आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच शुरू हो चुकी है। मंदिर के नाम पर तीन साल पहले यानी 2024 में बनी ‘नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति’ के पदाधिकारी अंडरग्राउंड हैं। नियम विरुद्ध बनी इस समिति में 12 सदस्य हैं।
समिति की वो रसीद बुक भी सामने आई है, जिसके माध्यम से नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति चंदा इकट्ठा करती थी।
समिति की वो रसीद बुक भी सामने आई है, जिसके माध्यम से आरोपी चंदा इकट्ठा करते थे। इस पर “रजत सौंदर्यीकरण हेतु दान पत्र” लिखा है। रजिस्ट्रेशन नंबर, मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक का अकाउंट नंबर, IFSC कोड और पांच मोबाइल नंबर भी दर्ज हैं। ने इन मोबाइल नंबर धारकों से फोन पर बात करने की कोशिश की। ये सभी समिति के पदाधिकारी हैं।

श्रद्धालुओं को समिति यह रसीद दे रही थी। इसकी रकम प्राइवेट बैंक खातों में जा रही थी।
पढ़िए, समिति के सदस्यों ने क्या कहा
दामोदर खंडेलवाल, सदस्य; कहा- समय नहीं मिल पाता
रसीद में दर्ज पहले फोन नंबर पर कॉल किया, इसे दामोदर खंडेलवाल ने रिसीव किया। खुद को किराना व्यापारी बताते हुए उन्होंने कहा- मेरा नाम समिति में जरूर है, लेकिन इसके कामकाज में सक्रिय नहीं रहा। व्यापार के कारण समय नहीं मिल पाता। केवल माता की निःस्वार्थ भाव से सेवा-भक्ति करता हूं।
उन्होंने बताया कि जांच के संबंध में अब तक किसी अधिकारी ने उनसे संपर्क नहीं किया है।
पिंटू खंडेलवाल, सदस्य; बोले- मैं समिति में शामिल नहीं
रसीद पर दर्ज दूसरा नंबर डायल किया तो कॉल पिंटू खंडेलवाल ने उठाया। उनका कहना था कि मैं समिति का सदस्य नहीं हूं। रसीद बुक पर मेरा फोन नंबर कैसे दर्ज हो गया, इसकी जानकारी नहीं है। समिति के रजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट्स देखे जाएं, इनमें मेरा नाम नहीं मिलेगा।
कांताप्रसाद शर्मा, सदस्य; कहा- जनसहयोग से हो रहे काम
अगला फोन नंबर कांताप्रसाद शर्मा का था। उन्होंने बताया कि वे हार्डवेयर कारोबारी हैं। लंबे समय से मां बगलामुखी की सेवा से जुड़े हैं। साल 1995-96 में मंदिर का प्लास्टर क्षतिग्रस्त होने पर 10 रुपए की ड्रॉ टिकट बेचकर मरम्मत कराई गई। इसके बाद 1998-99 में धर्मस्व विभाग से एक लाख रुपए स्वीकृत कराकर जनसहयोग से धर्मशाला और राधाकृष्ण मंदिर का निर्माण कराया गया।
उन्होंने कहा- उस समय भी निजी समिति ही काम करती थी। साल 2004 में तत्कालीन विधायक फूलचंद वेदिया के प्रयासों से शासकीय प्रबंध समिति बनाई गई। इसमें मैं भी सदस्य रहा। मंदिर में समय-समय पर कई काम जनसहयोग से कराए गए हैं। सुदर्शन सेवा समिति ने भी श्रद्धालुओं की भावना के अनुरूप रजत सौंदर्यीकरण कराया, जिसका लेखा-जोखा बैठक में रखा गया है।

दो फोन नंबरों पर कॉल रिसीव नहीं किया गया
रसीद पर रियल एस्टेट कारोबारी सोम मित्तल और मनोहर लाल पंडा का नंबर भी दर्ज है। मित्तल के मोबाइल पर लगातार रिंग जाती रही, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। वहीं, पंडा का मोबाइल नंबर स्विच ऑफ बताता रहा। बताया जाता है कि इनमें से पंडा सुदर्शन सेवा समिति के अध्यक्ष और मित्तल कोषाध्यक्ष हैं।
शिकायतों के आधार पर शुरू की गई जांच
स्थानीय लोगों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि शासकीय प्रबंध समिति के पास पर्याप्त मात्रा में दान है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। बिजली जाने पर मंदिर में अंधेरा हो जाता है, क्योंकि जनरेटर या इन्वर्टर की व्यवस्था नहीं है। बिजली और पानी के बिल भी समय पर जमा नहीं हो पाते।
लोगों का कहना है कि कोई श्रद्धालु स्वर्ण या रजत सौंदर्यीकरण के लिए दान देना चाहता है, तो शासकीय प्रक्रिया में समय लगता है। इसी कारण रजत सौंदर्यीकरण के लिए अलग समिति बनाई गई, जिसने लाखों रुपए के काम कराए।

कलेक्टर बोलीं- रिपोर्ट के बाद स्थिति साफ होगी
कलेक्टर प्रीति यादव ने बताया कि जांच समिति बना दी गई है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट तौर पर कुछ कहा जा सकता है। जांच में रसीद बुक, बैंक खातों, दान की राशि, सोने-चांदी के उपयोग और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
वित्तीय रिकॉर्ड में गड़बड़ियों की शिकायत मिली थी
बता दें कि कलेक्टर कार्यालय को चढ़ावा चोरी की शिकायत मिली थी। इसमें कहा गया कि मंदिर परिसर में गैर सरकारी समिति श्रद्धालुओं से कैश, सोना-चांदी के रूप में दान इकट्ठा कर रही है। निजी बैंक खातों का इस्तेमाल कर इसके वित्तीय रिकॉर्ड में गड़बड़ियां की गई हैं। इसके बाद कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए।
आगर-मालवा में मां बगलामुखी मंदिर प्रबंध समिति के नाम से पहले से सरकारी समिति बनी है, जिसके पदेन अध्यक्ष एसडीएम होते हैं।

इन 4 पॉइंट्स पर चल रही जांच
- कुल कितना चढ़ावा आया? यह सरकारी खजाने में जमा क्यों नहीं कराया गया?
- मंदिर के गर्भगृह में कितनी चांदी लगी?
- समिति ने अब तक कितने लोगों से चढ़ावा लिया? उसका कोई रिकॉर्ड है या नहीं?
- मंदिर सरकारी होने और उसकी समिति होने के बाद प्राइवेट लोगों की समिति बनाना क्या सही है?
तंत्र साधना, मिर्च अनुष्ठान के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु
नलखेड़ा में लखुंदर नदी किनारे स्थित मां बगलामुखी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां मां जाग्रत स्वरूप में विराजमान हैं। तंत्र साधकों के लिए यह सबसे अहम साधना स्थलों में से एक है।
मान्यता के अनुसार, यहां होने वाले तांत्रिक और मिर्च अनुष्ठान से कोर्ट केस में विजय, शत्रुओं पर जीत और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। माना जाता है कि महाभारत काल में पांडवों को इसी स्थान पर विजय का वरदान हासिल हुआ था।
मंदिर में माता तीन स्वरूपों में विराजती हैं। दाईं ओर महालक्ष्मी, बाईं ओर सरस्वती और बीच में मां बगलामुखी के दर्शन होते हैं। मंदिर का गर्भगृह 3 करोड़ रुपए से ज्यादा के सोने, करीब 65 लाख रुपए की चांदी और बहुमूल्य गहनों से सजाया गया है। मंदिर के सामने 80 फीट ऊंची दीपमाला भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है।

मां बगलामुखी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है।