युद्ध के टीले पर खड़ा विश्व… कौशल किशोर चतुर्वेदी

युद्ध के टीले पर खड़ा विश्व…

पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है। हम बांग्लादेश में हिन्दुओं और बौद्ध-ईसाईयों पर हो रहे हमलों से आहत हैं। तो वहीं फिलीस्तीन में नरसंहार कथा जारी है। यूक्रेन के नाटो समर्थित हमलों ने रूस को बैकफुट पर जाने को मजबूर कर दिया है। तो परमाणु युद्ध जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं। उधर ईरान ने ट्रंप के प्रचार अभियान में सेंध लगा दी है। चीन ईरान का समर्थन कर रहा है। तो नाटो यूक्रेन का समर्थन कर रहा , ऐसे में रूस भी अब यूरोप-अमेरिका के विरोध में खुलकर सामने है। ऐसी विषम परिस्थितियों में भारत की नजर चारों तरफ है। शेख हसीना भारत की शरण में हैं, तो रूस और भारत मित्रता मजबूत हो रही है। तो भारत को अमेरिका से भी कोई परहेज नहीं है। पर पाकिस्तान भारत के गले की हड्डी बना हुआ है, सो एक न एक दिन तो भारत को भी मैदान में खड़े होकर ताल तो ठोकना ही पड़ेगी, भले ही कोई भी पक्ष चुने। लब्बोलुआब यही है कि चारों तरफ मचा हाहाकार टीले पर बैठे विश्व युद्ध की तरफ उंगली दिखा रहा है। जिसके बाद पूरा विश्व आक्रोश की आग में झुलसता नजर आने वाला है।
एक नजर दुनिया पर डालें तो इजरायल और गाजा के बीच लंबे समय से तनाव जारी है। हाल ही में इजरायल ने शनिवार को गाजा के एक स्कूल पर बड़ा हवाई हमला किया। इस हमले में 100 से अधिक फलस्तीनी मारे गए हैं। अब इसके बाद इजरायली सेना ने रविवार सुबह दक्षिणी गाजा में लोगों को बाहर सुरक्षित निकलने का आदेश दिया। इजरायल ने कहा कि उसने एक आतंकवादी कमांड पोस्ट को निशाना बनाया।
उधर ईरान भी विश्व को युद्ध के टीले पर खड़ा करने पर अड़ा है। अमेरिका का इजरायल को सपोर्ट तो ईरान के साथ तीन खुलकर खड़ा हो गया है। ऐसे में मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध की आशंका लगातार बढ़ रही है। अगर इजरायल-ईरान के बीच युद्ध होता है तो कई बड़े देश भी दो गुटों में बंट सकते हैं। युद्ध की स्थिति में अमेरिका पहले ही इजरायल के समर्थन का ऐलान कर चुका है। अब चीन ने ईरान के साथ खुलकर खड़ा होने की घोषणा कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं।
तो तीसरा दृश्य इससे भी भयावह है। रूस और यूक्रेन के युद्ध में एक बार फिर पुतिन को बड़ा झटका लगा है। रूस के अंदर यूक्रेनी सेना घुस गई है। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यह पहली बार है जब किसी देश की सेना ने रूस में हमला बोला है। इस हमले के कारण 76000 से ज्यादा लोगों को रूस ने दूसरी जगह शिफ्ट किया है। जो खुद की जान बचा रहा था, वह अब जान लेने पर उतारू है।
तो अवामी लीग की अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे साजिब वाजेद जॉय ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को जमकर खरीखोटी सुनाई है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में यह सुधार नहीं, बल्कि भीड़तंत्र का मामला है। उन्होंने रविवार को फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर अंतरिम सरकार से कई गंभीर सवाल पूछे। साजिब ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में भीड़ का बोलबाला है। प्रदर्शनकारियों को खुली छूट है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों ने नए चीफ जस्टिस को नियुक्त करने की मांग की और इसके लिए एक नाम भी सौंपा, जिसे मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने मान लिया। और भीड़ तंत्र ने अब मांगें मनवाने के लिए सुरसा की तरह मुंह खोल लिया है, जिसका आकार लगातार बढ़ रहा है। देखना यह है कि बांग्लादेश किस करवट बैठकर बड़े युद्ध में अपनी भूमिका चुनता है।
शायद अब 21 वीं सदी में होने वाले युद्ध की भविष्यवाणियां खुले आसमान में पंख लगाकर मंडरा रही हैं। कौए कांव-कांव की रट लगाए हैं, तो चील ऊंची उड़ान भर रहे हैं। सियार शेर का शिकार करने पर उतारू है। मानो नदियां उल्टी दिशा में बहने को मचल रही हों। सांप नेवलों को फुफकारकर भगाने के जतन में लगे हों। दुनिया में देशों के बीच लगी होड़ यही बता रही है कि विश्व अब युद्ध के टीले पर खड़ा है, कभी भी यह आंच सभी देशों को कोई एक खेमा चुनने को मजबूर कर सकती है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। दो पुस्तकों “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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