कैचमेंट पर निर्माण और प्राकृतिक चैनल बंद होने से हमारे तालाब लगातार खत्म हो रहे हैं। पूर्वी क्षेत्र के नायता मुंडला तालाब की हालत अब ये है कि उसमें बारिश का एक बूंद पानी नहीं पहुंचता। कभी यह तालाब पलासिया तक के भूजल को रिचार्ज करता था।

आरटीओ के पास स्थित छोटा तालाब कभी इंदौर के प्राकृतिक जल संरक्षण तंत्र का अहम हिस्सा था। अब आरटीओ, बस स्टैंड, सड़क व भवनों के निर्माण से कैचमेंट और प्राकृतिक जलमार्ग खत्म हो गए हैं।
इधर जिला प्रशासन व नगर निगम गंगाजल संवर्धन अभियान के तहत जल संरक्षण पर काम करने का दावा कर रहे हैं। तालाबों का गहरीकरण, कुओं-बावड़ियों का पुनर्जीवन व रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी योजनाएं बनाई जा रही हैं। ऐसे में सवाल है कि जब बारिश का पानी तालाब तक पहुंच ही नहीं रहा तो गहरीकरण किस काम का?
असर सभी तालाबों पर: सिर्फ यशवंत सागर में आया पानी इंदौर में 15 इंच बारिश के बाद भी यशवंत सागर (12.3 फीट) को छोड़कर लगभग किसी भी तालाब में पानी नहीं बढ़ रहा है। बिलावली, लिंबोदी, पीपल्यापाला तो सूखे ही हैं। सिरपुर में भी इस बार कम पानी आया है। अधिकांश तालाबों की चैनल और कैचमेंट पर अंधाधुंध निर्माण हो चुके हैं। पहले जहां खेत हुआ करते थे, वहां भी अब बिल्डिंगें खड़ी दिखाई दे रही हैं।
बिलावली की 70% चैनल खत्म… लिम्बोदी के भी यही हाल
- 2 हेक्टेयर का रिचार्ज जोन: वाटर कंसल्टेंट सुरेश एमजी कहते हैं कि नायता मुंडला की तलाई आसपास के इलाकों के लिए रिचार्ज जोन मानी जाती है। पांच साल पहले तक यहां पानी ठहरता था।
- बिलावली-लिम्बोदी में चैनल ही खत्म: बिलावली और लिम्बोदी तालाब भी प्राकृतिक जलमार्ग बंद होने का खामियाजा भुगत रहे हैं। राऊ, बायपास और देवगुराड़िया की ओर से आने वाली चैनलों पर निर्माण होने से पानी की आवक घट गई है। बिलावली को भरने वाली करीब 70% चैनल खत्म हो चुकी हैं। लिम्बोदी का जलस्तर साल में करीब छह महीने शून्य रहता है।
- दावों पर सवाल: निगम ने 10 तालाबों के गहरीकरण, 250 कुओं का पुनरुद्धार, 27 बावड़ियों का संरक्षण, 24 तालाब चैनलों की सफाई, 30 हजार नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने के दावे अभी कागजों में हैं। जब तालाबों की चैनल ही बंद तो गहरीकरण बेअसर भूजल विशेषज्ञ सुधींद्र मोहन शर्मा के मुताबिक, तालाब का गहरीकरण तभी उपयोगी है, जब बारिश का पानी उसमें पहुंच सके। प्राकृतिक कैचमेंट व जलमार्ग बंद हो जाएं तो तालाब गहरा होने के बावजूद पानी जमा नहीं होगा। ऐसे में कैचमेंट, प्राकृतिक चैनल और जल निकासी मार्गों को भी सुरक्षित रखना जरूरी है। शहर के कई पुराने तालाब इसी समस्या से जूझ रहे हैं।