हमें ज्ञान एवं जीवन का अनुभव गुरु के मर्गदर्शन से ही मिला हैं । शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी को नमन

मां-बाप के बाद बच्‍चे का कोई गुरु होता है तो वो है शिक्षक। पैरेंट्स के बाद बच्‍चे अपने टीचर से ही सब सीखते हैं। आज शिक्षक दिवस है और इस दिन सभी बच्‍चे अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।

हालांकि, इस बार स्‍कूल बंद होने की वजह से टीचर्स डे नहीं मना पाएंगे, लेकिन फिर भी इस बार आप अपने बच्‍चों को घर पर ही इस दिन के महत्‍व के बारे में बता सकते हैं।

​सत्‍कार करना:-

क्‍लास में टीचर के आने पर खड़े होकर उनका अभिवादन करना नियम नहीं बल्कि भावना होनी चाहिए। अपने बच्‍चे को बताएं कि उसे हमेशा अपने टीचर्स का अभिवादन और सत्‍कार करना चाहिए।

यह सिखाकर आप अपने बच्‍चे के टीचर को बहुत बड़ा तोहफा दे सकते हैं, क्‍योंकि शिक्षक को अपने शिष्‍य से हमेशा सम्‍मान और सत्‍कार की उम्‍मीद होती है।

 

आदर और सम्‍मान करना:-

कुछ टीचर्स बच्‍चों के साथ फ्रेंडली होते हैं तो कुछ स्ट्रिक्‍ट रहते हैं। अगर कोई टीचर फ्रेंडली है तो इसका मतलब ये नहीं है कि आप उनसे किसी भी तरह से बात करेंगे।

शिक्षक को सम्‍मान देना जरूरी है और आपको भी अपने बच्‍चे को यही सिखाना है। उसे बताएं कि अपने टीचर से हमेशा विनम्रता से बात करे।

​टीचर्स के बारे में गॉसिप:-

किसी के भी बारे में गॉसिप करना सही नहीं होता है और जब बात टीचर्स की हो तो मामला और गंभीर हो जाता है। बच्‍चे अक्‍सर अपने टीचर्स के पढ़ाने के तरीके या डांटने के बारे में गॉसिप करते हैं जो कि गलत है।

बच्‍चे इतने बड़े नहीं हुए होते हैं कि अपने टीचर्स के बारे में गॉसिप करें। पैरेंट्स होने के नाते इस टीचर्स डे पर अपने बच्‍चे को समझाएं कि वो स्‍कूल में अपने दोस्‍तों के साथ टीचर्स के बारे में गॉसिप करना बंद कर दे क्‍योंकि इससे कुछ हासिल नहीं होगा।

टीचर को स्‍पेशल फील करवाएं:-

माना कि इस बार टीचर्स डे पर आपका बच्‍चा स्‍कूल जाकर अपनी टीचर्स को विश करे, इसलिए आप इस खास दिन पर अपने बच्‍चे से उसकी टीचर को फोन करके विश करवाएं।

आप चाहें तो अपने बच्‍चे के साथ मिलकर घर पर ही ग्रीटिंग कार्ड बनाकर या फूलों का गुलदस्‍ता भेजकर उन्‍हें विश कर सकते हैं। यकीन मानिए इससे आपके बच्‍चे के टीचर को खुशी तो मिलेगी ही और साथ ही बहुत स्‍पेशल भी फील होगा।

 

सम्माननीय श्रीमान, मैं जानता हूं कि इस दुनिया में सारे लोग अच्छे और सच्चे नहीं हैं। यह बात मेरे बेटे को भी सीखनी होगी। पर मैं चाहता हूं कि आप उसे यह बताएं कि हर बुरे आदमी के पास भी अच्छा हृदय होता है। मैं चाहता हूं कि आप उसे सिखाएं कि हर दुश्मन के अंदर एक दोस्त बनने की संभावना भी होती है। ये बातें सीखने में उसे समय लगेगा, मैं जानता हूं। पर आप उसे सिखाइए कि मेहनत से कमाया गया एक रुपया, सड़क पर मिलने वाले पांच रुपये के नोट से ज्यादा कीमती होता है। आप उसे बताइएगा कि दूसरों से जलन की भावना अपने मन में न लाए। साथ ही यह भी कि खुलकर हंसते हुए भी शालीनता बरतना कितना जरूरी है। मुझे उम्मीद है कि आप उसे बता पाएंगे कि दूसरों को धमकाना और डराना कोई अच्छी बात नहीं है। यह काम करने से उसे दूर रहना चाहिए।
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आप उसे किताबें पढ़ने के लिए तो कहिएगा ही, पर साथ ही उसे आकाश में उड़ते पक्षियों को, धूप में हरे-भरे मैदानों में खिले फूलों पर मंडराती तितलियों को निहारने की याद भी दिलाते रहिएगा। ये बातें उसके लिए ज्यादा काम की है। स्कूल के दिनों में ही उसे यह बात भी सीखनी होगी कि नकल करके पास होने से फेल होना अच्छा है। अपनी सच्ची बात पर कायम रहने का हुनर उसमें होना चाहिए। दूसरों की सारी बातें सुनने के बाद उसमें से काम की चीजों का चुनाव उसे इन्हीं दिनों में सीखना होगा। आप उसे यह बताना मत भूलिएगा कि उदासी को किस तरह प्रसन्नता में बदला जा सकता है। उसे खुद पर विश्वास होना चाहिए और दूसरों पर भी। तभी तो वह एक अच्छा इनसान बन पाएगा।
– अब्राहम लिंकन का अपने बेटे के शिक्षक को लिखे गए पत्र के अंश
अब्राहम लिंकन की एक कविता शिक्षक

आज “शिक्षक दिवस” है,सभी गुरू स्वरूप आदरणीय को प्रणाम..हमारे जीवन में सभी तरह के “अभिमानों “ के परदों का अनावरण आवश्यक है, यह परदा हटाने का काम गुरू द्वारा ही संभव है। गुरू प्रेरणा देते है.. ध्यान रहे…हमे जो ज्ञान जीवन के अनुभव एवं गुरू मार्गदर्शन से मिला है उसे कभी भी मान-प्रतिष्ठा का विषय मत बनने देना, क्योंकि ज्ञान ही अभिमानी बनाता है और ज्ञान ही …ह्रदय मे कोमलता और नम्रता भी लाता है।अच्छे गुरू .. माता-पिता, मित्र, किसी सेवक, परिजन, पत्नी-प्रेमिका या हमसे जुड़े किसी भी व्यक्ति में मौजूद है ..और हम अच्छे गुरू की तलाश मे जीवन बीता देते है…गुरू सबको दिख जाय या मिल जाए..यह संभव नही है, जिस प्रकार शिष्य के मन मे गुरू विधमान होता है उसी प्रकार गुरू के मन मे भी शिष्य का स्थान होता है। गुरु और शिष्य का रिश्ता ही एकमात्र ऐसा है जो कभी उम्र के बंधन में बँधा हुआ नहीं होता है। मैं जीवन के उन भाग्यशाली लोगों में हुं.. जिनके माता-पिता ने शासकीय सेवा में रहते हुए..ताउम्र शिक्षक रहे.. आज एक ही आग्रह.. मुझे अपने जीवन में भी शिष्य की भाँति अपनाए रखें, यही अपेक्षा है…??पुन: साधुवाद….
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?…प्रदेश टुडे मीडिया समुह …?

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