“अजाक्स प्रांताध्यक्ष बने IAS संतोष वर्मा के ‘ब्राह्मण बहू दान’ बयान पर बवाल; ब्राह्मण समाज ने अपमान बताया, विरोध व आचरण नियम उल्लंघन की शिकायत से विवाद और भड़का”

अजाक्स के प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा का विवादित बयान सामने आने के बाद बवाल शुरू हो गया है। रविवार को आयोजित प्रांतीय अधिवेशन में वरिष्ठ IAS अधिकारी और नवनिर्वाचित प्रांताध्यक्ष वर्मा ने कहा कि “जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।” इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद विरोध तेज हो गया है।

सीनियर आईएएस संतोष वर्मा को अजाक्स का प्रांताध्यक्ष चुना गया

मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक ने इसे “घोर आपत्तिजनक और सवर्ण समुदाय का अपमान” बताते हुए IAS आचरण नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की है।

एक दिन पहले अधिवेशन में दिया था बयान 23 नवंबर को सेकेंड स्टॉप, तुलसीनगर स्थित अंबेडकर मैदान में अजाक्स का प्रांतीय अधिवेशन हुआ था। इसी कार्यक्रम में संतोष वर्मा ने यह टिप्पणी की थी, जिसका वीडियो अब सामने आया है। नायक ने कहा कि बेटी कोई वस्तु नहीं है जिसे दान दिया जाए। शादी निजी निर्णय है, और इसे आरक्षण से जोड़ना अनुचित है।

IAS अफसर को अजाक्स का प्रांताध्यक्ष चुना गया। इस मौके पर उन्होंने ये बयान दिया था।

शादी का आरक्षण से कोई संबंध नहीं नायक ने कहा कि समाज में बड़ी संख्या में अंतर्जातीय और आरक्षित-अनारक्षित वर्गों के बीच विवाह हो रहे हैं।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने सविता अंबेडकर से, और रामविलास पासवान ने रीना शर्मा से विवाह किया था।नायक का कहना है कि “ऐसे बयान तब दिए जा रहे हैं जब आरक्षण के पक्ष में ठोस तर्क कम पड़ रहे हैं।

ऐसा अध्यक्ष संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता नायक ने कहा कि अजाक्स एक कर्मचारी संगठन है, जहां सर्विस मैटर्स पर चर्चा होनी चाहिए।“वरिष्ठ पद पर बैठे अधिकारी द्वारा इस तरह के बयान से दोनों वर्गों के बीच खाई गहरी होती है। ऐसे व्यक्ति को प्रांताध्यक्ष नहीं होना चाहिए।”उन्होंने कहा कि संगठन के सदस्यों को भी इस पर विचार करना चाहिए।

अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज करेगा आंदोलन अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्र ने कहा है कि IAS अफसर का बयान अखिल भारतीय सेवा आचरण के विरुद्ध तथा ब्राह्मण सम्मान के साथ खिलवाड़, अमर्यादित व आपत्तिजनक है। बीजेपी की सरकार में जहां लाड़ली लक्ष्मी, लाड़ली बहना योजना चलाई जाती हो, प्रधानमंत्री ‘बेटी–बचाओ, बेटी–बढ़ाओ’ अभियान चलाते हों, उस सरकार में एक अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी द्वारा बेटियों के संबंध में अनर्गल टिप्पणी असंसदीय वक्तव्य देना ठीक नहीं है।

कोर्ट के फर्जी आदेश केस में हुई थी गिरफ्तारी आईएएस संतोष कुमार वर्मा विशेष न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत के फर्जी हस्ताक्षर कर कोर्ट का आदेश बनाकर प्रस्तुत करने के बाद राज्य प्रशासनिक सेवा से भारतीय प्रशासनिक सेवा के कैडर में प्रमोट हुए थे, जिसके आधार पर उन्हें प्रमोशन मिला है। आईएएस संतोष वर्मा पर एक युवती ने शादी का झांसा देने और मारपीट करने का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी मामले में वर्मा ने कोर्ट का फर्जी आदेश बनाकर केस खत्म होने का दावा किया था।

इसके बाद राज्य सरकार ने वर्मा को निलंबित कर दिया था। फर्जी आदेश का यह मामला गिरफ्तारी से पहले 4 साल पुराना है। वर्मा का नाम आईएएस अवार्ड के लिए प्रस्तावित होने के बाद उनकी महिला मित्र की शिकायत परेशानी न बन जाए, इसलिए फर्जी आदेश बनाकर सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपा गया था। जज के फर्जी हस्ताक्षर करने के मामले में संतोष वर्मा की गिरफ्तारी 11 जुलाई 2021 को हुई थी।

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