“सिडनी बॉन्डी बीच हनुक्का फेस्टिवल हमला: 20 मिनट, 50 राउंड फायरिंग, 15 मौतें, 40 घायल; हमलावर साजिद-अकरम मारे गए, हीरो अहमद ने बंदूक छीनी, पुलिस देखते रह गई”

दुनिया में ऑस्ट्रेलिया की पहचान तीन जगहों से है-ओपेरा हाउस, सिडनी हार्बर ब्रिज और बॉन्डी बीच। ओपेरा हाउस और सिडनी हार्बर ब्रिज तो पहले की तरह गुलजार हैं, लेकिन सिडनी के मशहूर बॉन्डी बीच पर मातम पसरा है। 14 दिसंबर की शाम दो हमलावरों ने यहूदियों को टारगेट कर 50 राउंड फायरिंग की। 15 लोग मारे गए। 40 लोग घायल हैं। ये सभी धार्मिक त्योहार ‘हनुक्का’ सेलिब्रेट कर रहे थे।

मरने वालों में फेस्टिवल ऑर्गनाइज करने वाले एली स्लैंगर भी थे। हमलावरों ने सबसे पहले उन्हें ही गोली मारी। सिडनी में रहने वाले 41 साल के एली स्लैंगर ऑस्ट्रेलिया के यहूदियों में जाना-पहचाना नाम थे। मरने वालों में 10 साल की बच्ची से लेकर बुजुर्ग तक हैं।  ने बॉन्डी बीच में हुए हमले के चश्मदीद और विक्टिम रहे कुछ किरदारों से बात की।

हमलावरों ने बीच के पास एक पुल पर पोजीशन ली और यहीं से फेस्टिवल में शामिल लोगों पर फायरिंग की।

पहले किरदारः यांकी बर्गर यहूदियों के नेता और एली स्लैंगर के दोस्त

ऑस्ट्रेलिया की राजधानी सिडनी के बॉन्डी बीच वाले इलाके में देश के सबसे अमीर लोग रहते हैं। यहूदी समुदाय के ज्यादातर लोग बड़े कारोबारी हैं और इसी इलाके में रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया में यहूदियों को शांति से रहने वाली प्रोफेशनल कम्युनिटी के तौर पर जाना जाता है।

इसी एरिया में रहने वाले यांकी बर्गर यहूदियों के नेता है। वे बताते हैं, ‘बॉन्डी बीच पर मेरे दोस्त एली स्लैंगर ने हनुक्का फेस्टिवल का आयोजन किया था। अचानक 2 आतंकियों ने फेस्टिवल को टारगेट कर फायरिंग शुरू कर दी। फेस्टिवल मना रहे लोग भागने लगे। आतंकियों ने महिलाओं, बच्चों, बुजुर्ग सभी को गोली मारी।’

‘पहली गोली एली को ही लगी। एली यहूदियों के नेता थे। उनके 5 बच्चे हैं। एली खुशमिजाज शख्स थे। हमले के वक्त वे स्टेज पर खड़े थे। तभी हमलावरों ने उनके सिर पर गोली मारी।’

एली के दोस्त उनकी याद में प्रार्थना सभा कर रहे हैं। वे ऑस्ट्रेलिया में यहूदियों के दूसरे सबसे बड़े लीडर थे।

हमले के वक्त यांकी बर्गर के बेटे और पोती भी फेस्टिवल में मौजूद थे। उनकी आंखों देखी बताते हुए यांकी कहते हैं, ‘बेटे मेंडी ने फायरिंग की आवाज सुनी। मेरी पोती बाथिया उसके साथ थी। मेंडी ने बेटी को गोद में उठाया और बचने के लिए छिप गया। उसे महसूस हो रहा था कि फायरिंग की आवाज तेज हो रही है और उसके आसपास भीड़ जमा हो रही है।’

‘मेंडी को लगा कि अब मौत करीब है। वो बेटी के साथ हमारे धर्म में पढ़ी जाने वाली आखिरी प्रार्थना करने लगा। उसने लोगों को गोली लगते और गिरते देखा। हमलावरों को भी करीब से देखा। इस हमले के बाद लोग खौफ और सदमे में हैं। दर्द से जूझ रहे हैं, लेकिन उम्मीद है हम और ज्यादा मजबूत बनेंगे।’

करीब 1 किमी लंबा बॉन्डी बीच साफ रेत और नीले पानी के लिए मशहूर है। यहां अक्सर भीड़ रहती है। फायरिंग की आवाज सुनते ही लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर भागे।

‘हमास के हमले के बाद ऑस्ट्रेलिया में यहूदियों के खिलाफ नफरत बढ़ी’

यांकी ऑस्ट्रेलिया की सरकार से नाराज दिखते हैं। वे कहते हैं, ‘7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हमास के हमले के बाद से ऑस्ट्रेलिया में यहूदियों के खिलाफ नफरत बढ़ी है। यहां भीड़ यहूदियों के खिलाफ प्रदर्शन करती थी। इसके बावजूद सरकार कुछ नहीं करती थी। प्रदर्शन में शामिल लोग कई बार यहूदियों को मारने की बात कहते थे। एली स्लैंगर इसी तरह के मुद्दे उठाते रहते थे।’

‘यहूदी होने के नाते मुझे लगता है कि इस हमले के बाद जरूरी है कि हमारी सुरक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया की सरकार कदम उठाए। समुदाय के तौर पर भी ये हमारे लिए बड़ी सीख है। हमें और ज्यादा एकजुट रहना होगा। होलोकास्ट के सिर्फ 3 साल बाद हमने 1948 में अपना खुद का देश इजराइल बनाया था।’

पूरी दुनिया जानती है कि यहूदियों ने सदियों से बहुत कुछ झेला है। मुझे लगता है कि अब यहूदी जाग गए हैं और अपने खिलाफ होने वाले जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना सीख गए हैं। हम फेस्टिवल मनाने के लिए इकट्ठे हुए थे। ये रोशनी का त्योहार है। अंधेरे को दूर करता है और दुनिया को रोशन बनाने का संदेश देता है।’

एली स्लैंगर के एक और दोस्त एलीजर टेवेल ने उनके लिए लिखा, ‘वे सिर्फ अपना काम कर रहे थे। वे किसी युद्ध के मैदान में नहीं थे। वे सिर्फ एक फेस्टिवल में थे।’

दूसरे किरदारः अमित सरवाल ऑस्ट्रेलिया टुडे के एडिटर

अमित सरवाल बताते हैं, ‘हादसे के बाद पुलिस ने पूरे बॉन्डी बीच को खाली करवा लिया था। इस इलाके से एक कार मिली है। इसे हमलावरों की कार बताया जा रहा है। कार में बम बनाने का सामान मिला है। हमलावरों में 24 साल का नवीद अकरम शामिल है। उसका ड्राइविंग लाइसेंस भी मिला। इसके बाद हमलावरों के घर पर छापेमारी की गई।’

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंटनी अल्बनीज ने हाईलेवल सिक्योरिटी मीटिंग बुलाई थी। वे चाहते हैं कि बंदूक लाइसेंस से जुड़े नियमों को सख्त किया जाए। एक व्यक्ति के पास 1-2 से ज्यादा हथियार न हों, ये सुनिश्चित करने की बात हो रही है।’

क्या इसे यहूदी विरोधी इस्लामिक हिंसा माना जाए? अमित जवाब देते हैं, ‘अभी ये पुख्ता तरीके से नहीं कहा जा सकता। ये कंफर्म होना बाकी है कि हमलावर कुछ ऐसा बोल रहे थे या उन्होंने इस्लाम का हवाला देकर हमले के समर्थन में पोस्टर-पर्चे फेंके हों।’

‘ये सच है कि बॉन्डी बीच पर उस वक्त बहुत सारे लोग थे। टारगेट करके सिर्फ यहूदियों को ही मारा गया। हमलावरों ने दूसरे कैफे में बैठे लोगों पर फायरिंग नहीं की। जानबूझकर फेस्टिवल मना रहे यहूदियों पर ही फायरिंग की। प्रधानमंत्री और पुलिस ने भी ये बात मानी है। हमलावरों ने राजनीति या धर्म से प्रेरित होकर हमला किया, ये अब तक साफ नहीं हो सका है।’

‘ऑस्ट्रेलिया की पार्टी ग्रीन्स की डिप्टी लीडर महरीन फारुकी बॉन्डी एरिया में गईं, तो लोगों ने उनका विरोध किया। अब लोगों को लग रहा है कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद से ग्रीन्स और लेफ्ट पार्टियों ने यहूदी विरोध को इतनी ज्यादा हवा दे दी है कि लोगों में कट्टर सोच पैदा हो रही है। ये बहस भी चल रही है।’

तीसरे किरदारः यहूदी चश्मदीद

इस शख्स की पहचान नहीं हुई है। उन्होंने हमलावरों को करीब से देखा था। वे कहते हैं, ‘वहां दो शूटर थे। एक ब्रिज के नीचे और ऊपर था। वे लगातार 20 मिनट तक फायरिंग करते रहे। मैगजीन बदलते और फिर फायरिंग शुरू कर देते थे। 20 मिनट तक किसी ने भी जवाबी फायरिंग नहीं की। मैंने अपने बच्चों को छिपा लिया। मैं

हमलावर काफी दूर थे, इसलिए मैं उनकी आवाज नहीं सुन पाया। वहां 4 पुलिसवाले भी थे, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। मैं इजराइली हूं। मैंने इस तरह के हालात देखे हैं। मैं 6 बच्चों के साथ आया था, शुक्र है हम सब सही-सलामत हैं।’

‘फेस्टिवल का पहला दिन था। हम उसी के लिए इकट्ठा हुए थे। आतंकी हमें मार देना चाहते थे। हम बाकी नागरिकों की तरह ही हैं, लेकिन हमें इस तरह मारा जा रहा है। मैं खुद फौजी रहा हूं, मैंने ये सब करीब से देखा है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में ऐसा हो जाएगा कभी नहीं सोचा था। आतंकी फायरिंग करते रहें और उन पर जवाबी फायरिंग न हो, ये चौंकाने वाली बात है।’

चौथे किरदारः अहमद अल अहमद हमलावर की बंदूक छीनकर हीरो बने

सीरियाई मूल के प्रवासी अहमद अल अहमद सिडनी में दुकान चलाते हैं। हमले के वक्त बीच पर मौजूद थे। उन्होंने देखा कि एक हमलावर लोगों पर फायरिंग कर रहा है। वे चुपके से गए और उसे पकड़ लिया। उसकी बंदूक छीन ली।

44 साल के अहमद अल-अहमद जान की परवाह किए बिना फायरिंग कर रहे आतंकी साजिद अकरम से निहत्थे भिड़ गए।

हमलावर को रोकने की कोशिश में अहमद को गोली लग गई। वे गंभीर रूप से घायल हैं और हॉस्पिटल में एडमिट हैं। 43 साल के अहमद के परिवार ने बताया कि उनके कंधे में गोलियां लगी हैं। कुछ गोलियां हड्डियों में फंसी हैं। अहमद का परिवार कुछ महीने पहले ही सीरिया से सिडनी शिफ्ट हुआ था।

अहमद हॉस्पिटल में एडमिट हैं। न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स उनसे मिलने हॉस्पिटल पहुंचे।

हमला करने वाले बाप-बेटे, ISIS से जुड़े होने का शक हमला करने वालों की पहचान साजिद अकरम और उसके 24 साल के बेटे नवीद के तौर पर हुई है। उन्होंने परिवार को बताया था कि वीकेंड पर मछलियां पकड़ने जा रहे हैं। नवीद का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ था।

ऑस्ट्रेलियाई खुफिया पुलिस के मुताबिक, दोनों पर आतंकी संगठन ISIS से जुड़े होने का शक था। 2019 से उन पर नजर रखी जा रही थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि प्रशासन ने इस जानकारी पर एक्शन क्यों नहीं लिया।

साजिद के पास 6 राइफल के लाइसेंस थे। वो फायरिंग क्लब का मेंबर था। इसलिए उसे इतने लाइसेंस मिल गए थे। क्लब के जरिए उसे शॉटगन के लाइसेंस मिले थे। पुलिस के मुताबिक, उसने सामान्य तरीके से ही लाइसेंस हासिल किए थे।

50 साल के साजिद को मौके पर ही मार दिया गया। नवीद घायल है, उसका इलाज चल रहा है। न्यू साउथ वेल्स के पुलिस कमिश्नर माल लैन्योन ने कहा कि पुलिस को एक शूटर के बारे में जानकारी थी, लेकिन यह नहीं पता था कि वे हमले की योजना बना रहे हैं।

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