MP में नहीं है पीओई ऑफिस, कानूनी जानकारी के लिए जाना पड़ता है मुंबई , अवैध एजेंटों के चंगुल में फंसने का रहता है डर

अवैध एजेंटों के चंगुल में फंसने का रहता है डर, रोजगार के करार और दस्तावेजों के सत्यापन में होती है देरी

मध्यप्रदेश से हर साल करीब दस हजार लोग विदेश जाते हैं, लेकिन यहां प्रवासी संरक्षक कार्यालय (प्रोटेक्टर ऑफ इमीग्रेंट्स) यानी पीओई नहीं है। इसके लिए प्रदेश के लोगों को मुंबई जाना पड़ता है, जहां कई बार लोग दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं।

अगर इसका भोपाल में कार्यालय खुल जाए तो नौकरी के संबंध में विदेश जाने की सही प्रक्रिया की जानकारी मिल सकेगी। पीओई की जरूरत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मप्र में वर्ष 2024 में 2.59 लाख पासपोर्ट बने हैं जो वर्ष 2023 की तुलना में 10 फीसदी से ज्यादा हैं।

प्रवासी संरक्षक कार्यालय विदेश मंत्रालय के अंतर्गत आता है। यह विदेश जाने वालों को कानूनी प्रक्रिया की जानकारी देता है। अवैध एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई करता है और धोखाधड़ी से बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाता है। पीओई सुनिश्चित करता है कि प्रवासियों से संबंधित सभी कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाए।

अवैध एजेंटों के झांसे में आकर धोखाधड़ी की आशंका बढ़ती है

  • उत्प्रवास मंजूरी के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। इससे समय और पैसा बर्बाद होता है। यात्रा की परेशानी भी बढ़ जाती है।
  • दस्तावेजी कार्यवाही के लिए अनधिकृत एजेंटों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामले बढ़ सकते हैं।
  • रोजगार करारों और दस्तावेजों के सत्यापन में देरी होती है। नौकरी मिलने की प्रक्रिया लंबी हो जाती है।
  • बिना पीओई कार्यालय महिला श्रमिकों की सुरक्षा और रोजगार शर्तों की निगरानी करना काफी कठिन हो जाता है। वहीं उनके शोषण की भी आशंका बढ़ जाती है।
  • अकुशल और अर्धकुशल श्रमिकों को सही नौकरी के अवसरों की पहचान करने में दिक्कत होती है।
  • पीओई कार्यालय यह सुनिश्चित करता है कि उन्हें उचित वेतन और बेहतर कामकाजी शर्तें मिलें।
  • कानूनी सहायता और आपातकालीन स्थिति में सहायता पीओई कार्यालय के जरिए ही मिलती है। इसके बिना नागरिकों को विदेश में किसी भी समस्या का समाधान मुश्किल हो जाता है।

यहां हैं पीओई कार्यालय… दिल्ली, मुंबई, रायबरेली उप्र, कोलकाता, चंडीगढ़, चेन्नई, जयपुर, गुवाहाटी, कोचीन, तिरुवनंतपुरम, पटना, रांची, बेंगलुरु, हैदराबाद, भुवनेश्वर।

शासन प्रस्ताव भेजे तो खोल सकते हैं

यह सही है कि मप्र के लोगों को विदेश जाने की प्रक्रिया और अन्य जानकारी के लिए महाराष्ट्र पर निर्भर रहना पड़ रहा है। मप्र में पीओई नहीं है। मप्र सरकार विदेश मंत्रालय को प्रस्ताव भेजे तो एक कार्यालय मप्र में खोला जा सकता है।

-अरुण कुमार चटर्जी, सचिव (सीपीवी और ओआईए), विदेश मंत्रालय

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