकुर को उमरबन के बाकानेर स्कूल भेजा गया। जबकि शिक्षिका लक्ष्मी मंडलोई को बोरलाय हाईस्कूल स्थानांतरित किया गया।

परिजनों का आरोप
छात्रा के पिता मोहन वर्मा, मां आशा वर्मा और बहन निशा वर्मा का कहना है कि टीचर जानबूझकर बेटी को परेशान करते थे। उसे धमकियां दी जाती थीं और सबके सामने अपमानित किया जाता था।
आंदोलन और चक्काजाम
घटना के बाद परिजन और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने स्कूल के बाहर शव रखकर सड़क जाम किया। करीब 2 घंटे तक चक्काजाम रहा। एबीवीपी जिला संयोजक लवेश सोनी ने कहा कि यह आत्महत्या नहीं, हत्या का मामला है। उन्होंने बताया कि तीनों टीचर्स के खिलाफ और भी छात्राओं ने बयान दिए हैं।

फरार टीचर
मामला दर्ज होने के बाद तीनों टीचर्स अंडरग्राउंड हो गई हैं। सोमवार को भी दैनिक भास्कर ने उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन मोबाइल रिसीव नहीं किया गया। वहीं, आरती चौहान ने बताया कि उनका फोन छह महीने से खराब है और फिलहाल उनके पास मोबाइल नहीं है।