
विशेष योग में मनेगी वसन्त पंचमी,,,,, *सरस्वती साधक वैदिक विद्वानों के सम्मान का पर्व है वसन्त पंचमी,आचार्य पण्डित रामचन्द्र शर्मा वैदिक,शोध निदेशक भारद्वाज ज्योतिष व आध्यात्मिक शोध संस्थान,, इंदौर ।9755014181 ,,,,,,,। माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि* वसन्त,श्री व लाभ पंचमी* के नाम से प्रसिद्ध है।इस वर्ष वसन्त पंचमी मंगलवार,रेवती,,अश्विनी- नक्षत्र,शुभ योग,बृहस्पति प्रधान मीन राशि के चन्द्रमा के संयोग में मनेगी। यह पर्व ऋतुराज वसन्त के आगमन की सूचना देता है।इस दिन जौ व गेहूँ की बालियां, टेशू के पुष्प माँ शारदा को अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। आचार्य पण्डित शर्मा वैदिक ने बताया कि यह आनन्दोत्सव है इसके अधिष्ठाता प्रजापालक विष्णु व श्रीकृष्ण है।इसीलिए योगेश्वर भगवान कृष्ण की लीलाभूमि व्रज में वसन्तोत्सव की प्रधानता है। आचार्य शर्मा ने बताया कि वसन्त ऋतु मदनोद्दीपक है ।इसीलिए आज के दिन माँ सरस्वती की साधना, उपासना के साथ हीरति व काम की पूजा का विधान भी पुराणों में मिलता है । इस वर्ष मंगलवार के साथ अश्विनी नक्षत्र का संयोग अमृतसिद्धि महायोग व सिद्धि योग भी बन रहा है जो विद्यार्थियों के लिए कुछ खास है,। भौमाश्विनी योग का संयोग दुर्लभ है।रात्रि 10.55 से दूसरे दिन सूर्योदय तक रहेगा। जो विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग ले रहे उन्हें इस माह योग में माँ की साधना से भगवती सरस्वती की कृपा प्राप्त होगी ।इसके साथ हीअभिजीत काल व महानिशीथ काल मे धवल वस्त्र पहिन कर * श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै नमः* की जप साधना करने से विद्यार्थियों को लक्ष्य प्राप्ति में सहायता प्राप्त होगी व माँ शारदा की कृपाभी। आचार्य पण्डित शर्मा वैदिक ने बताया कि सृष्टि काल मे भगवदिच्छा से आद्या शक्ति ने अपने को पांच भागों में बांट लिया ।वे राधा,पद्मा,सावित्री, दुर्गा व सरस्वती के रूप श्रीकृष्ण के विभिन्न अंगों से प्रगट हुई थी।*उस समय श्रीकृष्ण के कण्ठ से उत्पन्न देवी का नाम सरस्वती हुआ* यही कारण है कि सत्व गुण सम्पन्ना देवी सरस्वती का एक नामवाणी भी है।अतः माँ सरस्वती का अधिकार वाणी पर माना जाता है ये वंहीविराजमान होती है। *आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि वसन्त पंचमी की मान्यता अबूझ मुहूर्त के रूप में है।किंतु इस वर्ष वसन्त पंचमी पर शुक्र का तारा अस्त होने से विवाह आदि शुभ कार्यों के मुहूर्त पंचांगकारों ने निर्धारित नही किये है।शुक्र व गुरु की विवाहादि कार्यों में महती भूमिका है।शुक्र काम जीवन का महत्वपूर्ण कारक माना जाता है।अतः शुक्र के अस्त होने से नीरसता ही शेष रह जाती है।अतः शुक्र का तारा अस्त होने से विवाह आदि मङ्गल कार्य नही हो सकेंगे।। * वसन्त पंचमी को सरस्वती पूजन के साथ ही सरस्वती साधक वैदिक विद्वानों की पूजा का भी विधान है*.।वैदिक विद्वान वेदों के रक्षक है,,वेदों को कण्ठ पर धारण किये है,अतः आज का दिन वेदों को धारण करने वाले वेदरक्षक वैदिक विद्वानों के सम्मान व सत्कार का दिन है,आज से ही वेदाध्ययन आरम्भ करने व विद्या अध्ययन की गुरुकुल परम्परा हमारे देश में आज भी प्रचलित है.। वसन्त पंचमी से वसन्तोत्सव का आरम्भ माना जाता है। वसन्त ऋतु को मदनोद्दीपक ऋतु भी कहा जाता है।इसलिए आज के दिन *रति व काम * के पूजन का भी विधान है।इस ऋतु ( वसन्त )में आयुर्वेद यौवन के सेवन की भीआज्ञा देता है। *आचार्य पण्डित रामचन्द्र शर्मा वैदिक,अध्यक्ष, मध्यप्रदेश ज्योतिष व विद्वत परिषद, इंदौर*