सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के मौके पर निकले यूनिटी मार्च में मुख्यमंत्री को खुद अपने हालात से सुरक्षा घेरे में आने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं के लिए कहना पड़ा कि भीड़ कम है। इन्हें रस्सी के नजदीक चलने दीजिए।

पिछले तीन दिन से नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा सहित तमाम भाजपाई इस कार्यक्रम की तैयारी में लगे थे। बावजूद इसके उतनी भीड़ नहीं हो पाई जितनी कि मुख्यमंत्री को उम्मीद थी। भीड़ कम होने का कारण भाजपाइयों की मक्कारी नहीं बल्कि मुख्यमंत्री का देरी से पहुंचना था। दो दिन पहले भाजपा दफ्तर पर हुई बैठक में तय हुआ था कि रैली का वक्त सुबह 10 का रहेगा, लेकिन मुख्यमंत्री एक बजे रथ पर सवार हुए इसलिए ज्यादातर लोग रैली के पहले ही निकल गए थे।
शुरुआत छोटी ग्वालटोली लंगड़ा शॉकप से हुई। यहां सभा के लिए बड़ा मंच लगाया था जिस पर कैलाश विजयवर्गीय सहित तमाम भाजपा नेता मौजूद थे। बोलने का मौका सिर्फ विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री को ही मिला। संचालन हमेशा की तरह हरप्रीत बक्षी कर रहे थे, विधायक गोलू शुक्ला ने तब वो बना लिया जब उन्हें आभार प्रदर्शन के लिए तब खड़ा कर दिया गया। जब मुख्यमंत्री मंच से नीचे उतर गये थे बावजूद इसके शुक्ला ने एक मिनट का आभार प्रकट कर फटाफट रथ पर अपनी जगह बना ली। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और तुलसी सिलावट दोनों मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द खड़े हो गए। किसी के लिए जगह नहीं थी। पहली बार में तो महापौर भार्गव को ही आगे खड़े रहने का मौका नहीं मिला। यह तय हो गया था कि जिस विधानसभा वाला इलाका चलेगा, वहां का नेता होगा। सुमित मिश्रा ने अपनी जगह पहले ही रथ पर बना ली थी, माइक भी उन्हीं के हाथ में था, हर मंच की जानकारी भी दे रहे थे। श्याम स्कूटर्स से जैसे ही रथ आगे बढ़ा, सामने विधायक रमेश मेंदोला ने एक बड़ा मंच लगा रखा था, जो इस यात्रा का सबसे बड़ा मंच था, युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष बनने की जुगत में लगे अक्षय चौधरी ने विधायक के जरिए यहीं से अपनी ताकत दिखाई। मुख्यमंत्री यादव के लिए एक बड़ी माला बनाई थी जिसे पहनाने के लिए अक्षत खुद रथ पर चढ़ गए, यहां से काफिला आगे बढ़ा तो पहले राऊ विधानसभा उसके बाद चार नंबर विधानसभा के मंच लगे थे। राऊ वाले हिस्से में तो विधायक मधु वर्मा को रथ पर जगह नहीं मिल पाई लेकिन जहां से चार नंबर विधानसभा का मंच शुरू हुआ है वहां मालिनी गौड़ ने मुख्यमंत्री के नजदीक अपनी जगह बना ली। सभी की तरफ इशारा करके बता रही थीं कि कौन सा मंच किसका है। विधानसभा तीन के मंच थे, विधायक को गोलू शुक्ला मुख्यमंत्री के नजदीक खड़े हो गए और तमाम मंच लगाने वालों का परिचय देने लगे। छावनी चौराहे पर जैसे ही यात्रा पहुंची आखिरी मंच से मुख्यमंत्री को भाषण देने के लिए बुला लिया गया।