
आओ आज ‘फैट मैन’ की बात करते हैं…
फैट मैन’ शब्द सुनकर बहुत सारे लोगों को इन दिनों विशेष चर्चा में रहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप याद आ रहे होंगे। पर हम आज ट्रंप नहीं बल्कि उस फैट मेन की बात कर रहे हैं जिसने जापान में तबाही लाकर दूसरे विश्व युद्ध को खत्म कर दिया था। तीसरे विश्व युद्ध की चर्चाओं से पहले सभी को ‘फैट मैन’ के बारे में जानना ही चाहिए।
6 अगस्त को हिरोशिमा पर एक लिटिल बॉय बम गिराया गया। तीन दिन बाद,नागासाकी पर एक फैट मैन बम गिराया गया। अगले दो से चार महीनों में,परमाणु बमबारी के प्रभावों से हिरोशिमा में 90,000 से 166,000 लोग और नागासाकी में 60,000 से 80,000 लोग मारे गए; लगभग आधी मौतें पहले ही दिन हुईं। इसके बाद कई महीनों तक, जलने,विकिरण रोगऔर अन्य चोटों के प्रभावों से कई लोग मरते रहे, साथ ही बीमारी और कुपोषण ने उनकी स्थिति को और भी बदतर बना दिया। हिरोशिमा में अनुमानित 24,000 सैनिकों की विशाल सैन्य टुकड़ी के बावजूद, मरने वालों में से लगभग 90% नागरिक थे।
तो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के नागासाकी शहर पर ‘फैट मैन’ नामक परमाणु बम गिराया था। द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के नागासाकी शहर पर ‘फैट मैन’ नामक प्लूटोनियम-आधारित परमाणु बम गिराया था। यह हमला हिरोशिमा पर ‘लिटिल बॉय’ गिराए जाने के तीन दिन बाद हुआ, जिसके परिणामस्वरूप भारी जनहानि हुई और जापान को आत्मसमर्पण करना पड़ा।हमले से जुड़े मुख्य तथ्य दिनांक और समय: 9 अगस्त 1945, सुबह करीब 11:02 बजे।बम का प्रकार: ‘फैट मैन’ (प्लूटोनियम-239 इम्प्लोजन तकनीक पर आधारित)।बमवर्षक विमान: बी-29 विमान ‘बॉसकार’, जिसका नेतृत्व मेजर चार्ल्स डब्ल्यू. स्वेनी कर रहे थे। असल में यह बम ‘कोकुरा’ शहर पर गिराया जाना था, लेकिन खराब मौसम और बादलों की वजह से लक्ष्य बदलकर नागासाकी करना पड़ा। इस धमाके से तुरंत और बाद में विकिरण (रेडिएशन) के प्रभाव से लगभग 70,000 से 80,000 लोग मारे गए। हिरोशिमा और नागासाकी दोनों हमलों के बाद जापान ने 15 अगस्त 1945 को आत्मसमर्पण की घोषणा की, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हुआ।
नागासाकी एक जहाज निर्माण केंद्र था. बम सुबह 11:02 बजे शहर से 1,650 फीट ऊपर गिराया गया। विस्फोट से 22,000 टन टीएनटी के बराबर एनर्जी पैदा हुआ। शहर के चारों ओर की पहाड़ियों ने बम की विनाशकारी शक्ति को सीमित कर दिया। फिर भी तत्काल 39,000 लोग मारे गए। माना जाता है कि 1945 के अंत तक रेडिएशन के संपर्क में आने से 20,000 से 40,000 और लोगों की मृत्यु हो गई। सटीक आंकड़े उपलब्ध कराना असंभव है, क्योंकि विस्फोट में शव नष्ट हो गए थे और रिकॉर्ड मिट गए थे।
जिस तरह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मनमाना आजकल कम कर रहे हैं, ऐसे दौर में उनके दिमाग में अक्सर ही फैट मेन शब्द आता ही होगा। हम सभी को भी फैट मेन की जानकारी होना इसीलिए जरूरी है। ताकि हम ईश्वर से प्रार्थना कर सकें … कि वैसा दौर फिर कभी ना आए…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।