मानसून सत्र के बाद मोहन कैबिनेट में बड़ा फेरबदल संभव: परफॉर्मेंस रिपोर्ट के आधार पर 5-6 मंत्रियों की छुट्टी की तैयारी, 5 नए विधायक बन सकते हैं मंत्री; रीति पाठक या मालिनी गौड़ को मौका, जबकि 3 वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदलने के संकेत

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  से बातचीत में संकेत दिए कि विधानसभा के मानसून सत्र के बाद बदलाव संभव है।नए मंत्रिमंडल में युवाओं को प्राथमिकता मिल सकती है, जबकि अनुभवी नेताओं को भी महत्व दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार 5-6 मंत्रियों को हटाकर 7-8 नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है।

सीएम बोले- परफॉर्मेंस बनेगा आधार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मंत्रिमंडल फेरबदल का मुख्य आधार मंत्रियों का कामकाज रहेगा। अंतिम निर्णय पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मंत्रियों व विधायकों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा होती है, जिसमें शीर्ष नेतृत्व के सुझाव भी शामिल रहते हैं।

बीजेपी के सामने प्रमुख राजनीतिक समीकरण

जानकारों के अनुसार इस फेरबदल के जरिए बीजेपी कई राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरण साधना चाहती है।बुंदेलखंड का प्रतिनिधित्व बढ़ानाः क्षेत्र की सीमितहिस्सेदारी से उपजी नाराजगी दूर करने के लिए सागर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ से नए मंत्रियों को मौका दिया जा सकता है।

महिला प्रतिनिधित्व बढ़ानाः महिला मतदाताओं कोध्यान में रखते हुए रीती पाठक, अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को अवसर मिल सकता है।ओबीसी समीकरण और 2028 की तैयारी: आगामीविधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी ओबीसी वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।निकाय चुनाव की तैयारी: अगले वर्ष होने वाले नगरीयनिकाय चुनावों को देखते हुए संगठन सीटों की स्थिति, प्रत्याशी चयन, बूथ प्रबंधन और चुनावी रणनीति पर फीडबैक जुटा रहा है।सिंधिया खेमे और मूल संगठन में संतुलनः मौजूदा

इन मंत्रियों पर हटने का खतरा

समीक्षा रिपोर्ट और विवादों के आधार पर कुछ मंत्रियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:विजय शाह: कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के बाद वे आलोचनाओं के केंद्र में रहे। मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां और संगठन की नाराजगी भी सामने आई। पूर्व में भी उनके कुछ बयान पार्टी के लिए असहजता का कारण बने थे।दिलीप अहिरवारः पहली बार विधायक बने अहिरवार को कैबिनेट में जगह मिली थी। हालांकि हालिया समीक्षा में उनके कामकाज को अपेक्षित स्तर का नहीं माना गया, जिससे उनकी स्थिति कमजोर बताई जा रही है।

प्रतिमा बागरीः उनका नाम जाति प्रमाण पत्र संबंधी विवाद में चर्चा में रहा है, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य स्तरीय जांच समिति से रिपोर्ट मांगी है। उनके भाई की गिरफ्तारी का मामला भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना।राधा सिंह: पहली बार विधायक बनीं राधा सिंह के विभाग के प्रदर्शन को लेकर हालिया समीक्षा में सवाल उठे हैं। इसके बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलें

इन मंत्रियों के विभागों में हो सकता है बदलाव

प्रहलाद पटेलः उन्हें संगठन या सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। राज्य मंत्रिमंडल में बने रहने पर उनके अनुभव के आधार पर अतिरिक्त विभाग भी दिए जा सकते हैं।कैलाश विजयवर्गीयः विभागों में बदलाव संभव है, लेकिन उनकी राजनीतिक भूमिका और जिम्मेदारियां क्या होंगी इसे लेकर अभी संशय की स्थिति है।तुलसीराम सिलावटः विभागीय पुनर्संतुलन के तहतउनके विभाग में बदलाव की संभावना बताई जा रही है।

वरिष्ठ पत्रकार एन के सिंह कहते हैं कि एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव देश के उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों में हैं, जिन्होंने सपने में भी मुख्यमंत्री बनने की कल्पना नहीं की थी। पार्टी ने उन्हें तीसरी या चौथी पंक्ति से उठाकर इतने बड़े पद पर बैठाया है।उनके साथ प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गज नेता काम कर रहे हैं, जो अनुभव और कद में उनसे कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में इन नेताओं का असहज होना लाजमी है। यह उस समय का पॉलिटकल कंपल्शन

नए चेहरों की एंट्रीः कौन हैं दावेदार?

संभावित नए चेहरों में सागर के प्रदीप लारिया प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी चर्चा में है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की मंत्रिमंडल में वापसी की संभावना भी जताई जा रही है।

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