
मध्य प्रदेश में यूसीसी की जमीन हो गई तैयार…
मध्य प्रदेश में यूसीसी की जमीन पूरी तरह तैयार हो गई है। मानसून सत्र हंगामेदार होने के आसार हैं। हंगामे की वजहों में यूसीसी विल प्रमुख रहने वाला है। मध्यप्रदेश सरकार हर हाल में मानसून सत्र में यूसीसी बिल पारित करके ही रहेगी। विधानसभा में कांग्रेस यूसीसी के विरोध में अपना विरोध दर्ज कराएगी। चूंकि सत्ताधारी दल के पास पर्याप्त बहुमत है, इसलिए यूसीसी बिल को पारित होने से कोई रोक नहीं सकता। सरकार ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रसाद देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो मसौदे को अंतिम रूप दे रही है। समान नागरिक संहिता का लक्ष्य विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेने, भरण-पोषण और संपत्ति के अधिकार जैसे मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू करना है। लिव इन रिलेशनशिप जैसे मामलों को लेकर मतभिन्नता सामने आ रही है। तो मध्य प्रदेश के दो मुस्लिम विधायक यूसीसी के विरोध में मुखर हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 जून 2026 को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू (यूसीसी) करने के लिए सभी जिलों में जन परामर्श बैठकें हो चुकी हैं। सभी जिलों में कार्य शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। राज्य स्तरीय परामर्श 22 जून को भोपाल में हुआ। इसमें सभी आयोगों, विभागों, राजनैतिक दलों और धर्मगुरुओं से पृथक-पृथक बैठकें आयोजित कर मत लिया गया। लगभग 3.49 करोड़ एस.एम.एस यूसीसी के सुझाव आमंत्रित करने के लिए समग्र के हितग्राहियों को भेजे गए। नागरिकों के 9 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हो चुके हैं, 90% से भी अधिक नागरिक यूसीसी के पक्ष में हैं। अल्पसंख्यक समुदाय का भी बड़ी संख्या में समर्थन प्राप्त हुआ है। विधेयक के प्रारूप पर समिति द्वारा विधि विभाग के साथ साझा रूप से कार्य किया जा रहा है।
विधानसभा में सरकार को यूसीसी के विरोध में कांग्रेस का सामना करना पड़ेगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सवाल किया कि यूसीसी के नाम पर प्रदेश के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने वाले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को पहले जनता के इन सवालों का जवाब देना चाहिए। आदिवासियों के लिए की गई मोदी गारंटियां कब पूरी होंगी? लापता और उत्पीड़न की शिकार हो रही आदिवासी बहनों की सुरक्षा और न्याय की गारंटी कौन देगा? और यदि यूसीसी इतना ही जरूरी है, तो बताइए कि इससे आदिवासी समाज, उनकी परंपराओं, रीति रिवाजों और संवैधानिक अधिकारों को कैसे सुरक्षित किया जाएगा? प्रदेश की जनता को प्रचार नहीं, जवाब चाहिए। हालांकि, मध्य प्रदेश में आदिवासी समाज को यूसीसी से अलग रखने की योजना है। मध्य प्रदेश एक आदिवासी बहुल राज्य है। राज्य स्तरीय सुनवाई में आदिवासी प्रतिनिधियों ने अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने की मांग की है, जिससे यूसीसी के दायरे से उन्हें बाहर रखने पर जोर दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, प्रदेश में मानसून सत्र तीखी नोक झोंक और गर्माहट से भरा रहने वाला है। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने यूसीसी बिल को ध्यान भटकाने और एक राजनैतिक एजेंडा करार दिया है। वहीं भाजपा का मानना है कि यूसीसी से समाज में सभी नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा होगी और सामाजिक समानता आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आमने-सामने खड़े नजर आने वाले हैं। हालांकि सरकार ने यूसीसी की जमीन तैयार कर ली है। विपक्ष के पास इसे कमजोर करने की कोई ताकत नजर नहीं आ रही है। यूसीसी लागू होने के बाद धरातल पर सभी धर्म के लोग समान नियम-कानून का पालन करते नजर आएंगे। और मध्य प्रदेश यूसीसी लागू करने वाला देश का चौथा प्रदेश बन जाएगा…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं