जांच टीमों के हत्थे चढ़ा करोड़पति -IFS

कोरोना महामारी के दौरान लागू लॉकडाउन में चार्टर्ड प्लेन से घूमने वाले ओडिशा के एक आईएफएस अधिकारी पर जांच एजेंसियों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
ओडिशा के भुवनेश्वर में आईएफएस अधिकारी अभय कांत पाठक के पास से करोड़ों रुपये की संपत्ति मिली है। विजिलेंस विभाग की टीम के अधिकारी पिछले दो दिनों से कई ठिकानों पर छापेमारी कर रहे हैं, जिसके बाद अभय कांत पाठक के अलावा उनका परिवार भी निशाने पर आ गया है। महज कुछ लाख रुपये की सैलरी के बाद भी करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक बन बैठे आईएफएस अधिकारी पाठक विजिलेंस विभाग के अधिकारियों की रडार में तब आ गए थे, जब वे लॉकडाउन के दौरान लगातार चार्टर्ड प्लेन से यात्राएं कर रहे थे। पाठक ने कोरोना के चलते लागू किए गए लॉकडाउन के दौरान 20 बार अपने परिवार के साथ चार्टर्ड प्लेन की यात्राएं की थीं। इस दौरान, उन्होंने कम से कम तीन करोड़ रुपये इन यात्राओं पर खर्च किए थे।
आईएफएस अधिकारी के कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही केंद्रीय एजेंसी की टीम के अधिकारियों की मानें तो पाठक, अपनी आखिरी चार्टर्ड फ्लाइट की यात्रा के दौरान रडार पर आ गए थे। उन्होंने 13 सितंबर को पत्नी, बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पुणे तक की यात्रा की थी। इसके पहले भी पाठक मुंबई, पुणे, दिल्ली, पटना आदि चार्टर्ड फ्लाइट से जा चुके थे। अधिकारियों का कहना है कि उनकी इन्हीं यात्राओं को देखने के बाद केंद्रीय टीम को उनकी संपत्ति को लेकर कुछ शक हुआ और वे टीम की नजर में आ गए।

बंगला देख दंग रहे गए जांच अधिकारी
आईएफएस अधिकारी का भुवनेश्वर स्थित बंगला देखकर विजिलेंस विभाग के अधिकारी दंग रह गए। वे आश्चर्य जता रहे हैं कि आखिर कैसे कोई आईएफएस अधिकारी जिसकी सैलरी 2.70 लाख हो, वह भुवनेश्वर में आठ हजार स्क्वायर फीट का बंगला अफॉर्ड कर सकता है। इस बंगले में इटैलियन मार्बल के साथ-साथ लाखों रुपये का बेड भी है।

डेंटिस्ट और ड्राइवर के पास से बरामद किए लाखों रुपये
भुवनेश्वर स्थित घर पर छापा मारने आई टीम ने आईएफएस अधिकारी के डेंटिस्ट और ड्राइवर के पास से लाखों रुपये बरामद किए हैं। अधिकारियों को छापे के दौरान उसके डेंटिस्ट के पास से 50 लाख रुपये कैश और उसके ड्राइवर के पास से 20 लाख रुपये कैश मिले। वहीं, अधिकारी के घर से आधा किलो सोना और 10 लाख कैश भी मिला है। विजिलेंस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पाठक के बेटे के बैंक खातों में लगभग 9.4 करोड़ रुपये की नकदी जमा की गई थी, जिसमें से लगभग 8.4 करोड़ रुपये अकेले भुवनेश्वर के बैंकों में थे।

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