बिजासन माता होलकर राजवंश के समय से शहर की कुलदेवी रही हैं। राजवंश ने मातारानी के लिए 121 एकड़ जमीन आरक्षित की थी। समय के साथ अलग-अलग विभागों को जमीनें आवंटित होने से अब टेकरी पर सिर्फ 2 एकड़ जमीन ही बची है। इतनी कम जगह में यहां नवरात्र में लगने वाला मेला भी सिमटने लगा है। अगले साल से मेले पर भी संकट है।

टेकरी पर तालाब को सीमेंट-कांक्रीट से ढंक दिया है। पार्किंग की जमीन भी कम पड़ने लगी है। मंदिर बचाओ अभियान के तहत बिजासन सांस्कृतिक चेतना सेवा समिति द्वारा सोमवार से मंदिर परिसर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र पोतदार ने बताया एयरपोर्ट के पास स्थित तिराहे से मंदिर तक वाहन या पैदल पहुंचने का सीधा मार्ग है। यह सड़क आगे चलकर धार रोड से मिलती है। अब यहां की जमीन एयरपोर्ट विस्तार के लिए आवंटित कर दी गई है। इस कारण इस सड़क को बंद किया जा रहा है। वैकल्पिक मार्ग पैदल चलने वालों के लिए लंबा होगा।
नाहर गुफा और भेरू बाबा मार्ग भी बंद हुआ
समिति संरक्षक विजय सिंह परिहार ने बताया मंदिर की स्थापना काल से भेरू बाबा का मंदिर एवं नाहर गुफा है। दो साल पहले तक श्रद्धालु यहां जाते थे। अब वहां रहवासी क्वार्टर बनने से मार्ग बंद कर दिया है। मजबूरी में मंदिर परिसर में भेरू बाबा की अन्य मूर्ति स्थापित करना पड़ी। पहले बच्चों को शेर की गुफा से गुजरना काफी रोमांचक लगता था।
सीढ़ियां भी असुरक्षित हैं
पुजारी अशोक वन गोस्वामी ने बताया यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां माता के नौ स्वरूपों की प्रतिमाएं स्वयंभू प्रकट हैं। यहां एनजीटी के निर्देशों को ताक में रखकर मंदिर के तालाब पर 1.31 करोड़ की लागत से पक्का निर्माण कर प्राकृतिक स्वरूप को खत्म कर दिया है।
मेला धर्मस्व विभाग की सूची में
शासन के रिकॉर्ड में आज भी बिजासन रमणा नाम से मंदिर की 750 एकड़ से अधिक जमीन दर्ज है। यहां लगने वाला मेला भी धर्मस्व विभाग की सूची में शामिल है। अब मेट्रो को बिजासन तिराहे के पास करीब 3 एकड़ एवं एयरपोर्ट को 15 एकड़ जमीन आवंटित की है। पेयजल का भी स्थायी इंतजाम नहीं है।