
फिल्म निर्माता मीरा नायर के बेटे जोहरन ममदानी ने बुधवार को इतिहास रच दिया, जब वह न्यूयॉर्क राज्य विधानसभा में सीट जीतने के लिए पहले दक्षिण एशियाई बने, 29 वर्षीय ममदानी, एक डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट और एक रैपर हैं जोहरान को न्यूयॉर्क के 36वें असेम्बली जिले एस्टोरिया का प्रतिनिधित्व करने के लिए निर्विरोध चुना गया।
बेटे की जीत पर मीरा नायर को सोशल मीडिया में बधाइयां मिल रही हैं। ऐसे ही एक ट्वीट को रीट्वीट करके मीरा नायर ने लिखा- और ज़ोहरान की एंट्री हो गयी। बदलाव आने वाला है। ज़ोहरान ने इससे पहले ट्वीट करके लिखा था- यह ऑफ़िशियल हो गया है। हम जीत गये हैं। मैं अमीरों के लिए टैक्स, बीमारों के इलाज, ग़रीबों के लिए घर और सोशलिस्ट न्यूयॉर्क बनाने के लिए जा रहा हूं। लेकिन, यह सब मैं अकेला नहीं कर सकता। समाजवाद जीतने के लिए, हमें एक जन आंदोलन की ज़रूरत होगी। इसलिए, आइए करते हैं।
ज़ोहरान का जन्म कमपाला (यूगांडा) में हुआ था, लेकिन जब वो सात साल के थे तो अपने परिवार के साथ न्यूयॉर्क आ गये थे। उन्होंने बोडोइन कॉलेज से पढ़ाई की और फ़िलहाल एक हाउसिंग काउंसलर के तौर पर काम कर रहे हैं, जो ऐसे प्रवासी परिवारों की मदद करते हैं, जिन्हें घरों से बेदखल किया गया हो।
मीरा नायर की महमूद ममदानी से तब मुलाक़ात हुई थी, जब वो मिसीसिपी मसाला के लिए यूगांडा में रिसर्च कर रही थीं। मीरा नायर ने बतौर फ़िल्ममेकर अपना करियर डॉक्यूमेंट्री फ़िल्मों से शुरू किया था। उनकी पहली फुल लेंग्थ फीचर फ़िल्म सलाम बॉम्बे है, जो 1988 में रिलीज़ हुई थी।
यह फ़िल्म ऑस्कर अवॉर्ड्स में बेस्ट फॉरेन फ़िलम केटेगरी में नामित हुई थी। 1991 में मिसीसिपी मसाला आयी। 1996 में रिलीज़ हुई कामसूत्र- टेल ऑफ़ लव ने मीरा नायर को दुनियाभर में ख़ूब चर्चा दिलायी। इस फ़िल्म में रेखा भी एक अहम किरदार में थीं। मीरा की अन्य चर्चित फ़िल्मों में मानसून वेडिंग और द नेमसेक हैं।