आज का राशिफल एवं पञ्चांग

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??जय श्री राम??
       ?? सुप्रभातम् ??
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कलियुगाब्द………………………5122
विक्रम संवत्……………………..2077
शक संवत्………………………..1942
मास…………………………….कार्तिक
पक्ष………………………………..कृष्ण
तिथी…………………………..चतुर्दशी
दोप 02.18 पर्यंत पश्चात अमावस्या
रवि…………………………दक्षिणायन
सूर्योदय…………प्रातः 06.39.19 पर
सूर्यास्त………..संध्या 05.43.16 पर
सूर्य राशि………………………….तुला
चन्द्र राशि…………………………तुला
गुरु राशी……………………………धनु
नक्षत्र…………………………….स्वाति
रात्रि 08.04 पर्यंत पश्चात विशाखा
योग………………………….आयुष्मान
प्रातः 07.29 पर्यंत पश्चात शोभन
करण……………………………शकुन
दोप 02.18 पर्यंत पश्चात चतुष्पद
ऋतु……………………………….शरद
दिन……………………………शनिवार
?? आंग्ल मतानुसार :-
14 नवम्बर सन 2020 ईस्वी ।
? तिथी/पर्व/व्रत विशेष :-
दीपावली या दीवाली अर्थात “रोशनी का त्योहार” शरद ऋतु में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन सनातनी हिंदू त्योहार है । यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है । ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’यह उपनिषदों की आज्ञा है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं तथा सिख समुदाय इसे बन्दी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है। माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे । अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से प्रफुल्लित हो उठा था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए । कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी । तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं ।
दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफ़ेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी साफ़ सुथरा कर सजाते हैं। बाज़ारों में गलियों को भी सुनहरी झंडियों से सजाया जाता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाज़ार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नज़र आते हैं। दीपावली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों ‘दीप’ अर्थात ‘दिया’ व ‘आवली’ अर्थात ‘लाइन’ या ‘श्रृंखला’ के मिश्रण से हुई है। इसके उत्सव में घरों के द्वारों, घरों व मंदिरों पर लाखों प्रकाशकों को प्रज्वलित किया जाता है । दीपावली जिसे दिवाली भी कहते हैं ।
? दीपावली से जुड़ी 10 प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं…
1. लक्ष्मी अवतरण – कार्तिक मास  की अमावस्या तिथि‍ को मां लक्ष्मी समुद्र मंथन द्वारा धरती पर प्रकट हुई थीं। दीपावली के त्योहार को मनाने का सबसे खास कारण यही है। इस पर्व को मां लक्ष्मी के स्वागत के रूप में मनाते हैं और हर घर को सजाया संवारा जाता है ताकि‍ मां का आगमन हो।
2. भगवान विष्णु द्वारा लक्ष्मी जी को बचाना – इस घटना का उल्लेख हमारे शास्त्रों में मिलता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से माता लक्ष्मी को मुक्त करवाया था।
3. भगवान राम की विजय – रामायण के अनुसार इस दिन जब भगवान राम, सीताजी और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या वापिस लौटे थे। उनके स्वागत में पूरी अयोध्या को दीप जलाकर रौशन किया गया था।
4 नरकासुर वध – भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर 16000 स्त्र‍ियों को इसी दिन मुक्त करवाया था। इसी खुशी में दीपावली का त्यौहार दो दिन तक मनाया गया और इसे विजय पर्व के नाम से जाना गया।
5  पांडवों की वापसी – महाभारत के अनुसार जब कौरव और पांडव के बीच होने वाले चौसर के खेल में पांडव हार गए, तो उन्हें 12 वर्ष का अज्ञात वास दिया गया था। पांचों पांडव अपना 12 साल का वनवास समाप्त कर इसी दिन वापस लौटे थे। उनके लौटने की खुशी में दीप जलाकर खुशी के साथ दीपावली मनाई गई थी।
6. विक्रमादित्य का राजतिलक – राजा विक्रमादित्य के राजतिलक का प्रसंग भी इसी दिन से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि राजा विक्रमादित्य का राजतिलक इस दिन किया गया था, जिससे दि‍वाली का महत्व और खुशियों दुगुनी हो गईं।
7. आर्य समाज – स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना भी इसी दिन की गई थी। इस कारण भी दीपावली का त्योहार विशेष महत्व रखता है।
8. जैन धर्म – दीपावली का दिन जैन संप्रदाय के लोगों के लिए भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जैन धर्म इस पर्व को भगवान महावीर जी के मोक्षदिवस के रूप में मनाता है। ऐसा माना जाता है कि‍ कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही भगवान महावीर को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
9. सिक्खों धर्म – सिख धर्म के लिए भी दीपावली बहुत महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन को सिख धर्म के तीसरे गुरु अमरदास जी ने लाल पत्र दिवस के रूप में मनाया था जिसमें सभी श्रद्धालु गुरु से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। इसके अलावा सन् 1577 में अमृतसर के हरिमंदिर साहिब का शिलान्यास भी दीपावली के दिन ही किया गया था।
10  सन् 1619 में सिक्ख गुरु हरगोबिन्द जी को ग्वालियर के किले में 52 राजाओं के साथ मुक्त किया जाना भी इस दिन की प्रमुख ऐतिहासिक घटना रही है। इसलिए इस पर्व को सिक्ख समाज बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी मनाता हैं। इन राजाओं व हरगोबिंद सिंह जी को मुगल बादशाह जहांगीर ने नजरबंद किया हुआ था।
☸ शुभ अंक………………………5
? शुभ रंग………………………हरा
? अभिजीत मुहूर्त :-
दोप 11.49 से 12.32 तक ।
? राहुकाल :-
प्रात: 09.26 से 10.48  तक ।
? महालक्ष्मी पुजन मुहूर्त विचार :-
चौघड़िया अनुसार सम्पूर्ण दिवस |
अमावस्या तिथि दोप. 02.18 के पश्चात लगेगी अतः व्यापारी वर्ग के लिए सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त :
दोप. 02.54 से 04.16 तक अमृत
संध्या 05.38 से 07.16 तक लाभ
? स्थिर लग्न :
दीपावली पूजा वृष लग्न में ही करना चाहिए। इससे आर्थिक समृद्धि के साथ शांति और आनंद की प्राप्ति होती है :
वृष     – संध्या 05:30 से 07:25 तक
सिंह    – रात्रि 12:01 से 02:19 तक (महानिशा)
? उदय लग्न मुहूर्त –
तुला
04:35:55 06:52:14
वृश्चिक
06:52:14 09:14:42
धनु
09:14:42 11:19:06
मकर
11:19:06 13:01:42
कुम्भ
13:01:42 14:29:25
मीन
14:29:25 15:54:36
मेष
15:54:36 17:30:04
वृषभ
17:30:04 19:25:54
मिथुन
19:25:54 21:40:52
कर्क
21:40:52 24:01:35
सिंह
24:01:35 26:19:15
कन्या
26:19:15 28:35:55
? दिशाशूल :-
पूर्वदिशा – यदि आवश्यक हो तो अदरक या उड़द का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें ।
? चौघडिया :-
प्रात: 08.04 से 09.26 तक शुभ
दोप. 12.10 से 01.32 तक चर
दोप. 01.32 से 02.54 तक लाभ
दोप. 02.54 से 04.16 तक अमृत
संध्या 05.38 से 07.16 तक लाभ
रात्रि 08.54 से 10.32 तक शुभ ।
? आज का मंत्र :-
॥ ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः ॥
॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम: ॥
महालक्ष्मी गायत्री मंत्र :-
॥ ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ॥
? संस्कृत सुभाषितानि –
वह्नि र्वेधाः शशाङ्कश्च लक्ष्मीनाथस्तथैव च ।
नारदस्तुम्बरु श्चैव षड्जादीनां ऋषीश्वराः ॥
अर्थात :-
अग्नि, ब्रह्मा, चंद्र, विष्णु, नारद, तुंबरु – ये छे संगीत के महर्षि हैं ।
? आरोग्यं सलाह :-
कपूर के फायदे :-
3. पेट दर्द से राहत –
पेट दर्द होने पर एक गिलास पानी में एक चम्मच आजवाइन डाल के उबालें और जब वो पानी आधा रह जाता है, तो उसमें थोडा सा कपूर डाल लें फिर इस पानी का सेवन करें। इससे आप को पेट दर्द से राहत मिलती है।
? आज का राशिफल :-
? राशि फलादेश मेष :-
(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)
किसी मांगलिक कार्य में शामिल होने का अवसर प्राप्त हो सकता है। सुख के साधन जुटेंगे। प्रसन्नता रहेगी। आत्मसम्मान बना रहेगा। कोई बड़ा काम करने का मन बनेगा। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। व्यय होगा। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। लाभार्जन होगा।
? राशि फलादेश वृष :-
(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
यात्रा लाभदायक रहेगी। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यस्तता के चलते स्वास्थ्य के नजरअंदाज न करें। समय अनुकूल है। आय में वृद्धि होगी। उत्साह व प्रसन्नता से काम कर पाएंगे। रुके कार्य बनेंगे।
??‍♀️ राशि फलादेश मिथुन :-
(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। चोट व दुर्घटना आदि से हानि के योग हैं। अत: किसी भी काम को करते समय लापरवाही न करें। आय में निश्चितता रहेगी। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें।
? राशि फलादेश कर्क :-
(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
कारोबार में वृद्धि के योग हैं। शेयर मार्केट तथा म्युचुअल फंड लाभदायक रहेंगे। दुष्टजन तथा ईष्यालु व्यक्तियों से सावधान रहें। डूबा हुआ धन प्राप्त हो सकता है। व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। बेरोजगारी दूर होगी। दुष्टजन तथा ईष्यालु व्यक्तियों से सावधान रहें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। समय अनुकूल है।
? राशि फलादेश सिंह :-
(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
योजना फलीभूत होगी। मित्रों का सहयोग करने का अवसर प्राप्त होगा। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। नए कारोबारी अनुबंध हो सकते हैं। दूर से काम मिल सकता है। आर्थिक नीति में सुधार होगा। समय की अनुकूलता का लाभ लें। प्रमाद न करें। प्रसन्नता रहेगी।
??‍♀️ राशि फलादेश कन्या :-
(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
राजकीय सहयोग प्राप्त होगा। रुके कामों में गति आएगी। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल रहेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। तंत्र-मंत्र में रुचि जागृत होगी। सत्संग का लाभ प्राप्त होगा। आय में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कुसंगति से हानि होगी। किसी तीर्थयात्रा की योजना बनेगी।
⚖ राशि फलादेश तुला :-
(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
किसी भी तरह के विवाद में न पड़ें। बोलचाल में हल्केपन को न वापरें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। परिवार में तनाव रह सकता है। यथासंभव यात्रा टालें। चोट व दुर्घटना से हानि संभव है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। जल्दबाजी न करें। व्यापार ठीक चलेगा। आय बनी रहेगी।
? राशि फलादेश वृश्चिक :-
(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड लाभ देंगे। जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा। जल्दबाजी न करें। उत्साह रहेगा। भाग्य का साथ मिलेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। व्यस्तता रहेगी। शत्रु पस्त होंगे। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे।
? राशि फलादेश धनु :-
(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)
बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। कोई आवश्यक वस्तु गुम हो सकती है। संपत्ति के बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। कारोबार में वृद्धि होगी। बेकार बातों पर ध्यान न दें। उत्साह में वृद्धि होगी।
? राशि फलादेश मकर :-
(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)
व्यापार ठीक चलेगा। लाभार्जन होगा। परिवार के सदस्यों के साथ समय सुखमय व्यतीत होगा। प्रमाद न करें। पठन-पाठन व लेखन इत्यादि काम सफल रहेंगे। पार्टी व पिकनिक का आनंद प्राप्त होगा। स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद मिलेगा। निवेश शुभ रहेगा।
? राशि फलादेश कुंभ :-
(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
जोखिम व जमानत के कार्य टालें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। असमंजस की स्थिति बन सकती है। चिंता तथा तनाव रहेंगे। दूर से कोई बुरी खबर मिल सकती है, धैर्य रखें। किसी अपने ही व्यक्ति से बिना कारण विवाद को हो सकता है। दौड़धूप अधिक रहेगी।
? राशि फलादेश मीन :-
(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
निवेश शुभ रहेगा। काफी समय से लंबित कार्य पूर्ण होंगे। उत्साह व प्रसन्नता से कार्य कर पाएंगे। प्रमाद न करें। नौकरी में कोई नया काम कर पाएंगे। उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। मान-सम्मान मिलेगा। कारोबार में वृद्धि के योग हैं। भाग्य का साथ मिलेगा।
☯ आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो |
? आप सभी को दीपावली पर्व के शुभावसर पर अनंत मंगलकामनाएं ।
-प -विजयेंद्र त्रिवेदी, इंदौर
– पं. गौरव तिवारी, राऊ
।। शुभम भवतु ।।
???? भारत माता की जय ??
।। शुभ दिपावली ।।

।। संस्था जय हो ।।
।। दैनिक राशि – फल ।।
आज दिनांक 14 नवंबर 2020 शनिवार संवत् 2077 मास कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि दोपहर 02:14 बजे तक रहेगी पश्चात् अमावस्या तिथि आरंभ होगी । आज सूर्योदय प्रातःकाल 06:47 बजे एवं सूर्यास्त सायं 05:38 बजे होगा । स्वाति नक्षत्र रात्रि 08:01 बजे तक रहेगा पश्चात् विशाखा नक्षत्र आरंभ होगा । आज का चंद्रमा तुला राशि मे दिन रात भ्रमण करते रहेंगे ।आज का राहुकाल प्रातः 09:23 से 10:45 बजे तक रहेगा । अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:46 से 12:29 बजे तक रहेगा ।। जय हो ।।

–: विशेष :–
दीपावली अर्थात “रोशनी का त्योहार” शरद ऋतु में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन सनातनी हिंदू त्योहार है । यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है । ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’ यह उपनिषदों की आज्ञा है। इसे सिख , बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं तथा सिख समुदाय इसे बन्दी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है। माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे । अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से प्रफुल्लित हो उठा था । श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए । कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी । तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं ।
दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है । कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं । लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं । घरों में मरम्मत , रंग – रोगन, सफ़ेदी आदि का कार्य होने लगता है । लोग दुकानों को भी साफ़ सुथरा कर सजाते हैं । बाज़ारों में गलियों को भी सुनहरी झंडियों से सजाया जाता है । दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाज़ार सब साफ-सुथरे व सजे – धजे नज़र आते हैं। दीपावली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों ‘दीप’ अर्थात ‘दिया’ व ‘आवली’ अर्थात ‘लाइन’ या ‘श्रृंखला’ के मिश्रण से हुई है । इसके उत्सव में घरों के द्वारों , घरों व मंदिरों पर लाखों प्रकाशकों को प्रज्वलित किया जाता है । दीपावली जिसे दिवाली भी कहते हैं ।

दीपावली से जुड़ी 10 प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं…
1. लक्ष्मी अवतरण – कार्तिक मास की अमावस्या तिथि‍ को मां लक्ष्मी समुद्र मंथन द्वारा धरती पर प्रकट हुई थीं । दीपावली के त्योहार को मनाने का सबसे खास कारण यही है । इस पर्व को मां लक्ष्मी के स्वागत के रूप में मनाते हैं और हर घर को सजाया संवारा जाता है ताकि‍ मां का आगमन हो ।
2. भगवान विष्णु द्वारा लक्ष्मी जी को बचाना – इस घटना का उल्लेख हमारे शास्त्रों में मिलता है । कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से माता लक्ष्मी को मुक्त करवाया था ।
3. भगवान राम की विजय – रामायण के अनुसार इस दिन जब भगवान राम, सीताजी और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या वापिस लौटे थे। उनके स्वागत में पूरी अयोध्या को दीप जलाकर रौशन किया गया था ।
4 नरकासुर वध – भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर 16000 स्त्र‍ियों को इसी दिन मुक्त करवाया था । इसी खुशी में दीपावली का त्यौहार दो दिन तक मनाया गया और इसे विजय पर्व के नाम से जाना गया ।
5 पांडवों की वापसी – महाभारत के अनुसार जब कौरव और पांडव के बीच होने वाले चौसर के खेल में पांडव हार गए, तो उन्हें 12 वर्ष का अज्ञात वास दिया गया था । पांचों पांडव अपना 12 साल का वनवास समाप्त कर इसी दिन वापस लौटे थे । उनके लौटने की खुशी में दीप जलाकर खुशी के साथ दीपावली मनाई गई थी ।
6. विक्रमादित्य का राजतिलक – राजा विक्रमादित्य के राजतिलक का प्रसंग भी इसी दिन से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि राजा विक्रमादित्य का राजतिलक इस दिन किया गया था, जिससे दि‍वाली का महत्व और खुशियों दुगुनी हो गईं ।
7. आर्य समाज – स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना भी इसी दिन की गई थी। इस कारण भी दीपावली का त्योहार विशेष महत्व रखता है।
8. जैन धर्म – दीपावली का दिन जैन संप्रदाय के लोगों के लिए भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है । जैन धर्म इस पर्व को भगवान महावीर जी के मोक्षदिवस के रूप में मनाता है। ऐसा माना जाता है कि‍ कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही भगवान महावीर को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी ।
9. सिक्खों धर्म – सिख धर्म के लिए भी दीपावली बहुत महत्वपूर्ण पर्व है । इस दिन को सिख धर्म के तीसरे गुरु अमरदास जी ने लाल पत्र दिवस के रूप में मनाया था जिसमें सभी श्रद्धालु गुरु से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। इसके अलावा सन् 1577 में अमृतसर के हरिमंदिर साहिब का शिलान्यास भी दीपावली के दिन ही किया गया था ।
10 सन् 1619 में सिक्ख गुरु हरगोबिन्द जी को ग्वालियर के किले में 52 राजाओं के साथ मुक्त किया जाना भी इस दिन की प्रमुख ऐतिहासिक घटना रही है । इसलिए इस पर्व को सिक्ख समाज बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी मनाता हैं । इन राजाओं व हरगोबिंद सिंह जी को मुगल बादशाह जहांगीर ने नजरबंद किया हुआ था ।। जय हो ।।

महालक्ष्मी पुजन मुहूर्त
चौघड़िया अनुसार सम्पूर्ण दिवस |

अमावस्या तिथि दोप. 02.14 के पश्चात लगेगी अतः व्यापारी वर्ग के लिए सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त :
दोप. 02.54 से 04.16 तक अमृत
संध्या 05.38 से 07.16 तक लाभ

स्थिर लग्न :
दीपावली पूजा वृष लग्न में ही करना चाहिए। इससे आर्थिक समृद्धि के साथ शांति और आनंद की प्राप्ति होती है :
वृष लग्न – संध्या 05: 27 से 07:22 तक
सिंह – रात्रि 11:57 से 02:16 तक (महानिशा)

चौघडिया :-
प्रात: 08.04 से 09.26 तक शुभ
दोप. 12.10 से 01.32 तक चर
दोप. 01.32 से 02.54 तक लाभ
दोप. 02.54 से 04.16 तक अमृत
संध्या 05.38 से 07.16 तक लाभ
रात्रि 08.54 से 10.32 तक शुभ ।

आज का मंत्र
॥ ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः ॥

॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम: ॥
महालक्ष्मी गायत्री मंत्र
॥ ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ॥ जय हो ।।

ज्योतिषाचार्य
डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
श्रीमंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
मो. नं. 9425491351

आज का राशिफल

मेष :~ जीवनसाथी के साथ समय बितेगा और प्रेम का सुखद अनुभव होगा । आर्थिक लाभ तथा प्रवास होगा । विचारों में उग्रता तथा अधिकार की भावना बढेगी । आप के कार्य की प्रशंसा होगी । वाद – विवाद टाले । वाहन सुख मिलेगा ।

वृषभ :~ आज का दिन शुभफलदायी है । आपका शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा । पुरा दिन आनंद और उल्लास में बितेगा । सभी कार्य योजनानुसार होंगे । धन से सम्बंधित लाभ की संभावना है । व्याधिग्रस्त व्यक्तियों का स्वास्थ्य सुधरेगा । ऑफिस के उलझे हुए कार्य संपन्न होंगे ।

मिथुन :~ आप तन एवं मन की अस्वस्थता रहेगी । नया काम करने की योजना बनेगी , परंतु काम प्रारंभ न करे । मानहानि हो सकती है । संतान के पीछे व्यय होगा । पाचनक्रिया गडबड रहेगी । यात्रा – प्रवास टाले ।

कर्क :~ आपके लिए आज का दिन अशुभ है । आज आनंद एवं स्फूर्ति नही रहेगी । मन चिंतातुर और अशांत रहेगा । घर में झगडे का वातावरण रहेगा । स्वजनों के साथ मनमुटाव हो सकता है । धन व्यय होगा । अपयश मिलेगा । समयानुसार भोजन नहीं मिलेगा । शांतिपूर्वक निद्रा नही आयेगी । समाज में अपमानित न हों ध्यान रखे ।

सिंह :~ आप का आज का दिन शुभफलदायी है । आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा । भाई – बंधुओं के साथ समय आनंदपूर्वक बितेगा । उनसे लाभ भी होगा । मित्रों और स्वजनों के साथ भेंट होगी । कार्य सफलता से मित्र प्रसन्न होंगे । भावुक संबंधों के बंधन में बंध सकते हैं । कला में आपकी विशेष रुचि रहेगी । मानसिक रुप से स्वस्थ दिन बीतेगा ।

कन्या :~ आज आपको शुभ फल मिलेगा । अपनी मीठी वाणी से किसी का भी दिल आप जीत सकते हैं । कार्य सिद्ध होगा । आर्थिक लाभ होगा । आरोग्य अच्छा रहेगा । प्रवास की योजना बनेगी । बौद्घिक चर्चा में वाद – विवाद से बचें । भोजन के साथ कुछ मीठा भी खाएँगे । आयात – निर्यात में सफलता मिलेगी ।

तुला :~ आप का दिन शुभफलदायक है । आज आपकी रचनात्मक और कलात्मक शक्ति निखरेगी । शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखे । सृजनात्मक कार्य करेंगे । विचार की दृढता से काम को अच्छी तरह से करेंगे । आर्थिक योजना बनेगी । आत्मविश्वास में वृद्धि होगी ।

वृश्चिक :~ आज आप दुर्घटना से बचे , शल्यचिकित्सा न करवाए एवं तकरार न करे । बातचीत में भ्रांति न हो ध्यान रखे । शारीरिक कष्ट और मानसिक चिंताओं से परेशान रहेंगे । स्वजनों से कलह से बचे ।

धनु :~ आज का दिन आप के लिए लाभकारी है । गृहस्थ जीवन का आनंद आप लेंगे । मित्रों के साथ प्रवास होगा । आय में वृद्धि है । भोजन अच्छा मिल सकता है ।

मकर :~ आज आप को व्यापार में लाभ होगा । उगाही , प्रवास , आय आदि के लिए अच्छा दिन है । सरकार तथा मित्रों , सम्बंधियो से लाभ होगा । उनसे भेंट – उपहार से आनंद होगा । परंतु अग्नि , जल और अकस्मात से बचे । व्यावसाय मे भागदौड़ रहेगी ।

कुंभ :~ आज का दिन मिश्र फलदायी है । शारीरिक अस्वस्थता रहेगी । फिर भी आप मानसिकरुप से स्वस्थ रहेंगे । शरीर में स्फूर्ति कम रहने से कार्य मे उत्साह कम रहेगा । ऊपरी अधिकारियो की अप्रसन्नता भी आपको अखरेगी । संतान की चिंता रहेगी ।

मीन :~ आज आपको थोडी़ बहुत प्रतिकूलताएं रहेगी । स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे । व्याधि के कारण अधिक खर्च हो सकता है । परिवार मे संयम बरतें । आकस्मिक धनलाभ मन हल्का होगा । उगाही का धन मिल सकता है । ( डाँ. अशोक शास्त्री )

।। शुभम् भवतु ।। जय सियाराम ।।
।। जय श्री कृष्ण ।। जय गुरुदेव ।।

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