“हुरुन रिच लिस्ट में इंदौर के विनोद अग्रवाल फिर पहले: 14 साल में संभाले बिजनेस से आज 9500 करोड़ की संपत्ति, एक साल में 2400 करोड़ की बढ़ोतरी और हर दिन 6.57 करोड़ रुपए की कमाई”

बुधवार को भारत के अरबपतियों की सूची जारी हुई। हुरुनी इंडिया रिच लिस्ट में मध्यप्रदेश के अमीरों में इस बार भी इंदौर के कोल कारोबारी विनोद अग्रवाल पहले नंबर पर हैं। ईडी छापे में घिरा पाथ ग्रुप भी इस लिस्ट में शामिल है, हालांकि इस ग्रुप की संपत्ति बीते साल से घट गई है।

 

विनोद अग्रवाल बीते साल 2024 में लिस्ट में 394वें नंबर पर थे और उनकी संपत्ति 7100 करोड़ थी। एक साल में उनकी संपत्ति 2400 करोड़ रूपए बढ़ी है, यानी हर दिन 6.57 करोड़ का इजाफा हुआ है। वहीं उजास एनर्जी के श्याम मूंदड़ा की संपत्ति घटी है। बीते साल वह 3500 करोड़ के साथ 709 नंबर पर थे, अब वह 767 नंबर पर है और संपत्ति 3410 करोड़ रुपए है।

यह है इंदौर के सबसे अमीर जो हुरुन रिच लिस्ट में शामिल

क्रमांक हुरुन रिच लिस्ट में क्रम नाम ग्रुप संपत्ति (करोड़ में)
1 328 विनोद अग्रवाल अग्रवाल कोल 9500
2 767 श्याम सुंदर मूंदड़ा उजास एनर्जी 3410
3 1094 सुनील पाटीदार शक्ति पंप 2050
4 1149 विनोद जैन शांतिनाथ डिटरजेंट 1940
5 1206 विनोद कुमार अग्रवाल जीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स 1820
6 1399 दिनेश पाटीदार शक्ति पंप 1440
7 1470 सुुनील चौरड़िया राज रतन ग्लोबल वायर 1330
8 1507 विमल तोड़ी जयदीप इस्पात 1270
9 1522 नितिन अग्रवाल पाथ ग्रुप 1230
10 1525 गौरव आनंद आनंद ज्वेलर्स 1220

विवादों में पाथ ग्रुप, एक साल में संपत्ति भी घटी

तीन दिन पहले ईडी के छापे से चर्चा में आए इंदौर (महू) के पाथ ग्रुप के नितिन अग्रवाल की संपत्ति पहले 1300 करोड़ थी और वह 1378वें नंबर पर थे इस बार उनकी संपत्ति घटी है और 1230 करोड़ है। वह 1522 नंबर पर आ चुके हैं।

शक्ति पंप के दो पार्टनर लिस्ट में शक्ति पंप के दिनेश पाटीदार बीते साल 3400 करोड़ के साथ 732 नंबर पर थे लेकिन अब 1440 करोड़ के साथ 1399वें पर पहुंच गए हैं। वहीं सुनील पाटीदार जो इसी कंपनी के हैं, वह बीते साल 2024 में 1200 करोड़ के साथ 1445 नंबर पर थे, जो इस बार 2050 करोड़ के साथ 1094 नंबर पर आ गए हैं।

आनंद ज्वेलर्स की संपत्ति में भी इजाफा

इंदौर के आनंद ज्वेलर्स के गौरव आनंद की संपत्ति 1220 करोड़ है, उनकी संपत्ति में इजाफा हुआ है। वह अभी 1525 नंबर पर है जो बीते साल 1000 करोड़ के साथ 1534 नंबर पर थे। राजरतन के सुनील चौरड़िया बीते लिस्ट में 2100 करोड़ के साथ 1016 पायदान पर थे जो अब 1330 करोड़ की संपत्ति के साथ 1470 नंबर पर आ चुके हैं।

वहीं, जीआर इन्फ्रा के विनोद अग्रवाल पहले 1700 करोड़ के साथ 1192 पायदान पर थे जो अब 1206 वें नंबर पर है और 1820 करोड़ की नेटवर्थ है। जयदीप इस्पात कंपनी के विमल तोड़ी इस बार 1270 करोड़ की संपत्ति के साथ 1507 नंबर पर है जो बीते साल 1500 करोड़ से 1298 नंबर पर थे।

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दो साल के थे तब परिवार इंदौर आया, 14-15 साल की उम्र से संभाल रहे बिजनेस

14-15 साल की उम्र से विनोद अग्रवाल ने बिजनेस संभालना शुरू किया था।

10 जून 1963 को हरियाणा के रोहतक में जन्मे विनोद अग्रवाल का परिवार जमींदारी से जुड़ा था। 1965 में जब वे दो साल के थे तो परिवार इंदौर आकर बस गया। इंदौर में पिता ने पहले नौकरी की, फिर खुद का ट्रांसपोर्ट बिजनेस शुरू किया। इसके बाद वे धीरे-धीरे कोयले के कारोबार से जुड़ते गए।

दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में विनोद अग्रवाल ने कहा था, मैं जब 9वीं क्लास में था, लगभग 14-15 साल मेरी उम्र थी। तभी बिजनेस संभालना शुरू कर दिया।

अग्रवाल ने बताया मैंने कम उम्र में ही गुजरात-राजस्थान की यात्राएं की, जो कोयला व्यापार से संबंधित थी। तब क्लाइंट को हैंडल करना बड़ा चैलेंज था। कम उम्र होने के कारण कई बार उन्हें भरोसे में लेना मुश्किल हो जाता था। हालांकि मेरा पढ़ने का शौक कम नहीं हुआ। 12वीं की परीक्षा में गोल्ड मेडलिस्ट रहा। प्रदेश में मेरिट लिस्ट में था। व्यापार का सफर भी चलता रहा।’

इंदौर आए थे तब साइकिल भी नहीं थी

आगे उन्होंने बताया, ‘जब हम इंदौर आए थे तो हमारे पास एक साइकिल भी नहीं थी। सपना था कि हमारे पास भी एक साइकिल हो। आज प्रभु ने हमें रोल्स रॉयस दी हुई है। मेरा मानना है कि जो समय आप से करवाए वो करना चाहिए। यदि आप समय के आगे चलेंगे तो भी तकलीफ है, समय से पीछे चलेंगे तो भी तकलीफ है।’

‘उदाहरण के लिए यदि आप आज मर्सिडीज कार मेंटेन कर सकते हैं और आप कंजूसी में मारुति में चलना शुरू कर दें तो वो भी गलत है। अगर आपकी पोजिशन मारुति की ही है और आप मर्सिडीज ले आते हैं तो आप संभाल नहीं पाएंगे। मेंटेन नहीं कर पाएंगे, तो परेशान हो जाएंगे। ब्याज का जीवन नहीं बनाएं। आप जैसे हैं वैसे रहें।’

इंदौर मां अहिल्या की पुण्य नगरी यहीं से मुझे सबकुछ मिल, इसे नहीं छोड़ सकता

विनोद अग्रवाल कहते हैं, ‘मुझसे पहले कभी कहा गया था कि भारत के कानून अलग तरीके के हैं। सख्त हैं। यहां टैक्सेशन अधिक है। आपको कहीं न कहीं विदेश में सेटल हो जाना चाहिए। देश से बाहर चले जाना चाहिए। तो मेरा उनको यही जवाब रहता था कि ये मां अहिल्या की पुण्य नगरी है।’

‘यदि आप यहां आए हैं और आपने यहां से कुछ अर्जन किया है और आप सोचें कि कहीं बाहर चले जाएं और उसको संभाल पाएं। मेरे पास ऐसे कई उदाहरण है, जिन्होंने अपना होम टाउन बदला तो वो कहीं संभल नहीं पाए। तो मैं तो कभी भी इंदौर नहीं छोड़ूंगा। मुझे तो इस धरती ने सब कुछ दिया है।’

‘फिर बेटे की बात हुई कि उसे बाहर सेटल कर दीजिए। NRI बना दीजिए। मैंने कहा कि भारत के संस्कार ऐसे नहीं है। हमारा बेटा ही हमारी भविष्य की धरोहर है। हमारी जो चीजें हैं, उसको उसे आगे बढ़ाना है। मेरा विजन है कि मैं परिवार के साथ इस देश में, इस शहर में रहूं।’

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