
टाटा ग्रुप और मिस्त्री परिवार में एक बार फिर ठन गई है। मिस्त्री परिवार के शापोरजी पल्लोनजी (एसपी) समूह ने शुक्रवार को कहा कि उसकी शेयर गिरवी रखकर धन जुटाने की योजना को टाटा समूह रोकने का प्रयास कर रहा है। यह अल्पांश शेयरधारकों के अधिकारों का हनन और बदले की भावना से की जाने वाली कार्रवाई है। टाटा समूह ने मिस्त्री समूह को शेयरों को गिरवी रखने के प्रयास को रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की है
11 हजार करोड़ रुपए जुटाना चाहता है शापूरजी ग्रुप:-रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन कारोबार से जुड़ा शापूरजी पालनजी ग्रुप इस समय नकदी संकट का सामना कर रहा है। इसको देखते हुए ग्रुप ने टाटा संस के 2 फीसदी शेयरों को गिरवी रखकर 11 हजार करोड़ रुपए जुटाने की योजना बनाई है। शापूरजी ग्रुप ने पहली किस्त में 3750 करोड़ रुपए जुटाने के लिए असेट मैनेजमेंट कंपनी ब्रुकफील्ड के साथ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। जनवरी 2020 में एक अघोषित समझौते के बाद यह दूसरा मौका है जब शापूरजी ग्रुप ने टाटा संस के शेयरों को गिरवी रखने का प्रयास किया है।
शेयरों को गिरवी रखने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा टाटा संस:-शापूरजी ग्रुप के इस कदम पर रोक लगाने के लिए टाटा संस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 5 सितंबर को शीर्ष कोर्ट में याचिका दाखिल कर टाटा संस ने शेयरों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गिरवी रखने पर रोक लगाने की मांग की है। टाटा संस का कहना है कि गिरवी रखे गए शेयर भविष्य में ट्रांसफर भी हो सकते हैं। साथ ही टाटा संस ने दलील दी है कि ग्रुप के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत यदि कोई सदस्य कंपनी के शेयर बेचना चाहता है तो उन शेयरों को उचित बाजार मूल्य पर खरीदने के संबंध में टाटा संस के बोर्ड को इनकार करने का अधिकार है।
कैसे शुरू हुआ दोनों ग्रुप में विवाद:-2012 में रतन टाटा के रिटायर होने के बाद साइरस मिस्त्री को टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनाया गया था। 2016 में बोर्ड और बड़े निवेशकों ने साइरस मिस्त्री को चेयरमैन के पद से हटा दिया था। बोर्ड ने साइरस मिस्त्री पर खराब प्रबंधन का आरोप लगाया था। दो महीने बाद मिस्त्री परिवार की दो इन्वेस्टमेंट कंपनियों ने एनसीएलटी की मुंबई बेंच में अपील दायर की थी। इसमें मिस्त्री को हटाने के फैसले को कंपनीज एक्ट के नियमों के विपरीत बताया था। 2019 में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटाने को गलत बताते हुए उनकी बहाली के निर्देश दिए थे।
2017 में भी हुआ था कानूनी विवाद:-सितंबर 2017 में शेयरधारकों ने टाटा संस को पब्लिक से प्राइवेट कंपनी बनाने की मंजूरी दी थी। इसके बाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) ने टाटा संस को प्राइवेट कंपनी के तौर पर दर्ज कर दिया था। इस बदलाव के बाद कंपनी का सदस्य अपने शेयर बाहरी लोगों को नहीं बेच सकता था। वह केवल टाटा संस को ही अपने शेयर बेच सकता था। साइरस मिस्त्री परिवार ने इस बदलाव का विरोध करते हुए एनसीएलटी में केस दायर किया था। एनसीएलएटी ने इस बदलाव को भी अवैध करार दिया था।
सुप्रीम कोर्ट लगा चुका है एनसीएलएटी के फैसले पर रोक:-एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ टाटा संस ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायाधीश सूर्यकांत की तत्कालीन पीठ ने एनसीएलएटी के फैसले पर रोक लगा दी थी। हालांकि, यह मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और अंतिम फैसला के इंतजार है।
100 से ज्यादा कंपनियों का संचालन करता है टाटा संस:-टाटा संस, टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों की होल्डिंग कंपनी है और यह 100 से ज्यादा कंपनियों का संचालन करता है। टाटा संस की सभी कंपनियों की नेटवर्थ 8.15 लाख करोड़ रुपए के आसपास है। टाटा संस की 66 फीसदी हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट के पास है। रतन टाटा, टाटा ट्रस्ट के मानद चेयरमैन हैं।
शापूरजी ग्रुप की टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी:-शापूरजी पालनजी ग्रुप की टाटा संस में 18.37 फीसदी हिस्सेदारी है। स्टर्लिंग इंवेस्टमेंट्स और साइरस इंवेस्टमेंट्स के जरिए शापूरजी ग्रुप ने टाटा संस में यह हिस्सेदारी ली है। मौजूदा समय में शापूरजी की हिस्सेदारी की वैल्यू 1.4 लाख करोड़ रुपए के करीब है। इस समय शापूरजी ग्रुप का संचालन टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन साइरस पालनजी मिस्त्री करते हैं।
कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित हुआ है शापूरजी ग्रुप:-रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन कारोबार से जुड़ा शापूरजी ग्रुप कोविड-19 के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस समय शापूरजी ग्रुप वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। शापूरजी ग्रुप के प्रवक्ता का कहना है कि टाटा ग्रुप के इस कदम से उनके ग्रुप को अपूर्णीय क्षति होगी। प्रवक्ता का कहना है कि शापूरजी ग्रुप कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित हुआ है और उसे फंड की आवश्यकता है। अब शापूरजी ग्रुप भी टाटा संस की याचिका को खारिज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है।