दिल्ली-एनसीआर में स्ट्रीट डॉग्स पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर उज्जैन में भी दिखने लगा है। आदेश की जानकारी मिलने के बाद शहरवासी नगर निगम को लगातार फोन कर हिंसक हो चुके कुत्तों को शहर से बाहर भेजने की मांग कर रहे हैं।
मंगलवार को महापौर मुकेश टटवाल ने इस मुद्दे पर अधिकारियों के साथ बैठक कर समाधान पर चर्चा की। पिछले डेढ़ साल में उज्जैन में करीब 30 हजार लोग कुत्तों के हमले का शिकार हुए हैं, जबकि दो लोगों की मौत भी हो चुकी है।
आवारा कुत्तों पर नियंत्रण को लेकर बुलाई बैठक
मंगलवार को महापौर मुकेश टटवाल ने स्वास्थ्य विभाग प्रभारी सत्यनारायण चौहान, उपायुक्त योगेंद्र सिंह पटेल और संजेश गुप्ता की मौजूदगी में बैठक की। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में नगर निगम ने 30,696 स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी कराई है। बैठक में महापौर ने सदावल स्थित श्वान घर की कार्यप्रणाली की जानकारी ली और शहर में रोजाना बढ़ रही कुत्तों के हमले व काटने की शिकायतों पर व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने हिंसक व आवारा कुत्तों की नसबंदी के साथ रेबीज टीकाकरण अभियान तेज करने पर भी जोर दिया।
16 माह में 30 हजार लोगों को कुत्तों ने काटा
उज्जैन शहर की 7 लाख आबादी में 2024 में 19949 कुत्ते के काटने के केस दर्ज किये गए ,जनवरी से जून (2025) तक 10296 कुत्ते की काटने घटनाएं सामने आई। जिसमें कुत्ते के लपकने के कारण दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। उज्जैन में इसी साल मई में 1417,जून में 1552 और जुलाई में 1512 डॉग बाइट की घटना हुई है।
महापौर मुकेश टटवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कुत्तों को पकड़ने की कार्यवाही कर रहे। लोगो को नुकसान पहुंचाने वाले कुत्तों को कुत्ता घर पहुंचाने की व्यवस्था की जायेगी। कोर्ट के निर्णय के बाद कई लोगो के काल आ रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों से राय लेकर कार्यवाही करेंगे।