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??जय श्री राम??
?? सुप्रभातम् ??
?««« आज का पंचांग »»»?
कलियुगाब्द…………………..5123
विक्रम संवत्………………….2078
शक संवत्…………………….1943
मास………………………….भाद्रपद
पक्ष…………………………….शुक्ल
तिथी………………………….चतुर्थी
रात्रि 09.57 पर्यंत पश्चात पंचमी
रवि………………………दक्षिणायन
सूर्योदय……….प्रातः 06.12.03 पर
सूर्यास्त……….संध्या 06.35.31 पर
सूर्य राशि……………………….सिंह
चन्द्र राशि………………………तुला
गुरु राशि………………………..गुरु
नक्षत्र…………………………..चित्रा
दोप 12.52 पर्यंत पश्चात स्वाति
योग……………………………ब्रह्मा
संध्या 05.33 पर्यंत पश्चात इंद्र
करण………………………..वणिज
प्रातः 11.08 पर्यंत पश्चात विष्टि
ऋतु…………………………….वर्षा
दिन…………………………शुक्रवार
?? आंग्ल मतानुसार :-
10 सितम्बर सन 2021 ईस्वी ।
? भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी :-
? श्री भादव गणेश चतुर्थी :-
शिवपुराणके अन्तर्गत रुद्रसंहिताके चतुर्थ (कुमार) खण्ड में यह वर्णन है कि माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक बालक को उत्पन्न करके उसे अपना द्वारपाल बना दिया। शिवजी ने जब प्रवेश करना चाहा तब बालक ने उन्हें रोक दिया। इस पर शिवगणोंने बालक से भयंकर युद्ध किया परंतु संग्राम में उसे कोई पराजित नहीं कर सका। अन्ततोगत्वा भगवान शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक का सर काट दिया। इससे भगवती शिवा क्रुद्ध हो उठीं और उन्होंने प्रलय करने की ठान ली। भयभीत देवताओं ने देवर्षिनारद की सलाह पर जगदम्बा की स्तुति करके उन्हें शांत किया। शिवजी के निर्देश पर विष्णुजीउत्तर दिशा में सबसे पहले मिले जीव (हाथी) का सिर काटकर ले आए। मृत्युंजय रुद्र ने गज के उस मस्तक को बालक के धड पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया। माता पार्वती ने हर्षातिरेक से उस गजमुखबालक को अपने हृदय से लगा लिया और देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद दिया। ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उस बालक को सर्वाध्यक्ष घोषित करके अग्रपूज्यहोने का वरदान दिया। भगवान शंकर ने बालक से कहा-गिरिजानन्दन! विघ्न नाश करने में तेरा नाम सर्वोपरि होगा। तू सबका पूज्य बनकर मेरे समस्त गणों का अध्यक्ष हो जा। गणेश्वर!तू भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा के उदित होने पर उत्पन्न हुआ है। इस तिथि में व्रत करने वाले के सभी विघ्नों का नाश हो जाएगा और उसे सब सिद्धियां प्राप्त होंगी। कृष्णपक्ष की चतुर्थी की रात्रि में चंद्रोदय के समय गणेश तुम्हारी पूजा करने के पश्चात् व्रती चंद्रमा को अर्घ्यदेकर ब्राह्मण को मिष्ठान खिलाए। तदोपरांत स्वयं भी मीठा भोजन करे। वर्षपर्यन्तश्रीगणेश चतुर्थी का व्रत करने वाले की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को रात्रि में चन्द्र-दर्शन (चन्द्रमा देखने को) निषिद्ध किया गया है। जो व्यक्ति इस रात्रि को चन्द्रमा को देखते हैं उन्हें झूठा-कलंक प्राप्त होता है। ऐसा शास्त्रों का निर्देश है। यह अनुभूत भी है। इस गणेश चतुर्थी को चन्द्र-दर्शन करने वाले व्यक्तियों को उक्त परिणाम अनुभूत हुए, इसमें संशय नहीं है। यदि जाने-अनजाने में चन्द्रमा दिख भी जाए तो निम्न मंत्र का पाठ अवश्य कर लेना चाहिए-
‘सिहः प्रसेनम् अवधीत्, सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्वमन्तकः॥’
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन मंगलमूर्ति भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापना घर-घर में की जाएगी। 10 सितंबर 2021, शुक्रवार के दिन चतुर्थी तिथि रात्रि 9 बजकर 57 मिनट तक रहेगी। इस दिन ब्रह्मा योग रहेगा जो सायं 5.33 बजे तक रहेगा। इस दिन सिंह राशि का सूर्य और तुला राशि का चंद्र रहेगा। चतुर्थी के दिन चित्रा नक्षत्र का रहना निश्चित रूप से शुभ है। भगवान गजानन मध्याह्न काल में प्रकट हुए थे। पवित्र मिट्टी से भगवान गजानन की पार्थिव प्रतिमा बनाकर आज ठीक दोपहर 12 बजे स्वस्तिक पर स्थापित कर पूजा करें। चौघड़िया के अनुसार स्थापना भी की जा सकती है। पार्थिव गणेश प्रतिमा पर दुर्वांकुर और 21 शमीपत्र चढ़ाना चाहिए। आज के दिन वाली चतुर्थी (शिवा) को स्नान, दान, जप और उपवास करने से सौ गुना फल होता है। स्त्रियां यदि आज के दिन गुड़, घी, नमक आदि से बने व्यञ्जन और मालपूए आदि से अपने सास-ससुर, या मां आदि परिजनों को तृप्त करें तो उनके सौभाग्य की वृद्धि होती है।भगवान गणेश हर कल्प और हर युग में अवतार ग्रहण करते हैं। सतयुग में गणेश जी की 10 भुजाएं थी। उनका नाम विनायक था। त्रेतायुग में इनका वर्ण शुक्ल, छह भुजाएं थीं और मयूरेश नाम था। द्वापरयुग के प्रथम चरण में अरुण वर्ण तथा चार भुजाओं से सुशोभित हुए। गजानन नाम है। इनका वाहन मूषक है। कलियुग के अन्तिम चरण में चार भुजाओं से युक्त होकर अवतार लेंगे। उस समय धूम्रकेतु नाम होगा।
गजानन जी का अवतार पर्यली (महाराष्ट्र) नामक क्षेत्र में हुआ। गजानन जी महर्षि पराशर के आश्रम में पले, बढ़े। 4 वर्ष की उम्र में गजानन जी ने सिन्दूर असुर का वध किया था। इससे प्रसन्न होकर देवताओं ने महाराष्ट्र के जालना जिले में वरेण्य पुत्र गणपति का भव्य मन्दिर का निर्माण किया था। भगवान गजानन की यह पूर्ण पीठ मानी जाती है।
☸ शुभ अंक………………….1
? शुभ रंग……………आसमानी
⚜️ अभिजीत मुहूर्त :-
दोप 11.58 से 12.48 तक ।
?? राहुकाल (अशुभ) :-
प्रात: 10.51 से 12.23 तक ।
? दिशाशूल :-
पश्चिमदिशा – यदि आवश्यक हो तो जौ का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें।
? उदय लग्न मुहूर्त –
सिंह
04:18:52 06:36:35
कन्या
06:36:35 08:53:12
तुला
08:53:12 11:13:04
वृश्चिक
11:13:04 13:32:01
धनु
13:32:01 15:36:22
मकर
15:36:22 17:18:58
कुम्भ
17:18:58 18:46:40
मीन
18:46:40 20:11:51
मेष
20:11:51 21:47:19
वृषभ
21:47:19 23:43:10
मिथुन
23:43:10 25:58:09
कर्क
25:58:09 28:18:52
✡ चौघडिया :-
प्रात: 07.46 से 09.18 तक लाभ
प्रात: 09.18 से 10.50 तक अमृत
दोप. 12.22 से 01.54 तक शुभ
सायं 04.48 से 06.30 तक चंचल
रात्रि 09.26 से 10.54 तक लाभ ।
? आज का मंत्र :-
॥ ॐ सर्पाङ्गुळिकाय नमः ॥
? संस्कृत सुभाषितानि –
ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा करोति यः ।
लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा ॥
अर्थात :-
जो आसक्तिरहित और ब्रह्मार्पण वृत्ति से कर्म करते हैं, वे पानी से अलिप्त रहनेवाले कमल की तरह पाप से अलिप्त रहते हैं ।
? आरोग्यं सलाह :-
? केले के औषधीय गुण –
2. एंटीऑक्सीडेंट का स्रोत –
फल और सब्जियां एंटीऑक्सीडेंट के उत्कृष्ट स्रोत होते हैं, और केला कोई अपवाद नहीं है। इसमें डोपामाइन और केचिन सहित कई प्रकार के शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट होते हैं। ये एंटीऑक्सिडेंट कई स्वास्थ्य लाभों से जुड़ा हुआ है, जिसमें दिल की बीमारी को दूर करना आदि शामिल है।
⚜ आज का राशिफल :-
? राशि फलादेश मेष :-
(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)
दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। नए काम करने का मन बनेगा। फिजूलखर्ची ज्यादा होगी। शत्रु भय रहेगा। शारीरिक कष्ट से बाधा उत्पन्न होगी। दूर यात्रा की योजना बनेगी। व्यापार से लाभ होगा। नौकरी में चैन रहेगा। जोखिम न लें।
? राशि फलादेश वृष :-
(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
यात्रा मनोरंजक रहेगी। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा। किसी प्रबुद्ध व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। विवेक का प्रयोग करें। समस्याएं कम होंगी। शारीरिक कष्ट संभव है। अज्ञात भय रहेगा।
?? राशि फलादेश मिथुन :-
(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देगा। लाभ देगा। कोई बड़ा काम करने का मन बनेगा। प्रतिद्वंद्विता में वृद्धि होगी। प्रयास सफल रहेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। नौकरी में कार्य की प्रशंसा होगी। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड इत्यादि में जल्दबाजी न करें। लाभ होगा।
? राशि फलादेश कर्क :-
(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। स्वास्थ्य संबंधी चिंता बनी रहेगी। आशंका व कुशंका रहेगी। कार्य में बाधा संभव है। उत्साह बना रहेगा। नौकरी में अधिकार मिल सकते हैं। सुख के साधन जुटेंगे।
? राशि फलादेश सिंह :-
(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
नौकरी में कार्यभार रहेगा। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। आय में निश्चितता रहेगी। जोखिम न लें। एकाएक स्वास्थ्य खराब हो सकता है, लापरवाही न करें। दूर से दु:खद समाचार प्राप्त हो सकता है। व्यर्थ दौड़धूप होगी। विवाद से स्वाभिमान को चोट पहूंच सकती है। काम में मन नहीं लगेगा।
??♀️ राशि फलादेश कन्या :-
(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। कोई बड़ा काम करने का मन बनेगा। भाग्य का साथ मिलेगा। व्यापार मनोनुकूल रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। जल्दबाजी न करें। घर के छोटे सदस्यों संबंधी चिंता रहेगी।
⚖ राशि फलादेश तुला :-
(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
सुख के साधन जुटेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। व्यवसाय लाभदायक रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। धनहानि हो सकती है। सावधानी आवश्यक है। थकान महसूस होगी।
? राशि फलादेश वृश्चिक :-
(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
तंत्र-मंत्र में रुचि जागृत होगी। किसी जानकार व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त हो सकता है। कोर्ट व कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। शारीरिक कष्ट संभव है। अज्ञात भय सताएगा। चिंता तथा तनाव रहेंगे।
? राशि फलादेश धनु :-
(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)
भागदौड़ होगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय बनी रहेगी। लाभ के लिए प्रयास करें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। वाहन, मशीनरी व अग्नि आदि के प्रयोग में सावधानी रखें। विवाद से क्लेश हो सकता है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। पार्टनरों से कहासुनी हो सकती है।
? राशि फलादेश मकर :-
(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)
व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। कोई ऐसा कार्य न करें जिससे कि अपमान हो। व्यापार-व्यवसाय अनुकूल रहेगा। निवेश सोच-समझकर करें। नौकरी में चैन रहेगा। मित्रों का सहयोग मिलेगा। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति अनुकूल बनेगी।
? राशि फलादेश कुंभ :-
(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में अधिकार बढ़ने के योग हैं। कोई बड़ी समस्या का अंत हो सकता है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। लेन-देन में सावधानी रखें। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे।
? राशि फलादेश मीन :-
(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
स्वयं के काम पर ध्यान दें। बनते काम बिगड़ सकते हैं। विवाद को बढ़ावा न दें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। व्यापार ठीक चलेगा। कार्यकुशलता कम होगी। कोई बड़ा खर्च एकाएक सामने आएगा। कर्ज लेना पड़ सकता है। कुसंगति से बचें। किसी व्यक्ति के काम की जवाबदारी न लें।
☯ आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो |
।। ? शुभम भवतु ? ।।
???? भारत माता की जय ??