यूरोप में रिकॉर्ड हीटवेव का कहर: सड़कें पिघलीं, पटरियां उखड़ीं, 1300+ मौतें; आखिर भारत से ज्यादा खतरनाक क्यों साबित हो रही है ये गर्मी?

स्विट्जरलैंड, फ्रांस, जर्मनी… ये नाम सुनते ही दिमाग में एक तस्वीर बनती है। उस तस्वीर में अकसर साफ-सुथरी सड़कें, बर्फीले पहाड़ और मौसम का लुत्फ उठाते लोग होते हैं। लेकिन इस वक्त हकीकत कुछ और है।

यूरोप के ये देश रिकॉर्ड गर्मी में जल रहे हैं। सड़कें पिघल रहीं, पटरियां उखड़ रहीं। पिछले 7 दिनों में हीटवेव ने 1300 से ज्यादा लोगों की जान ले ली। गर्मी से बचने को लोग नदियों-तालाबों में कूद रहे, जिससे फ्रांस में 55 लोग डूब गए।आखिर यूरोप में ऐसा क्यों हो रहा और ये गर्मी भारत से अलग कैसे सवाल-1: यूरोप के देशों में कैसी गर्मी पड़ रही है?

जवाबः पहले 3 तस्वीरों में हीटवेव का मंजर…

फ्रांस ने गर्मी की वजह से सतही तापमान 60 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। इसकी वजह से कई इलाकों में सड़कें पिघल रही हैं।

जर्मनी में गर्मी की वजह से रेलवे ट्रैक पिघलकर उखड़ने लगे। कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। गर्मी बढ़ने पर ट्रेनों के AC भी काम करना बंद कर दे रहे हैं।

चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में गर्मी से बचने के लिए लोगों पर पानी स्प्रे किया जा रहा है।

यूरोप की कुल आबादी करीब 74 करोड़ है। इनमें से 19 करोड़ लोग 35 डिग्री से ज्यादा तापमान झेल रहे हैं। देखिए यूरोप के शहरों में गर्मी का हाल…

  • फ्रांस में 1947 से तापमान दर्ज होना शुरू हुआ। पहली बार पारा 44.3 डिग्री तक पहुंचा है। पेरिस में एथलेटिक्स ट्रैक पर एक युवक की मौत हो गई। 18 महीने का बच्चा कार में फंस गया और गर्मी से जान चली गई। फ्रांस में 1 हजार से ज्यादा ऐसी मौतें हुईं।
  • पोलैंड में गर्मी ने 105 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। स्लुबिस शहर में 40.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। 1921 में सबसे ज्यादा 40.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया था।
  • जर्मनी के कोचेम में 28 जून को सबसे ज्यादा 41.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ है। ऐसे जंगल में आग लगी, जहां आज भी दूसरे विश्वयुद्ध के गोला-बारूद हैं। जर्मनी में बिना एसी वाली ट्रेनों को सर्विस से बाहर कर दिया गया।
  • ब्रिटेन में 36.1 डिग्री तापमान पहुंचा। जून 1976 में अधिकतम 35.6 डिग्री का रिकॉर्ड था। डेनमार्क के ओडिन्से में 28 जून को 36.6 डिग्री तापमान था। ये 1874 के बाद सबसे ज्यादा है।

सवाल-2: भारत में इतना तापमान सामान्य गर्मी माना जाता है, फिर यूरोप में हाहाकार क्यों?

जवाबः यूरोप दुनिया के ठंडे रिहायशी महाद्वीप में से एक हैं। यहां पूरा सिस्टम ठंड के हिसाब से बना है, न कि जानलेवा गर्मी के लिए। यूरोप का मौजूदा ढांचा इतनी गर्मी झेलने के लिए तैयार नहीं है…

1. पुराने घर गर्मी अंदर सोख लेते हैं

  • यूरोप में बने ज्यादातर घर ठंड से बचने के लिए ऐसे बने हैं, जो गर्मी को अंदर रोकते हैं। कई छतें टिन या लोहे की हैं। जब ज्यादा गर्मी पड़ती है, तो ये घर ‘भट्टी’ बन जाते हैं। ये दिनभर गर्मी को घरों के अंदर कैद करते हैं, जिससे घर रात में भी ठंडे नहीं हो पाते।
  • अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में आर्किटेक्चर के एसोसिएट प्रोफेसर तिमुर डोगन के मुताबिक, जब रातें भी गर्म रहती हैं, तो घर दिन-ब-दिन और ज्यादा गर्म होते हैं। घर के अंदर की हालत और ज्यादा बिगड़ती है। शरीर कभी ठीक नहीं हो पाता।

2. एयर कंडीशनर की कमी

  • अमेरिका में जहां 90% घरों में AC हैं, वहीं यूरोप के सिर्फ 20% घरों में AC है। UK में तो ये आंकड़ा सिर्फ 7% है।
  • यूरोप की सरकारी जगहों में भी पर्याप्त AC नहीं है। बीते दिनों फ्रांस के एक क्लिनिक में रूम ज्यादा गर्म होने की वजह से मरीज की मौत हो गई थी।
  • हाल ही में फ्रांस सरकार ने अस्पतालों में AC लगाने के लिए आनन-फानन में 10 करोड़ यूरो (1070 करोड़ रुपए) का बजट जारी किया।

3. ज्यादा बुजुर्ग आबादी

  • यूरोप में 22% से ज्यादा आबादी की उम्र 65 साल या उससे ज्यादा है। इसके कारण यूरोप दुनिया की सबसे उम्रदराज आबादी वाला महाद्वीप कहा जाता है।
  • फ्रांस की पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने बताया कि हीटवेव से हुई 1 हजार मौतों में 85% 65 साल या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्ग हैं। 40% मौतें घर पर हुई हैं।
  • 2025 में यूरोप में हीटवेव के कारण 24 हजार से ज्यादा मौतें हुईं। इनमें से भी 85% लोग 65 साल या उससे ज्यादा उम्र के थे।

2003 में फ्रांस में गर्मी की वजह से 15 हजार लोगों की जान गई थी, इसमें सबसे ज्यादा बुजुर्ग ही थे। तब नियम बना था कि वृद्धाश्रमों में कम से कम एक कॉमन रूम हो, जहां AC लगा हो।

एनर्जी एंड क्लाइमेट पॉलिसी एक्सपर्ट सिद्धांत सिंह बताते हैं कि भारत की तुलना में यूरोप में सूरज की रोशनी ज्यादा देर तक रहती है। इससे गर्मी की तीव्रता बढ़ जाती है।इस वक्त यूरोप में 16 घंटे सूरज रहता है, जबकि भारत में 12-13 घंटे। यूरोप की मौजूदा गर्मी ज्यादा सूखी है और हवाएं भी नहीं चल रही। लोगों को ऐसी गर्मी की आदत भी नहीं है। इसलिए लोग ज्यादा घुटन महसूस कर रहे हैं।

सवाल-3: यूरोप में इस रिकॉर्ड गर्मी की वजह क्या है?

जवाबः 3 बड़ी वजहें हैं…

1. ओमेगा ब्लॉक से रुकी मौसमी हवाएं

  • यूरोप के वायुमंडल में एक हाई-प्रेशर सिस्टम बना हुआ है और इसके दोनों तरफ लो-प्रेशर सिस्टम। इसके कारण मौसम को आगे बढ़ाने वाली तेज हवाएं ‘जेट स्ट्रीम’ घुमावदार तरीके से चल रही हैं।
  • मौसमी नक्शे पर यूरोप के ऊपर ग्रीक अक्षर Ω (ओमेगा) की तरह जेट स्ट्रीम बह रही हैं। इसकी वजह से ओमेगा ब्लॉक बन रहा है। इसे एक ‘मौसमी ट्रैफिक जाम’ मानिए।
  • इसके कारण अफ्रीका से आईं गर्म और सूखी हवाएं यूरोप के वायुमंडल में लॉक हो रही हैं और ठंडी हवाएं-बादल अंदर नहीं घुस पा रहे हैं।

हीट डोम से यूरोप में गर्मी का गुबार बना

  • जब ओमेगा ब्लॉक के कारण हाई-प्रेशर सिस्टम एक जगह रुक जाता है, तो वह ‘हीट डोम’ यानी गर्मी का गुंबद या गुबार बनाता है।
  • सूरज की गर्मी से धरती तपती है, तो गर्म हवा ऊपर उठने की कोशिश करती है। लेकिन ऊपर मौजूद हाई-प्रेशर सिस्टम इस गर्म हवा को वापस नीचे की तरफ धकेलता है।
  • जब हवा नीचे की तरफ दबती है, तो वह और ज्यादा गर्म हो जाती है। यह एक प्रेशर कुकर जैसा माहौल बना देता है। आसमान में भी बादल नहीं होते, जिससे सूरज की सीधी किरणें जमीन को और ज्यादा तपाती हैं।

3. ग्लोबल वॉर्मिंग से हालात और ज्यादा खराब

  • ओमेगा ब्लॉक और हीट डोम तो प्राकृतिक मौसमी घटनाएं हैं, जो पहले भी होती थीं। लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण इनकी संख्या और असर बढ़ गया है।
  • मौसम और पर्यावरण पर रिसर्च करने वाल इटंरनेशनल ग्रुप ‘वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन’ का कहना है कि 50 साल पहले ऐसी हीटवेव का आना नामुमकिन लगता था। अब इसकी सबसे बड़ी वजह है- इंसानों की बनाई ग्लोबल वॉर्मिंग।
  • यूरोप वैश्विक औसत से दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहा है और दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बना गया है।

सवाल-4: इस गर्मी से यूरोप को कब तक राहत मिलेगी?

जवाब: मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक हीट डोम धीरे-धीरे पश्चिम यूरोप से पूर्व की तरफ खिसकेगा। अंटार्कटिक की तरफ से सर्द हवाएं आएंगी, जो राहत देंगी। फ्रांस के पश्चिमी हिस्से में इस हफ्ते से राहत मिलनी शुरू होगी। बाकी हिस्सों में 1 जुलाई तक मौसम गर्म ही रहेगा। जर्मनी, इटली और ब्रिटेन में भी 30 जून तक तापमान कम होगा। हालांकि यह राहत कुछ दिनों की ही रहेगी।

चेक गणराज्य के चेस्की क्रुमलोव में लोग हीटवेव से बचने के लिए नदी में नहाते हुए। 27 जून को तापमान 40 डिग्री पार चला गया था। (Photo: AFP)मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक जुलाई में यूरोप के ऊपर एक और हीट डोम एक्टिव हो सकता है। इसका असर पश्चिम और मध्य यूरोप में रहेगा।स्पेन, पुर्तगाल, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण इंग्लैंड, उत्तर इटली में 6 से 9 दिन ज्यादा गर्मी और हीटवेव पड़ेगी। 7 से 10 जुलाई के बीच यह हीट डोम एक्टिव हो सकता है।

यह अभी की गर्मी से ज्यादा खतरनाक हो सकता है। पहली हीटवेव ने मिट्टी को सुखा दिया है। सड़कों और इमारतों को गर्म कर दिया है। शहरों में नमी वैसे ही कम हो गई है। ऐसे में लगातार दूसरी हीटवेव शहरों को और ज्यादा गर्म करेगी।अमेरिका की क्लाइमेट इम्पैक्ट कंपनी के मुताबिक अगस्त तक यूरोप में गर्म मौसम बना रहेगा। उस पर इस साल एल-नीनो की वजह से यूरोप में सूखा पड़ने की भी आशंका है।

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