
बॉम्बे हाई कोर्ट के नागपुर बेंच ने कहा है कि Whatsapp ग्रुप में अगर कोई मेंबर गलत पोस्ट करता है तो उसके लिए ग्रुप के एडमिन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर मेंबर की तरफ से पोस्ट किए मेसेज में एडमिन का “कॉमन इंटेंशन” नहीं है या पहले से तय किया गया मेसेज नहीं है तो इसके लिए एडमिन को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है।
मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जुलाई 2016 में 33 साल के एक व्हाट्सऐप एडमिनिस्ट्रेटर के खिलाफ दायर केस खारिज कर दिया. इस फैसले के साथ कोर्ट ने कई व्हाट्सऐप एडमिन की बड़ी टेंशन को भी कम कर दिया है. ग्रुप में जुड़े मेंबर्स से कई बार गलती से भी कोई गलत पोस्ट ग्रुप में शेयर हो जाती है. वैसे भी यह तय करना मुश्किल होता है कि काैन सा मेंबर कब क्या पोस्ट कर दे.
ये है पूरा मामला?
दरअसल, 33 साल का यह शख्स जिस ग्रुप का ए़डमिन था, उस ग्रुप के एक मेंबर ने एक महिला सदस्य के खिलाफ गलत और अपमानजनक मेसेज किया था. जस्टिस जे़डए हक और जस्टिस अमित बी. बोरकर ने 33 साल के किशोर चिंतामन के खिलाफ पिछले महीने से दायर आपराधिक मामले में यह फैसला सुनाया है. इस मामले की सुनवाई करते हुए दोनों जस्टिस ने पाया, “एक बार जब कोई व्हाट्सऐप ग्रुप बन जाता है तो सभी सदस्यों को समान अधिकार होते हैं. एडमिन के पास विशेषाधिकार होता है किसी नए मेंबर को जोड़ने का. एडमिन के पास ग्रुप के किसी सदस्य की तरफ से पोस्ट कंटेंट को रेगुलेट, मॉडरेट या सेंसर करने का अधिकार नहीं होता है.”
यह कहकर खारिज किया केस
जजों ने अपने फैसले में कहा कि जब कोई शख्स व्हाट्सऐप ग्रुप बनाता है तो उसे पहले से इस बात की जानकारी नहीं होती कि कौन सा मेंबर क्या मेसेज पोस्ट करेगा. इसलिए एडमिन को किसी ग्रुप पोस्ट के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता. इसके साथ ही गोंदिया जिला मजिस्ट्रेट के पास दायर याचिका भी कोर्ट ने खारिज कर दी है.