
सागा ग्रुप बनाकर 7 सोसाइटी के माध्यम से देशभर के 16 राज्यों में 10 हजार करोड़ की ठगी करने वाले मास्टर माइंड समीर अग्रवाल के ऑफिस का पता अब लंदन हो गया है। नए ऑफिस का पता कंपनी के उपेंद्र राय की ओर से सभी लीडर्स को मैसेज के जरिए भेजा गया है। मैसेज के जरिए यह भी बताया गया है कि मैनेजमेंट द्वारा मैच्युरिटी संबंधित प्रॉब्लम का समाधान बहुत जल्द किया जाएगा
कंपनी के मैसेज में यह भी कहा गया है कि जिन्हें भी हम बिजनेस में लाए हैं या पैसा जमा कराए हैं। उनसे हमेशा संपर्क बना के रखते हैं। इसी तरह आप लोगों को भी अपने-अपने डाउन लाइन के साथ संपर्क बना के रखना है।
मैनेजमेंट का हवाला देते हुए कहा है कि अब एक भी पैसा कैश किसी भी सुविधा केंद्र को ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। नए साल जनवरी-फरवरी महीने से डायरेक्ट जमाकर्ता के सेविंग बैंक खाता में देगा।

सोशल मीडिया पर सागा ग्रुप का रजिस्टर्ड ऑफिस लंदन में बताया जा रहा है।

उपेंद्र राय द्वारा कंपनी के सभी लीडर्स को भेजा गया मैसेज।
मुरैना के टैंटरा गांव का रहने वाला ठग
दैनिक भास्कर ने ठगी कर सागा ग्रुप बनाने वाले सीएमडी समीर अग्रवाल के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला वह मुरैना के छोटे से गांव टैंटरा का रहने वाला है अभी दुबई में छिपा है। उसकी गिरफ्तारी पर एमपी और यूपी पुलिस ने 50-50 हजार रुपए इनाम का ऐलान किया है। सीबीआई ने भी उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है।
ठगी का मास्टरमाइंड और चिटफंड कारोबारी सागा ग्रुप का सीएमडी समीर अग्रवाल का सीधा संबंध चंबल संभाग के मुरैना जिले के टैंटरा गांव से है। ये ठग हर साल मुरैना के टैंटरा गांव में झारवाली माता मंदिर आता था। यह उनकी कुलदेवी का स्थान है। हर साल नवरात्रि में सप्तमी से नवमी तक समीर अपने परिवार के साथ मंदिर में पूजा-अर्चना और अनुष्ठान भी कराता था।
गांव के पूर्व सरपंच अशोक पाराशर के मुताबिक समीर के पिता राजेंद्र अग्रवाल करीब 50 साल पहले इंदौर, फिर भुसावल और अंततः मुंबई में जाकर बस गए थे। नजदीकी लोगों के मुताबिक समीर ने नेटवर्किंग मार्केटिंग की पढ़ाई की थी और 2009 में एक एडवांटेज मार्केटिंग कंपनी से जुड़ गया था।
मंदिर के पुजारी सतीश गोस्वामी ने बताया कि समीर और उसके पिता हर साल नवरात्रि में झारवाली माता की पूजा के लिए आते थे। कोरोना काल में पिता की मौत के बाद समीर ने आना बंद कर दिया। हालांकि, उसकी मां अभी भी दर्शन के लिए आती है।

इकलौता बेटा था समीर, 2009 में खोली चिटफंड कंपनी
मुरैना जिले के टैंटरा गांव का रहने वाला समीर का परिवार दो पीढ़ियों पहले इंदौर शिफ्ट हो गया था। समीर के पिता राजेंद्र अग्रवाल एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे। समीर उनका इकलौता बेटा है। साल 2008 में उसने ग्रेजुएशन किया, पढ़ाई के दौरान ही वह मुंबई से ऑपरेट होने वाले मटका सट्टा से जुड़ा और इंदौर में उसका बुकी बन गया।
समीर ने 2009 में पहली चिटफंड कंपनी खोली और उसके बाद से लगातार फर्जी कंपनियां बनाकर लोगों से पैसा ऐंठता रहा। साल 2012 के बाद समीर इंदौर छोड़कर नवी मुंबई शिफ्ट हो गया।
समीर ने 2012 में ‘ऑप्शन वन’ नामक कंपनी शुरू की। लेकिन, 2016 में सरकारी कार्रवाई का अंदेशा होते ही 2016 में इसका नाम बदलकर ‘स्वामी विवेकानंद’ कर दिया। इस नाम का चयन लोगों को हिंदू संगठनों से जोड़ने के मकसद से किया गया था। 2020 में एक बार फिर नाम बदलकर LJCC कर दिया गया।

1 हजार ब्रांच खोलीं और एक लाख एजेंट्स बनाए
सागा ग्रुप ने सोसाइटियों के रजिस्ट्रेशन के बाद देशभर में तहसील और ब्लॉक स्तर पर 1 हजार ब्रांच खोली। एक लाख एजेंट्स जोड़े। कुछ को सैलरी पर रखा, बाकियों को इन्वेस्टमेंट लाने पर 4 से 12 प्रतिशत का कमीशन दिया जाता था। मप्र के 16 जिलों में 40 ब्रांच ऑफिस खोले गए। यूपी के ललितपुर समेत 22 जिलों में भी जगह-जगह ब्रांच ऑफिस खोले गए। ये सोसाइटी लुभावने स्कीम लॉन्च कर लोगों के पैसे जमा कराती थी। इनमें मंथली इनकम सहित एफडी, आरडी, एमआईएस की रसीद देकर मैच्युरिटी की तारीख तय कर देती थी। नकद लेन-देन पर ज्यादा जोर था। इसमें प्रतिदिन के हिसाब से भी लोगों से पैसे जमा कराए जाते थे।

कृषि मंत्रालय में 7 को-ऑपरेटिव सोसाइटी का रजिस्ट्रेशन
सागा ग्रुप ने साल 2012-13 के बीच कुल 7 सोसाइटी का रजिस्ट्रेशन कृषि मंत्रालय में कराया। इनमें से दो सोसाइटियों के दफ्तर एमपी में खोले गए। लस्टिनेस जनहित क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (LJCC) का रजिस्ट्रेशन 24 जनवरी 2013 को हुआ।
इसमें समीर अग्रवाल सीएमडी, अनुराग बंसल चेयरमैन, आरके शेट्टी वित्तीय सलाहकार, संजय मुदगिल ट्रेनर, सुतीक्ष्ण सक्सेना और पंकज अग्रवाल पार्टनर के तौर पर जुड़े। सागा ग्रुप ने सोसाइटी का रजिस्ट्रेशन लोन देने के लिए किया था।
कंपनी 2016 से बैंकिंग, क्रेडिट, एफडी, आरडी, एमआईएस, सुकन्या, धन पेटी, एजुकेशन प्लान, पेंशन प्लान, आयुष्मान जैसी स्कीम के जरिए लोगों से पैसा इन्वेस्ट कराने लगी।
जानिए कब कौन सी कंपनी खोली
साल 2009: एडवांटेज ट्रेड कॉम नाम से ग्वालियर में कंपनी का रजिस्ट्रेशन: ये कंपनी टूर पैकेज बेचने का काम करती थी। इसमें 7500 रुपए एक ग्राहक से लिए जाते थे। टूर देश के ही अलग-अलग हिस्सों में कराया जाता था। तीन साल के इस प्लान में यदि कोई ग्राहक टूर नहीं करता था तो उसे डबल रकम के तौर पर 15000 रुपए भुगतान का लालच दिया जाता था।
साल 2012: ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी का ग्वालियर में रजिस्ट्रेशन: इस कंपनी में एडवांटेज ट्रेड के ग्राहकों को मर्ज कर दिया गया। इसका हेड ऑफिस इंदौर में खोला गया। कंपनी तब बॉन्ड बेचती थी। इसमें पांच साल में लोगों की रकम डबल करने का झांसा दिया जाता था।
साल 2016: कंपनी बंद, 7 सोसाइटियों का रजिस्ट्रेशन: समीर अग्रवाल ने कंपनियों को बंद कर कृषि मंत्रालय में अलग-अलग नामों से 7 सोसाइटी रजिस्टर्ड कराई। मध्यप्रदेश में श्री स्वामी विवेकानंद मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी (एसएसवी) ने ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी का स्थान लिया।
साल 2019: एसएसवी सोसाइटी बंद, LJCC शुरू: भोपाल में एसएसवी के खिलाफ शिकायतें और एफआईआर दर्ज होने पर सेबी ने इसके कामकाज पर रोक लगा दी। इसके बाद एमपी में लस्टिनेस जनहित क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (LJCC) ने काम शुरू किया। एसएसवी के सभी ग्राहकों को इसमें मर्ज कर दिया गया। सारा काम पुरानी सोसाइटी की तरह ही होता था।

लोगों को मिलने वाले सरकारी मुआवजे पर नजर
सागा ग्रुप ने एमपी में उन जगहों को टारगेट किया, जहां लोगों को सरकारी मुआवजे के तौर पर पैसा मिला। एमपी और यूपी के बुंदेलखंड रीजन में पिछले सालों में सरकार के कई बड़े प्रोजेक्ट आए। ललितपुर में 2012 में बजाज पावर प्लांट की स्थापना हुई। एमपी के टीकमगढ़ में बानसुजारा बांध बना। इसमें लोगों की जमीनें अधिगृहीत हुई। उनके पास पैसे आए। सागा ग्रुप ने सोसाइटियों के जरिए ये पैसा अपनी स्कीम्स में निवेश कराया।
भिंड कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
चिटफंड से जुड़े एजेंट व स्थानीय आफिस के मैनेजर व कारोबारियों ने पिछले दिनों एसपी आफिस में एक शिकायत आवेदन भी भेजा। इस आवेदन का उद्देश्य सीधा यह है कि जिले में होने वाली कार्रवाई से बच सकें। हालांकि भिंड कलेक्टर संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि LJCC और के खिलाफ जांच कराई जा रही है। निवेशकों की शिकायतों के आधार पर समीर अग्रवाल व उसे जुड़े जिले के लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। की संपत्तियों की तलाश की जा रही है। जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई होगी।

गोटीराम राठौर बोले-सौदा देख इन्वेस्ट कर दिया
भिंड के दबोह के रहने वाले गोटीराम राठौर की खेती की जमीन को सरकार ने हाईवे बनाने के लिए अधिगृहीत किया। इसके एवज में उन्हें 5.50 लाख रुपए का मुआवजा मिला। गोटीराम कहते हैं कि सोसाइटी के एजेंट ने संपर्क किया। बताया कि रकम पांच साल में दोगुनी हो जाएगी यानी 11 लाख रुपए मिलेंगे। फायदे का सौदा देख मैंने पूरी रकम इन्वेस्ट कर दी।
