
भारत समेत दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। जहां दुनियाभर में अब तक पांच करोड़ 31 लाख से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, तो वहीं भारत में भी संक्रमितों की संख्या 87 लाख के पार हो गई है। इसके अलावा कोरोना से मरने वालों की संख्या भी भारत में अब एक लाख 28 हजार से अधिक हो गई है। दरअसल, कोरोना वायरस के तेजी से फैलने की वजह उसके म्यूटेशन यानी उत्परिवर्तन को माना जा रहा है। पहले ये माना जा रहा था कि म्यूटेशन के कारण कोई भी संभावित वैक्सीन कोरोना पर असर नहीं करेगी, लेकिन एक ताजा अध्ययन में यह दावा किया गया है कि म्यूटेशन के कारण ही कोरोना का संभावित टीका इस पर असर कर सकेगा। कोरोना वायरस के विकास को समझने की दृष्टि से यह अध्ययन बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के नॉर्थ कैरोलीना विश्वविद्यालय (यूएनसी), चैपल हिल और विस्कॉन्सिन-मेडिसन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि कोरोना वायरस का नया ‘स्ट्रेन’ (डी614जी) यूरोप में उभरा और दुनियाभर में फैल गया। ‘साइंस’ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पता चला कि ‘डी614जी’ तेजी से अपनी नकल बनाता है और सामान्य वायरस से ज्यादा तेजी से फैल भी सकता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, ‘डी614जी’ स्ट्रेन का जानवरों की किसी ज्यादा गंभीर बीमारी से कोई वास्ता नहीं है और यह एंटीबॉडी पैदा करने वाली दवाओं के प्रति थोड़ा ज्यादा संवेदनशील है। बताया जाता है कि इस स्ट्रेन का उद्भव कोरोना महामारी की शुरुआत में चीन में हुआ था।
कुछ महीने पहले जारी हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘डी614जी’ स्ट्रेन अन्य व्यक्तियों में 10 गुना अधिक तेजी से संक्रमित करने की क्षमता रखता है। विशेषज्ञों का कहना था कि कोरोना वायरस से बचने के लिए किए जा रहे उपायों की वजह से ही यह नियंत्रण में है, लेकिन एक बार अगर इस वायरस का प्रसार विस्फोटक रूप में फैल गया तो इसे नियंत्रित करना बहुत मुश्किल हो सकता है।
हालांकि भारत समेत दुनियाभर में कोरोना से निपटने के लिए वैक्सीन बनाने का काम काफी तेजी से चल रहा है। लेकिन सबसे अच्छी बात ये है कि बिना वैक्सीन भारत में इस बीमारी से स्वस्थ होने की दर करीब 93 फीसदी हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक देश में 81 लाख 15 हजार से अधिक कोरोना मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।