
टेलिकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) ने यूनिफाइड ब्रांड Vi लॉन्च किया है। इसके साथ ही कंपनी ने रिलायंस जियो और भारती एयरटेल को साफ संदेश दे दिया है कि वह मैदान छोड़कर नहीं जा रही है और उनका मुकाबला करने के लिए तैयार है। जियो की एंट्री के बाद वोडाफोन और आइडिया की स्थिति कमजोर हो गई थी और उन्होंने आपस में विलय का फैसला किया था। कंपनी के शीर्ष अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि विलय की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब कंपनी को Vi नाम से जाना जाएगा।
कंपनी की मार्केटिंग स्ट्रेटेजी है:-इसे वित्तीय संकट से जूझ रही कंपनी की मार्केटिंग स्ट्रेटेजी कह सकते हैं, जहां अब कंपनी दोबारा खुद को मार्केट में स्टेब्लिश करने के लिए तमाम कोशिशें कर रहा है। साल 2018 में वोडाफोन-आइडिया का विलय हुआ था और तब से एक कंपनी होने के बाद भी वोडाफोन और आइडिया के अलग-अलग नाम से कारोबार चल रहा था।
इस कंपनी का मालिकाना हक ब्रिटेन की वोडाफोन और आदित्य बिड़ला ग्रुप के पास है। जियो के आने के बाद दोनों कंपनियों ने आपस में विलय कर दिया था और वोडाफोन-आइडिया नाम से कंपनी अस्तित्व में आई थी। इस री लॉन्च के बाद कंपनी के शेयर में तेजी देखी गई है।
डिजिटल पर बहुत बड़ा दांव लगाएगी कंपनी:-कंपनी अपने इस ब्रांड के तहत अब डिजिटल पर बहुत बड़ा दांव लगाएगी। वोडाफोन-आइडिया को उम्मीद है कि नई स्कीम और नई ऑफर से वो ज्यादा से ज्यादा सब्स्क्राइबर जोड़ सकते हैं। वोडाफोन आइडिया लिमिटेड के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि हम डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं और सरकार के साथ मिलकर इसे गति प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बता दें कि जून 2020 में कंपनी का कस्टमर बेस बड़ी गिरावट के साथ 28 करोड़ रह गया। जबकि दो साल पहले 2018 में जब वोडाफोन आइडिया का विलय हुआ था तो इनका टोटल सब्स्क्राइबर बेस 40.8 करोड़ था।
टैरिफ में बढ़ोतरी के दिए गए हैं संकेत
कंपनी ने कहा है कि टैरिफ प्लान की कीमतों में इजाफा करना जरूरी है। कंपनी के सीईओ रविन्दर टक्कर ने नए ब्रांड को लांच करते हुए कहा कि वोडाफोन और आइडिया का विलय दो साल पहले हुआ था। हम तबसे दो बड़े नेटवर्क, हमारे लोगों और प्रोसेस के एकीकरण की दिशा में काम कर रहे थे। इसी के साथ ही मर्जर की प्रक्रिया पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि कंपनी पहले कदम के तौर पर टैरिफ में बढ़ोतरी के लिए तैयार है। नए टैरिफ से कंपनी को एआरपीयू सुधारने में मदद मिलेगी। यह अभी 114 रुपए है जबकि एयरटेल और जियो का एपीआरयू क्रमशः 157 रुपए और 140 रुपए है।
कंपनी पर 50,000 करोड़ रुपए का एजीआर बकाया:-इससे पहले ऐसी रिपोर्ट्स आई थी कि अमेरिका की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन और वेरिजॉन (Verizon) वोडाफोन आइडिया में 4 अरब डॉलर तक निवेश कर सकती हैं। हालांकि वोडाफोन आइडिया ने इन खबरों को खारिज कर दिया था। कंपनी ने कहा उसके निदेशक मंडल के समक्ष वर्तमान में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। कंपनी के बोर्ड ने हाल में इक्विटी शेयर जारी करके या ग्लोबल डिपाजिटरी रिसीट, अमेरिकन डिपोजिटरी रिसीट, फॉरेन करेंसी बॉन्ड्स, कन्वर्टिबल डिबेंचर्स के जरिए 25,000 करोड़ रुपए जुटाने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दी थी। इससे राशि से नकदी संकट से जूझ रही दूरसंचार कंपनी को बड़ी राहत मिल सकेगी। बता दें कि कंपनी पर करीब 50,000 करोड़ रुपए का एजीआर का बकाया है।
वोडाफोन की भारत में एंट्री साल 2007 में हुई थी:-वोडाफोन की भारत में इंट्री साल 2007 में हुई थी। कंपनी ने Hutchison Whampoa की 67 फीसदी हिस्सेदारी खरीदकर भारत में अपना कारोबार फैलाया। साल 2014 में एस्सार ग्रुप से बाकी बची हिस्सेदारी भी खरीद ली। इसी साल भारत सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर में 100 फीसद विदेशी निवेश की अनुमति दे दी। बता दें कि वोडाफोन के पास साल 2007 में देश के 16 सर्कल के कुल 2.8 करोड़ से ज्यादा सब्स्क्राइबर थे।
जियो के आने के बाद बदला था टेलीकॉम सेक्टर का रुख:-2016 में रिलायंस जियो के आने के बाद देश में टेलीकॉम सेक्टर का रुख बिल्कुल बदल गया। अब यूजर्स सस्ते डेटा के लिए जियो की ओर तेजी बढ़ रहे थे। जियो के आने के बाद से वोडाफोन-आइडिया के ग्राहकों की संख्या लगातार घट रही है। प्रति ग्राहक औसत राजस्व (ARPU) नीचे आ रहा है।
दो साल पहले वोडाफोन-आइडिया के मर्जर को टेलीकॉम सेक्टर का दूसरा सबसे बड़ा मर्जर माना जाता है। जिसके तहत वोडाफोन इंडिया के पास 45.1%, आदित्य बिरला ग्रुप के पास 26% और आइडिया के शेयर होल्डर्स के पास 28.9% की हिस्सेदारी मिली। आइडिया की हिस्सेदारी नई कंपनी में 54.9% की हो गई थी। कंपनी का नाम वोडाफोन-आइडिया हो गया था।