
ओडिशा में अगले साल विधानसभा और संसद दोनों के लिए चुनाव होने हैं लेकिन राज्य की राजनीति में अभी से बड़े बदलाव दिखने लगे हैं. एक बड़े घटनाक्रम में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के भरोसेमंद निजी सचिव और राज्य के 5टी सचिव वीके पांडियन को कैबिनेट रैंक दिया गया है. उन्होंने 2024 के महत्वपूर्ण चुनाव से पहले लगातार सार्वजनिक उपस्थिति को लेकर विपक्ष की बढ़ती आलोचना के बीच वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) का विकल्प चुना था. कमाल की बात यह है कि उन्हें एक दिन पहले ही वीआरएस मिला है.
मुख्यमंत्री के बेहद करीबी सहयोगी माने जाने वाले पांडियन अक्सर विवादों में रहे हैं. विपक्षी दलों का पांडियन पर आरोप है कि उन्होंने (पांडियन ने) राजनीतिक लाभ पाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया. पांडियन, ओडिशा कैडर के 2000 बैच के आईएएस अधिकारी हैं.
मिला कैबिनेट मंत्री का पद
राज्य के सामान्य प्रशासन और लोक शिकायत विभाग ने अपने 24 अक्टूबर के आदेश में उल्लेख किया है कि पांडियन को ‘कैबिनेट मंत्री के पद’ पर 5T (परिवर्तनकारी पहल) और नवीन ओडिशा योजना का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. आदेश में कहा गया, ‘पांडियन सीधे मुख्यमंत्री पटनायक के अधीन काम करेंगे.’ कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने ओडिशा सरकार के एक संदर्भ पत्र के बाद 23 अक्टूबर को पांडियन की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को मंजूरी दे दी.
तमिलनाडु के रहने वाले हैं वीके पांडियन
2000 बैच के आईएएस अधिकारी वीके पांडियन की जड़ें तमिलनाडु में हैं. उन्होंने एक युवा जिला कलेक्टर के रूप में अपनी साख से ध्यान आकर्षित किया था. 1999 में ओडिशा सुपर चक्रवात के बाद गंजम जिले में काफी लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. उसके बाद सीएम नवीन पटनायक उन्हें 2011 में मुख्यमंत्री कार्यालय यहां लाए थे.
धीरे-धीरे पांडियन ने पटनायक के एक बार भरोसेमंद सहयोगी और पूर्व-आईएएस अधिकारी प्यारी मोहन महापात्र द्वारा खाली की गई जगह को भरना शुरू कर दिया, जिन्हें सीएम पटनायक को हटाने के प्रयास के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था.