खेल भावना से पूरी हो विधानसभा सत्र बैठकों की पारी…कौशल किशोर चतुर्वेदी

खेल भावना से पूरी हो विधानसभा सत्र बैठकों की पारी…

आईसीसी चैंपियनशिप फाइनल का मुकाबला। न्यूजीलैंड और भारत आमने-सामने। न्यूजीलैंड ने टॉस जीता और बल्लेबाजी चुनी। उतार-चढ़ाव के बीच आखिर न्यूजीलैंड ने 251 रन बना लिए। और भारत के सामने जीत के लिए 252 का लक्ष्य दिया। भारत क्रीज पर है और बड़े-बड़े धुरंधर सस्ते में निपट गए। तब भी जिनको मौका मिला, उन्होंने पूरे भरोसे से खेल खेला। मैच रोमांचक रहा। भारत का भार केएल राहुल और हार्दिक पंड्या के कंधों पर। 48वें ओवर में हार्दिक भी आउट हो गए। और फिर जड़ेजा आ गए। जड़ेजा और केएल राहुल ने 49वें ओवर में लक्ष्य हासिल कर भारत का परचम फहरा दिया। और 49 ओवर में भारत जीत गया। पूरी न्यूजीलैंड के नागरिकों की चाहत थी कि न्यूजीलैंड जीते। 140 करोड़ भारतीयों की उम्मीद कि भारतीय टीम चैंपियन बने। अंतत: भारत ने दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में इतिहास रच दिया। दोनों टीम के खिलाड़ी एक-दूसरे के गले लगे और फिर आगामी मैच में और ज्यादा तैयारी संग आमने-सामने होने को विदा ली। इसे कहते हैं खेल भावना। और इसीलिए कहा जाता है कि खेल भावना से हर काम करना चाहिए।

फिर राजनीति में यह फार्मूला क्यों लागू नहीं हो पा रहा है। लोकतंत्र में अब 21वीं सदी में जितना विद्वेष देखने को मिल रहा है, शायद 20वीं सदी में उतना नहीं था। विधानसभा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ जाते हैं। व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक बात पहुंच जाती है। महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा नहीं हो पाती है। बिना चर्चा ही विधेयक पारित हो जाते हैं। यहां तक कि बजट पर भी चर्चा हो पाना अब संभव नहीं रहा है। और विधायिका का गठन जनहित की जिस मंशा की अपेक्षा रखता है, वह पूरी नहीं हो पाती। सत्र की बैठकें ही पूरी नहीं हो पातीं। यह बात इसलिए क्योंकि 10 मार्च 2025 से विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के काल का यह दूसरा बजट सत्र है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार विपक्ष का सदन में नेतृत्व करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की मंशा यही रहेगी कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सदन में तालमेल बेहतर रहे। सदन की कार्यवाही पूरे समय चले। जनहित के मुद्दों पर चर्चा हो और जन-जन के हित में बेहतर कानून बनें। बजट में जनहितैषी मुद्दों को जगह मिले। पर यह हो नहीं पाता, क्योंकि हंगामा सदन की कार्यवाही पर ग्रहण बनकर ऐसा लगता है कि लोगों के जीवन में उजाला लाने की मंशा सर्वसम्मति से पूरी नहीं हो पाती।

विधानसभा का बजट सत्र 10 मार्च 2025 यानि आज से शुरू हो रहा है। बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण होगा। वहीं 11 मार्च को राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाएगी। 12 मार्च को उप मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा बजट प्रस्तुत करेंगे। 24 मार्च को बजट सत्र समापन होगा। इस बजट से मध्य प्रदेश के लोगों को काफी उम्मीद है। 15 दिन के बजट सत्र में कुल 9 बैठकें होंगी।बजट सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष ने तैयारियां पूरी कर ली है। कांग्रेस कई मुद्दों पर सरकार को घेरेगी तो वहीं सरकार भी विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है। तो उम्मीद यही है कि मध्यप्रदेश का विधानसभा सत्र भी खेल भावना से सराबोर पक्ष-विपक्ष के सदस्यों संग अपनी सभी 9 बैठकें सफलतापूर्वक पूरी करे। जनहित के मुद्दों को सदस्य पूरी ताकत से सदन में उठाएं और लोकतंत्र का आदर्श रूप मध्यप्रदेश की साढे आठ करोड़ आबादी का मन मोह ले…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। दो पुस्तकों “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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