खतरनाक सेक्सटॉर्शन गैंग का कहर: संसदीय व्यक्तियों से लेकर अमीर घर के लड़कों तक, देशभर के प्रमुख नागरिकों की आपबीती

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल को वीडियो कॉल करके अश्लील हरकत करने वाले गिरोह के दो आरोपियों को पुलिस ने राजस्थान के मेवात से गिरफ्तार किया है। एक साल पहले भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भी ऐसा ही वीडियो कॉल आया था। इन दोनों मामलों में तो आरोपी पकड़े गए, लेकिन आम आदमी रोजाना इनका शिकार बन रहा है।

पड़ताल की तो पता चला कि सेक्सटॉर्शन के ऐसे गिरोह पूरे देश में सक्रिय हैं। इनके निशाने पर नेता, रईस घरों के लड़के और बिजनेसमैन ही होते हैं। गिरोह अपना शिकार चुनने से पहले प्रॉपर रिसर्च और प्लानिंग करते हैं।

ये गिरोह कैसे काम करता है ? इसका शिकार बनने वाले आखिर पुलिस के पास शिकायत क्यों नहीं करते? इससे बचने का तरीका क्या है? पढ़ें सेक्सटॉर्शन गैंग से जुड़ी A टू Z जानकारी…

पहले चार केस से जानते हैं कि सेक्सटॉर्शन गैंग कैसे बनाते हैं शिकार

केस-1: वीडियो कॉल उठाते ही चलने लगा गंदा वीडियो

भतीजे मोनू सिंह पटेल के निधन के चलते पिछले मई महीने में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल अपने गृह नगर गोटेगांव (नरसिंहपुर) में थे। इसी दौरान उनके मोबाइल के वॉट्सऐप नंबर पर वीडियो कॉल आया। कॉल रिसीव करते ही उस पर पोर्न वीडियो चलने लगा।

केंद्रीय मंत्री ने कॉल कट करने के बाद अपने पीए के माध्यम से दिल्ली पुलिस कमिश्नर को शिकायत की। दिल्ली की क्राइम ब्रांच टीम ने ढाई महीने बाद इस मामले में राजस्थान के मेवात से दो आरोपियों मोहम्मद वकील और मोहम्मद साहिब निवासी जुरहेरा को गिरफ्तार किया है। मास्टरमाइंड साबिर फरार है।

राजस्थान के भरतपुर और मेवात में इस तरह के संगठित गिरोह सक्रिय हैं। 6 फरवरी 2022 को ऐसा ही भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ भी हो चुका है। एक्सटॉर्शन कॉल करने वाले सगे भाई राजस्थान के भरतपुर निवासी रवीन खान (23) और वारिस खान (21) थे। दोनों को भोपाल पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।

केस-2: अमीर लड़कों को फंसाती थी शादीशुदा महिला

मैं नालायक हो सकता हूं… लेकिन रेपिस्ट नहीं हो सकता। मैंने कभी उसे फोर्स नहीं किया, न ही जबरदस्ती की, न ही मैंने कभी उसे उकसाया। मुझे फंसाया जा रहा है। मानता हूं कि मेरी भी गलती थी कि मैंने उसे मना नहीं किया। मना करता भी था, तो भाभी सुसाइड करने का बोलती थी …तो मैं मना भी कैसे करता।’

ये मैसेज 22 वर्षीय ग्रेजुएट संगम प्रजापति निवासी अशोका गार्डन, भोपाल के थे, जो किराएदार दंपती के ट्रैप में इस कदर फंसा कि उसने खुदकुशी कर ली। अशोका गार्डन पुलिस ने इस मामले में संगम के यहां किराए पर रहने वाले दंपती के खिलाफ सुसाइड के लिए उकसाने का केस दर्ज किया था। पुलिस की जांच में सामने आया था कि ये दंपती इसी तरह अमीर घरों के लड़कों को शिकार बनाता है। महिला अपने रूप जाल में फंसाती है। फिर एकांत पलों के वीडियो तैयार कर ब्लैकमेलिंग का सिलसिला शुरू होता है। कुछ ऐसा ही संगम के साथ भी हुआ था।

केस-3: पहले वीडियो बनाया फिर ब्लैकमेल करने लगे

इसी साल जुलाई के पहले सप्ताह में सतना जिले की युवती ने मंडला निवासी दानिश अहमद के खिलाफ रेप, धमकी और लव जिहाद का केस दर्ज कराया था। इसके बाद मंडला पुलिस ने दानिश के व्यापारी पिता की शिकायत पर गोंगपा से जुड़े दो पदाधिकारी अशफाक खान और सज्जाद अली (दोनों को गोंगपा निष्कासित कर चुकी है) सहित गोंगपा से जिला पंचायत का चुनाव लड़ चुकी दीप्ति कौर, रोहित उर्फ जैकी चंद्रौल और सतना निवासी साजरुन उर्फ रौनक खान के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का प्रकरण दर्ज किया। असगर कुरैशी को छोड़कर सभी गिरफ्तार हो चुके हैं।

मामला सेक्सटॉर्शन से जुड़ा है। आरोपियों ने साजिश के तहत पहले सतना की युवती को दानिश से मिलवाया था। फिर उनके अंतरंग पलों के वीडियो बनाकर दानिश को ब्लैकमेल करने लगे। जब तक छोटी रकम मांगी गई, दानिश मांग पूरी करता रहा। अचानक 20 लाख मांगे जाने पर दानिश ने मना कर दिया। इसके बाद सतना की युवती ने दानिश के खिलाफ रेप सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज करा दी।

केस-4: ट्रांसजेंडर ने फंसाया और वीडियो बनाकर रुपए मांगने लगे

ग्वालियर के कंपू थाने में 6 जुलाई को घनश्याम मिश्रा ने शिकायत दर्ज कराई कि उसे हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल किया जा रहा है। आरोपियों में एक पुरुष ट्रांसजेंडर सहित तीन लोग हैं। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार किया तो पूरे मामले से पर्दा खुला।

डीडी नगर निवासी घनश्याम मिश्रा को ब्लैकमेल कर एक लाख रुपए ऐंठ लिए थे। सोशल मीडिया पर घनश्याम मिश्रा की एक युवती से दोस्ती हुई। कुछ दिनों के बाद युवती उन्हें अपने कमरे पर ले गई। कमरे में पहल से एक और युवती मौजूद थी। दोनों युवतियों ने उनके साथ कमरे में अश्लील हरकतें करनी शुरू कर दीं। इस दौरान वहां पहुंचे दो युवकों ने इसका वीडियो बना लिया। इसके बाद वे घनश्याम मिश्रा को वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल कर रहे थे।

सेक्सटॉर्शन के 4 तरीके

डायरेक्ट ट्रैप: सोशल प्लेटफॉर्म पर वीडियो कॉल करके पोर्न वीडियो चलाते हैं। इसके बाद स्क्रीन रिकॉर्ड कर लेते हैं। फिर इस वीडियो को वायरल करके रुपए की डिमांड की जाती है।

सोशल मीडिया ट्रैप: फेसबुक और इंस्टाग्राम के माध्यम से किसी अमीर घर के लड़के से दोस्ती की जाती है। फिर उससे मेल-मुलाकात के दौरान अंतरंग संबंधों के वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया जाता है।

हनी ट्रैप: ​​​सेक्सटॉर्शन गैंग किसी अमीर को झांसे में फंसाने के लिए एक युवती को भेजता है। युवती के अंदर जाते ही पुलिस-पत्रकार की भूमिका में कुछ लोग पहुंचते हैं। बदनामी का डर दिखाकर रुपए की डिमांड की जाती है।

दोस्ती के बाद ब्लैकमेलिंग: सोशल प्लेटफॉर्म पर दोस्ती करते हैं। फिर वॉट्सऐप कॉल पर बातचीत करने लगते हैं। भरोसा जीतने के बाद युवती अपने कपड़े उतार देती है। इसी तरह सामने वाले को कहती है। उसके ऐसा करते ही वीडियो रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल करते हैं।

प्रोफाइल रिसर्च करके तय करते हैं अपना शिकार

भोपाल क्राइम ब्रांच के डीसीपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी के मुताबिक, सेक्सटॉर्शन को अंजाम देने वाले लोग सोशल मीडिया और अन्य तरीके से पहले किसी की प्रोफाइल चेक करते हैं। यहां से वे लोगों के दोस्तों और परिजन की जानकारी एकत्र करते हैं। इसके बाद वे अपना शिकार चुनते हैं और दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं। मसलन, वे आपसे सोशल मीडिया पर दोस्ती करते हैं और फोन नंबर लेते हैं। अब बारी आती है कॉल्स की।

वे आपको मैसेंजर या फिर वॉट्सऐप पर वीडियो कॉल करते हैं। कॉल की दूसरी तरफ कोई न्यूड महिला या पुरुष होता है। आप वीडियो देख रहे होंगे, इस दौरान आपका वीडियो सामने वाला फोन के स्क्रीन रिकॉर्ड की मदद से रिकॉर्ड कर लेता है। यहां से ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू होता है। वीडियो क्लिप वायरल करने के नाम पर ब्लैकमेल किया जाता है।

वे आपसे बदले में पैसे मांगते हैं। कई बार कॉल करने वाला ही ब्लैकमेल करता है। कई बार फर्जी क्राइम ब्रांच, सीबीआई, वकील और सोशल मीडिया का मैनेजर बनकर कॉल किया जाता है। ये लोगों को फर्जी वारंट, गिरफ्तारी, वीडियो अपलोड होने से रोकने के नाम पर रुपए की डिमांड करते हैं।

क्या करे की आपके साथ ऐसा न हो


ऐसे मामले में लोग क्यों नहीं सामने आते

बदनामी से बचने के लिए कई लोग जालसाजी और ब्लैकमेलिंग का शिकार होने के बाद भी पुलिस में शिकायत नहीं करते। सेक्सटॉर्शन यानी सेक्सुअली ब्लैकमेलिंग के विक्टिम अक्सर ये गलती करते हैं। सेक्सटॉर्शन को आप एक्सटॉर्शन यानी जबरन वसूली का डिजिटल रूप कह सकते हैं। अक्सर पीड़ित लोगों में नेता, व्यापारी, अधिकारी और सामाजिक प्रतिष्ठा वाले लोग होते हैं। उन्हें डर लगता है कि ये सामने आया तो उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर चोट पहुंचेगी। यही डर ब्लैकमेलिंग की रकम देने के लिए मजबूर करती है।

पुलिस अधिकारी भी मानते हैं कि सेक्सटॉर्शन के उन्हीं मामलों में शिकायत दर्ज होती है, जहां पीड़ित ब्लैकमेलिंग से तंग हो जाता है। पहले तो कुछ रुपए ब्लैकमेलर्स को दे देता है, लेकिन जब उनकी डिमांड बढ़ती जाती है, तब पीड़ित किसी दोस्त की या कानूनी मदद लेता है। तब उसे पता चलता है कि ऐसा सिर्फ उसके साथ नहीं हो रहा है, बल्कि और लोग भी ऐसे जाल में फंसे हुए हैं।

सेक्सटॉर्शन रोकने के लिए नहीं है मजबूत कानून

सेक्सटॉर्शन बना है दो शब्दों से सेक्स और एक्सटॉर्शन (जबरन वसूली) से। मोबाइल, वीडियो कॉल और वेबकैम के जरिए जब किसी की सेक्स एक्टिविटी या न्यूड फोटो को रेकॉर्ड कर उसे ब्लैकमेल करता है, तो इसे सेक्सटॉर्शन कहा जाता है। ऐसे में यह घटना किसी के भी साथ हो सकती है। शिकार होने पर बदनामी के डर से बातें न छिपाएं। तुरंत घटना की शिकायत पुलिस से करें। ब्लैकमेलर्स की बातों में आकर उनकी कोई भी डिमांड पूरी न करें।

पुलिस ऐसे प्रकरणों में आईटी एक्ट सहित ब्लैकमेलिंग की धाराओं में एफआईआर दर्ज करती है। हालांकि पुलिस से जुड़े अधिकारी मानते हैं कि सेक्सटॉर्शन के बढ़ते अपराध को निपटाने के लिए मौजूदा कानून पर्याप्त नहीं हैं। कानून में सेक्सटॉर्शन को कहीं भी विशेष रुप से परिभाषित नहीं किया गया है। IPC और POCSO अधिनियम के तहत कानून केवल महिलाओं और बच्चों को राहत प्रदान करते हैं। जबकि सेक्सटॉर्शन के सबसे अधिक शिकार युवा और वयस्क पुरुष हो रहे हैं।

  • IPC की धारा 292 अश्लील सामग्री की बिक्री करने वाले पर लगाई जाती है। यह धारा वर्तमान में विभिन्न साइबर अपराधों में भी लगाया जा रहा है। इसमें आरोपी को पहली बार 2 साल के कारावास और 2000 रुपए तक के जुर्माने से और दूसरी बार में, 5 साल तक की कैद और 5000 रुपए तक का जुर्माने की सजा हो सकती है।
  • IPC की धारा 384 किसी व्यक्ति को भय दिखाकर ज़बरदस्ती वसूली करने पर लगाई जाती है। इसमें तीन साल तक कारावास या आर्थिक दंड से दंडित किया जा सकता है।
  • IPC की धारा 419 के अनुसार किसी के साथ छल करने पर ये धारा लगाते हैं। इसमें तीन वर्ष तक कारावास या आर्थिक दण्ड, या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।
  • IPC की धारा 420 किसी के साथ धोखा करने पर लगाई जाती है। इसमें सात साल तक की सजा हो सकती है।
  • IPC की धारा 354 किसी महिला की लज्जा भंग करने या उस पर गलत लांछन लगाने का प्रयास पर लगाया जाता है। इसमें 1 से 5 साल तक की सजा या फिर जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
  • IPC की धारा 354C किसी महिला को आपत्ति परिस्थितियों मे देखता है या फोटो खींचता है या किसी दूसरे व्यक्ति को दिखाता है, या ऐसी फोटो वायरल करने पर लगाया जाता है। इसमें भी एक साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
  • CrPC की धारा 108(1)(i)(a) के तहत कोई भी पीड़िता अपने इलाके के मजिस्ट्रेट को कॉल करके ऐसे व्यक्ति के बारे में सूचित कर सकती है जिसके बारे में उसे लगता है कि वह उसकी अश्लील सामग्री को वायरल कर सकता है। मजिस्ट्रेट के पास ऐसे लोगों को हिरासत में लेने और उसे सामग्री प्रसारित करने से रोकने के लिए बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने का आदेश देने की शक्ति होती है।
  • POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम), 2012 बच्चों को यौन अपराध, यौन उत्‍पीड़न तथा पोर्नोग्राफी से संरक्षण प्रदान करना है। बच्चों के मामले में इसका प्रयोग करते हैं।
  • IT Act (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम), 2000 में साइबर अपराध से संबंधित अपराधों के बारे में प्रयुक्त किया जाता है।

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