लड़की सुंदर है… परिवार भी जाना-पहचाना है… लेकिन अभी उम्र सिर्फ 20 साल है, इतनी जल्दी शादी की क्या जरूरत है? ‘ केतन के दादा देवीचंद अग्रवाल बताते हैं कि जब पहली बार सिया गोयल का रिश्ता उनके पोते केतन के लिए आया था, तब उन्होंने यही बात कही थी. सामने कोई अनजान परिवार नहीं था.

सिया और केतन की शादी कैसे तय हुई दादा ने बताया
दोनों परिवारों के बीच 45-50 साल पुरानी पहचान थी, रिश्तेदारी भी थी और भरोसा भी. इसलिए न ज्यादा पूछताछ हुई, न किसी तरह का संदेह पैदा हुआ. उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ महीनों बाद इसी रिश्ते की चर्चा देशभर के अधिकांश घरों में होने लगेगी. .
देवीचंद अग्रवाल आज भी उस दिन को याद करते हैं जब गोयल परिवार ने रिश्ते की बात आगे बढ़ाई थी. उनका कहना है कि उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि लड़की अभी छोटी है, कुछ साल बाद शादी कर दीजिए. लेकिन गोयल परिवार इस रिश्ते को लेकर गंभीर था. बात आगे बढ़ी और फिर सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि देखते ही देखते 11 फरवरी को दोनों परिवार आमने-सामने बैठे, 19 फरवरी को रोका हो गया और 25 नवंबर की शादी की तारीख भी तय कर दी गई. उस दिन घर में खुशियां थीं. अग्रवाल परिवार के मुताबिक, शादी की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं. होटल बुकिंग, मेहमानों की सूची और दूसरे कार्यक्रमों पर चर्चा होने लगी थी. परिवार का कहना है कि सिया केवल होने वाली बहू नहीं थी, बल्कि धीरे-धीरे घर का हिस्सा बन चुकी थी.
देवीचंद बताते हैं, सिया कई बार हमारे घर आई. होली पर आई, पूजा में शामिल हुई, परिवार के साथ बैठी, खाना खाया. मुझसे मिलती थी तो ‘राधे-राधे’ कहती थी. उसके व्यवहार से कभी नहीं लगा कि उसके मन में कुछ और चल रहा है. यही वजह है कि आज भी परिवार के लोग बार-बार एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि अगर सिया इस रिश्ते से खुश नहीं थी, तो उसने शादी के लिए हां क्यों की? अगर कोई और बात थी, तो उसने कभी बताई क्यों नहीं?
हमने कभी सोचा नहीं था
देवीचंद अग्रवाल कहते हैं कि उनका परिवार अभी भी सदमे से बाहर नहीं निकल पाया है. उनके मुताबिक, केतन घर से ट्रेकिंग के लिए निकला था. किसी ने नहीं सोचा था कि वह वापस नहीं लौटेगा. वह कहते हैं कि पुरानी पहचान और रिश्तेदारी के कारण उन्होंने भरोसा किया था. अब पूरा परिवार यही चाहता है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई सामने आए.
रोका का वीडियो और खुशियों से भरे चेहरे
इस बीच केतन और सिया के रोका समारोह के वीडियो भी सामने आए हैं. वीडियो में दोनों बेहद खुश नजर आते हैं. सिया अलग-अलग पोज देती दिखाई देती है, परिवार के साथ तस्वीरें खिंचवाती है और केतन के साथ अंगूठी बदलती नजर आती है. वीडियो देखकर शायद ही कोई अनुमान लगा सके कि कुछ महीनों बाद ही इसमें प्रेमी की भी एंट्री हो जाएगी. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन वीडियो को देखकर कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि किसी पक्ष को इस रिश्ते पर आपत्ति थी तो उस समय इसे आगे क्यों बढ़ाया गया. हालांकि इन सवालों का जवाब फिलहाल जांच एजेंसियां तलाश रही हैं.
केतन की मां ने मान लिया था बहू
केतन की मां का कहना है कि उन्होंने सिया को बहू मान लिया था. वह घर आती थी, परिवार के साथ घुल-मिलकर रहती थी और कभी ऐसा नहीं लगा कि सब कुछ सामान्य नहीं है. परिवार का आरोप है कि यदि रिश्तों की वास्तविक स्थिति पहले बता दी जाती तो शायद हालात कुछ और होते. उनका कहना है कि शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन बाद में पुलिस जांच में सिया और चेतन चौधरी के बीच लगातार संपर्क की बात सामने आई. पुलिस अब दोनों के संबंधों और बातचीत के पैटर्न की जांच कर रही है.
17 जून की कैफे में हुई मुलाकात
पुलिस जांच के अनुसार, 17 जून को यानी घटना से एक दिन पहले और चेतन चौधरी पुणे के लुल्लानगर स्थित थर्ड वेव कैफे में मिले थे. जांच एजेंसियों का दावा है कि दोनों ने वहां बैठकर लंबी बातचीत की. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या लोहगढ़ किले से जुड़ी जानकारी पहले से साझा की गई थी. अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तकनीकी तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है. पुलिस को संदेह है कि मई के अंत में हुई एक यात्रा का संबंध भी इसी जांच से जुड़ा हो सकता है.
वडगांव कोर्ट ने भेजा पुलिस हिरासत में
मामले की जांच के लिए लोनावला ग्रामीण पुलिस ने अदालत से पुलिस कस्टडी की मांग की थी. सुनवाई के बाद वडगांव न्यायालय ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को 29 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया. पुलिस का कहना है कि कई तकनीकी और परिस्थितिजन्य पहलुओं की जांच अभी बाकी है और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
48 मिनट का वो रहस्य
पुलिस जांच में एक और तथ्य सामने आया जिसने अधिकारियों का ध्यान खींचा. सीसीटीवी फुटेज में हुडी पहने एक व्यक्ति दिखाई दिया. जांचकर्ताओं ने उसके आने-जाने का समय निकाला. पुलिस के अनुसार, पूरे आने-जाने में लगभग 48 मिनट लगे. अधिकारियों का अनुमान है कि किले की चढ़ाई और वापसी में लगने वाले समय को निकाल दिया जाए तो वह व्यक्ति ऊपर केवल 8 से 10 मिनट ही रुका होगा. यही बात जांचकर्ताओं को खटकी. पुलिस का सवाल है कि कोई व्यक्ति पहाड़ी किले तक जाए और वहां कुछ मिनट रुककर वापस लौट आए, तो उसके पीछे क्या वजह हो सकती है.
बदलते बयान भी बने जांच का हिस्सा
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान सिया के बयान में भी लगातार बदले हैं. जांचकर्ताओं का कहना है कि शुरुआती बयान में घटना को सिलसिलेवार तरीके से बताया गया था, जबकि बाद की पूछताछ में घटनाक्रम की दूसरी कहानी सामने आई. पुलिस का कहना है कि दोनों बयानों के बीच अंतर ने जांच को नई दिशा दी और अधिकारियों ने तकनीकी साक्ष्यों की मदद से घटनाक्रम को दोबारा समझने की कोशिश शुरू की.