गैंग की तरह काम कर रहे अफ़सर,रिश्वत के 1 करोड़ देने के लिए फैक्ट्री मालिक को मकान का सौदा तक करना पड़ा

 

‘मैं इतना मजबूर हो गया था कि सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी) के अफसरों को रिश्वत देने के लिए अपना घर बेचने वाला था। सौदा लगभग हो चुका था, लेकिन एक उम्मीद ने मुझे सड़क पर आने से बचा लिया। सीजीएसटी अफसर ने धमकी दी थी कि एक करोड़ रुपए नहीं दिए तो 10 करोड़ की टैक्स चोरी का केस बनाएंगे। हम टैक्स वसूलने के लिए तुम्हारी फैक्ट्री को नीलाम करा देंगे। तुम सड़क पर आ आओगे।’

ये पीड़ा उस व्यापारी त्रिलोक चंद सेन की है जिसकी शिकायत पर पिछले दिनों जबलपुर सीबीआई ने सीजीएसटी के पांच अफसरों को रंगेहाथ रिश्वत लेते पकड़ा था।

कहने को तो ये अफसर थे, लेकिन काम एक वसूलीबाज गैंग की तरह कर रहे थे। पहले टारगेट कर फर्म पर छापा मारते, उस पर करोड़ों का टैक्स बकाया बताते और फर्म को सील कर देते। जब पीड़ित व्यापारी फर्म खुलवाने के लिए इनसे अप्रोच करता ताे सीधे करोड़ों की रिश्वत मांगते।

दमोह मामले में भी ऐसा ही हुआ था, लेकिन व्यापारी की हिम्मत की वजह से पांचों रंगे हाथ पकड़ा गए। पीड़ित बिजनसमैन ने बताया कि ये अधिकारी व्यापारियों से पैसे की उगाही के लिए वाट्सएप कॉल करते थे। मैं दो साल की सेविंग और कर्ज लेकर 42 लाख रुपयों का इंतजाम कर पाया था। ऐसे अधिकारियों को बर्खास्त कर देना चाहिए।

मैं दौसा राजस्थान का रहने वाला हूं। मेरी मध्यप्रदेश के दमोह स्थित नोहटा में पान मसाला की फैक्ट्री है। गोपान तंबाकू प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड और खवासजी बीडी प्रा. लिमिटेड नाम दोनों फर्म हमारे एक ही परिसर से संचालित होती हैं। यहां का काम मैनेजर भगीरथ राय संभालते हैं। मैं भी आता-जाता रहता हूं। हमारी फैक्ट्री पर 18 मई 2023 की शाम 7 बजे CGST ( सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) जबलपुर की टीम ने छापा मारा।

छापेमारी जीएसटी प्रिवंटी ब्रांच के अधीक्षक कपिल कांबले, दूसरे अधीक्षक सौमेन गोस्वामी, सीजीएसटी इंस्पेक्टर विकास गुप्ता, प्रदीप हजारी, वीरेंद्र जैन सहित 11 लोगों की टीम थी। छापे के दौरान फर्म मैनेजर भगीरथ राय, गिरीराज विजय, मुनीम शमशुद्दीन से सेंट्रल जीएसटी जबलपुर टीम ने पूछताछ की गई। टीम ने कुछ कागजात जब्त करते हुए पंचनामा बनाया और फैक्ट्री को सील कर दिया।

मैनेजर भगीरथ राय ने मुझे छापा पड़ते ही जानकारी दे दी थी। इसके बाद अधीक्षक कपिल कांबले ने पहले मेरे मैनेजर और फिर मुझसे वाट्सएप कॉल कर मामले को कम में निपटाने के लिए एक करोड़ रुपए की रिश्वत की डिमांड की। डिमांड के साथ धमकी भी दी कि एक करोड़ रुपए नहीं दिए तो 10 करोड़ की टैक्स चोरी का केस बनाएंगे। हम टैक्स वसूलने के लिए तुम्हारी फैक्ट्री को नीलाम करा देंगे। तुम सड़क पर आ आओगे।

और वो एक करोड़ से 90 लाख पर आ गए

22 मई से मैं वाट्सएप कॉल कर कांबले सहित दूसरे अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाता रहा। एक करोड़ का इंतजाम कैसे होगा, इस टेंशन में तबीयत खराब हो गई। दो दिन तक दिल्ली में इलाज कराना पड़ा। खूब प्रयास भी किया अपने दोस्तों-रिश्तेदारों से मदद मांगी, लेकिन कहीं से भी एक करोड़ की रिश्वत का व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। मजबूरी में मैंने अपना मकान बेचने का फैसला किया।

सौदे के लिए बातचीत भी शुरू कर दी, एक दो लोगों से लगभग बात भी हो गई। उधर, सीजीएसटी के अधिकारियों से लगातार रिश्वत की रकम करने को लेकर अनुरोध कर रहा था। वे एक करोड़ से 90 लाख और कम होते हुए 35 लाख रुपए पर आ गए।

3 जून को शनिवार था। सीजीएसटी में अवकाश रहता है। मुझे वहां बुलाया, बीमार होने के कारण मैं नहीं जा पाया तो मैंने अपने मैनेजर भागीरथ राय और कर्मचारी गिरिराज विजय को सीजीएसटी जबलपुर भेजा। वहां बताया गया कि फैक्ट्री परिसर में संचालित दोनों फर्म की पेनाल्टी 10.68 लाख रुपए का चालान बनवाना पड़ेगा। 35 लाख रुपए अलग से रिश्वत के रूप में देने होंगे। मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था। इससे कम पर वे तैयार नहीं थे। आखिर में मैंने हां कर दी।

4 जून को वाट्सएप कॉल कर बोला गया कि रुपए लेकर 5 जून को आ जाओ।

5 जून को मैंने अपने मैनेजर भगीरथ राय और दूसरे कर्मचारियों को 25 लाख रुपए रिश्वत के और 10.68 लाख रुपए चालान का देकर सीजीएसटी जबलपुर भेजा। ये रकम जुटाने के लिए भी मुझे काफी मुश्किल आई। दो साल की सेविंग और कुछ दोस्तों से उधार लेकर रुपयों की व्यवस्था कर पाया था।

अफसर चार घंटे तक गिनते रहे रिश्वत की रकम

रिश्वत की रकम लेकर मेरा मैनेजर और दूसरे कर्मचारी सीधे अधीक्षक कपिल कांबले के ऑफिस गए। कपिल उन्हें दूसरे कमरे में ले गए, वहां अन्य अधिकारी बैठे थे। सबसे पहले फर्म का पेनाल्टी राशि जमा की गई। 35 लाख रुपए में 25 लाख रुपए अलग से दिए। वहां तय हुआ कि 10 लाख रुपए फैक्ट्री रिलीज ऑर्डर और पंचनामे के तहत जब्त हुए कागजात लौटाने पर देंगे। सीजीएसटी के अधिकारी रिश्वत की रकम सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक गिनते रहे।

वॉट्सएप कॉल की बातचीत दूसरे मोबाइल से रिकॉर्ड की

लगातार ब्लैकमेलिंग और धमकी से मैं परेशान हो चुका था। चालान के अलावा ढाई गुना रिश्वत देने के बावजूद वे लगातार रुपए की डिमांड कर रहे थे। कुछ एक दोस्तों से इसके बारे में चर्चा की। दोस्त ने सलाह दी कि तुम्हें सीबीआई में शिकायत करनी चाहिए। सोचा कि ये रिश्वतखोर अधिकारी मेरी तरह ही दूसरे लोगों को भी इसी तरह से ब्लैकमेलिंग कर परेशान करते रहेंगे। इन्हें सबक सिखाना चाहिए।

12 जून को मैं मैनेजर भगीरथ राय के साथ जबलपुर में सीबीआई एसपी से मिलने पहुंचा। एसपी रिचपाल सिंह को पूरी बात बताई। इसके बाद लिखित शिकायत दी। उन्होंने बातचीत के लिए उपकरण भी दिए, लेकिन मुश्किल ये थी कि सीजीएसटी के अधिकारी फोन कॉल करने की बजाए वाट्सएप कॉल पर ही रिश्वत की रकम मांग रहे थे। वाट्सएप कॉल की रिकॉर्डिंग नहीं हो पा रही थी।

सीबीआई अधिकारियों के कहे अुनसार गिरीराज विजय ने सीजीएसटी अधीक्षक कपिल कांबले के 9644497927 नंबर पर वाट्सएप कॉल किया। दूसरे मोबाइल से इस बातचीत को रिकॉर्ड किया गया। 10 लाख रुपए में कुछ राहत देने का अनुरोध किया। इसके बाद सीजीएसटी के अधिकारी 7 लाख रुपए में ही मामला निपटाने को तैयार हो गए।

रिश्वत के नोटों की गिनती कर रहे थे और सीबीआई ने पकड़ लिया

सीबीआई एसपी रिचपाल ने सेंट्रल जीएसटी के अधिकारियों को रंगे हाथ दबोचने के लिए प्लान बनाया। रिश्वत में दिए जाने वाले 7 लाख रुपए के नोटों का सीरियल नंबर नोट किया गया। उस पर खास तरह का कैमिकल लगाया।

इसके बाद रिश्वत की रकम देकर तय 13 जून को मेरे मैनेजर गिरिराज और दूसरे कर्मचारी सीजीएसटी कार्यालय जबलपुर पहुंचे। कुछ दूरी बनाए सीबीआई टीम के डिप्टी एसपी जेजे दामले, इंस्पेक्टर प्रशांत राज, एमके बैजूए यूपी सिंह, जुगल किशोर और संदीप सिंह भी थे। अधीक्षक कपिल कांबले मुझसे पैसे लेकर कमरे में चले गए। मुझे रुकने के लिए कहा। वो अंदर नोटों की गिनती करने लगे।

पिछली बार 17 हजार रुपए कम और कटे-फटे मिलने से उन्हें संदेह था कि इस बार भी ऐसा हो सकता। जब ये रिश्वतखोर अफसर घूस के पैसों की गिनती कर रहे थे, उसी समय सीबीआई की टीम पहुंच गई। टीम ने अधीक्षक कांबले, दूसरे अधीक्षक सौमेन गोस्वामी और तीन सीजीएसटी इंस्पेक्टर विकास गुप्ता, प्रदीप हजारी, वीरेंद्र जैन को रंगेहाथ दबोच लिया। सीबीआई की इस कार्रवाई से अफरा-तफरी मच गई। टीम ने सभी आरोपियों के हाथ धुलवाकर रंगीन पानी को सील कर लिया। रिश्वत में दी गई रकम को भी जब्त कर लिया। सीबीआई ने पांचों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज की है।

घर देख चौंक गई सीबीआई टीम, 10 करोड़ का है कांबले का मकान

अधीक्षक कपिल कांबले के रांझी स्थित घर सीबीआई टीम पहुंची तो उसका मकान देख चौंक गई। कांबले के घर की कीमत 10 करोड़ आंकी जा रही है। घर में सभी तरह की आधुनिक विलासिता के इंतजाम थे। टीम ने सभी की लिस्टिंग की है। सीबीआई ने सभी पांचों आरोपियों को 20 जून तक रिमांड पर लिया है। पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारी समाने आई है।

बताते हैं कि इस ब्लैकमेलिंग गैंग का मुखिया कपिल कांबले ही है। उसी के इशारे पर ये टीम व्यापारियों के यहां छापा मारने पहुंचती है। छापा मारने के बाद टीम का असल खेल शुरू होता है। पांचों के घरों की सर्चिंग में बेनामी संपत्ति मिली है। पीड़ित त्रिलोक चंद सेन के मुताबिक आरोपियों ने रिश्वत से ये बेनामी संपत्ति का साम्राज्य खड़ा किया है।

डिजिटल वॉइस रिकॉडर की मदद से बातचीत को ट्रैप कराया

सेंट्रल जीएसटी के अधिकारी पेशेवर अधिकारियों की तरह काफी शातिर हैं। किसी की पकड़ में न आ सके, इसके चलते वे किसी भी टारगेट व्यापारी से सीधे कॉल नहीं करते थे। पूरी सौदेबाजी वाट्सएप कॉल पर करते थे। वाट्सएप कॉल की रिकॉर्डिंग मुश्किल होती है, लेकिन सीबीआई ने डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर की मदद से पीड़ित और रिश्वत मांग रहे अधिकारियों की बातचीत को ट्रैप कराया।

डिजिटल वॉइस रिकॉडर की मदद से सिम को अपने विशेष डिवाइस में लगाया और फिर वाट्सएप पर जीएसटी अफसर से बातचीत करवाई। इस बातचीत में अफसर ने पैसे लेने की बात कही। रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि के बाद सीबीआई टीम ने इस वसूली गैंग के पर्दाफाश की रणनीति तैयार की थी। ये रिकॉर्डिंग बतौर सबूत सीबीआई कोर्ट में भी रखेगी।

ब्लैकमेलिंग से मैं डिप्रेशन में चला गया था

सेंट्रल जीएसटी के वसूली गैंग में शामिल पांच अधिकारियों को रंगेहाथों गिरफ्तार करवाने वाले फर्म के मालिक त्रिलोक चंद सेन कहते हैं कि ऐसे अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर देना चाहिए। यहां ईमानदार अधिकारियों को बैठाया जाए। मैंने इनकी डिमांड पूरी करने के लिए दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लिए। दो साल की जो भी सेविंग बैंक में थी उसे निकाला। बस किसी तरह सील की गई फैक्ट्री को बचाना था।

इनकी ब्लैकमेलिंग से मैं डिप्रेशन में चला गया था। 15 दिनों तक मैं वाट्सएप कॉल पर गिड़गिड़ाता रहा। मेरी पत्नी और पापा तक तनाव में आ गए थे। कोई दूसरा होता तो आत्मघाती कदम भी उठा सकता था।

दो साल पहले डाली है फैक्ट्री

राजस्थान के दौसा निवासी त्रिलोक चंद सेन होटल व्यापारी हैं। 2021 में उन्होंने मैसर्स गोपन तंबाकू प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड और खवासजी बीड़ी प्राइवेट लिमिटेड नाम से दमोह के नोहटा में फैक्ट्री डाली थी। बीड़ी का कारोबार नहीं चला तो इसे बंद कर दिया। पान मसाला का कारोबार शुरू किया है। अभी इसकी सैम्पलिंग चल रही है। 18 मई 2023 को जब सीजीएसटी टीम के अधीक्षक कपिल कांबले की टीम ने फैक्ट्री पर रेड कर इसे सीज किया, तब त्रिलोकचंद रतलाम में थे। फैक्ट्री में मैनेजर भागीरथ राय और गिरिराज विजय ही थे।

दो दिन पहले पड़ा था जबलपुर में छापा…

CGST अफसरों के ठिकानों से 83.26 लाख कैश बरामद

जबलपुर में बुधवार को CGST (सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) अधीक्षक कपिल कांबले और 4 अन्य अधिकारियों के घरों और दफ्तर से 83.26 लाख कैश मिला था। कांबले और उनके साथी अधीक्षक सौमेन गोस्वामी, इंस्पेक्टर विकास गुप्ता, प्रदीप हजारी और वीरेंद्र जैन को CBI की जबलपुर टीम ने मंगलवार शाम गिरफ्तार किया था। ये दफ्तर में ही 7 लाख रु. की घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गए थे।

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