नई दिल्ली:फ्रांस का लुई विटॉन इतना लग्जरी ब्रांड है कि इसका सस्ते से सस्ता सामान भी बहुत महंगा आता है. अगर इसका एक परफ्यूम भी लेना चाहें तो उसकी कीमत 35 हजार से ज्यादा होती है. अगर बैग लेने जाएंगे तो कीमत लाखों में पहुंच जाती है.

लेकिन जो लुई विटॉन आज के समय में दुनिया के सबसे बड़े लग्जरी ब्रांड में गिना जाता है, उसी लुई विटॉन की शुरुआत एक ऐसे शख्स ने की थी जो मात्र 14 साल की उम्र में घर से भाग गया था. पिता की मर्जी के खिलाफ घर छोड़ने वाला वह शख्स और कोई नहीं, बल्कि लुई विटॉन ही थे. वह अपने घर से पैदल निकले थे और इधर-उधर छोटा-मोटा काम करने के बाद 16 साल की उम्र में पेरिस पहुंचे थे.
4 अगस्त, 1821 को जन्मे लुई विटॉन ने शायद ही कभी सोचा होगा कि यह सफर एक शानदार करियर और एक ऐसे ग्लोबल एम्पायर की शुरुआत बनेगा जो दो सदियों बाद भी कायम है. आज लुई विटॉन दुनिया के सबसे बड़े लग्जरी ब्रांड में से एक है. लुई विटॉन के 50 से ज्यादा देशों में 460 से ज्यादा स्टोर्स हैं. इसके प्रोडक्ट्स की कीमत लाखों-करोड़ों में होती है और सिर्फ रईस और सेलिब्रिटी ही इसे अफॉर्ड कर पाते हैं.
कैसे हुई हुई लुई विटॉन?
1835 में, लुई विटॉन नाम के 14 साल के लड़के ने अपने पिता की मर्जी के खिलाफ पूर्वी फ्रांस के जुरा पहाड़ों में स्थित अपना गांव छोड़ दिया और पैदल ही पेरिस के लिए निकल पड़े. एक साधारण परिवार से आने वाले विटॉन ने रास्ते में छोटे-मोटे काम किए और आखिरकार 16 साल की उम्र में फ्रांस की राजधानी पेरिस पहुंचे.
उन्होंने सबसे पहले सूटकेस बनाने वाले रोमेन मारेचल के यहां अप्रेंटिस के तौर पर काम किया. विटॉन ने जल्द ही अपनी प्रतिभा साबित कर दी, उनकी बेहतरीन कारीगरी की तारीफ हुई, और यहां तक कि महारानी यूजीनी ने उन्हें अपना बॉक्स-मेकर और सूटकेस-पैकर नियुक्त कर लिया.
1854 में, 33 साल की उम्र में, उन्होंने अपना खुद का बिजनेस शुरू किया ‘लुई विटॉन मैलेटियर’ ब्रांड का जन्म हुआ. शुरुआत से ही, उन्होंने आम सामान नहीं बनाया, बल्कि ऐसे लग्जरी आइटम बनाए जो उस समय के दौर के हिसाब से थे. नेपोलियन थर्ड के दरबार में सूटकेस पैकर के तौर पर काम करते हुए उन्होंने देखा था कि कैसे कपड़े और टोपियां गुंबद के आकार के भारी बक्सों में रखे जाते थे. इसके बजाय, विटॉन ने अपनी वर्कशॉप में शानदार और एक के ऊपर एक रखे जा सकने वाले सूटकेस डिजाइन किए.

खास डिजाइन और बढ़ती मांग
यह सिर्फ डिजाइन की बात नहीं थी. घोड़ों वाली गाड़ियों से ट्रेनों में बदलाव और यात्रा करने की बढ़ती इच्छा के साथ, लोग ऐसा काम का सामान चाहते थे जो ज्यादा जगह न घेरे
उन्होंने लकड़ी और मेटल से फ्रेम बनाए, लेकिन बॉडी के लिए लेदर का इस्तेमाल करने के बजाय, उन्होंने राई के आटे से तैयार लिनन का इस्तेमाल किया, जिससे वह वॉटर-रिपेलेंट बन गया. बाद में, उन्होंने बॉडी को धारीदार बाहरी कपड़ों से सजाया जो आगे चलकर मशहूर चेकरबोर्ड पैटर्न, ‘लुई विटॉन डेमियर कैनवस’ में बदल गया.
सूटकेस की इतनी ज्यादा मांग थी कि लुई ने अपना ब्रांड शुरू करने के सिर्फ पांच साल बाद ही पेरिस के पास एस्नियर में एक फैक्ट्री में निवेश किया. शुरू में, उन्होंने 20 कर्मचारियों को काम पर रखा, लेकिन बाद में यह संख्या बढ़कर 225 हो गई. फिर भी, सूटकेस का प्रोडक्शन परिवार के ही हाथों में रहा. अपने बेटे जॉर्जेस के साथ मिलकर, उन्होंने एक ऐसा सूटकेस लॉक बनाया, जिसे तोड़ा नहीं जा सकता. इस लॉक का इस्तेमाल आज भी होता है. उस समय, यह एक इनोवेटिव डेवलपमेंट था, क्योंकि अमीर ग्राहक अपने महंगे सामान के लिए और ज्यादा सुरक्षा चाहते थे.

टाइटैनिक से क्या है कनेक्शन?
इस मशहूर सूटकेस की कहानी किसी किंवदंती से कम नहीं है. उदाहरण के लिए, टाइटैनिक के डूबने के बाद, ‘हाउस ऑफ विटॉन’ का लग्जरी सामान कई दिनों तक पानी पर तैरता रहा. ऐसी खबरें आईं कि डूबे हुए मलबे में मिले लुई विटॉन के संदूक पूरी तरह वाटरप्रूफ थे और उनके अंदर रखा सामान रत्ती भर भी गीला नहीं हुआ था.
इसी तरह, 1907 में पेरिस से बीजिंग तक हुई कार रैली में भी ये सूटकेस अटूट साबित हुए. जाहिर है कि पानी के रास्तों को पार करने में ये कई इंजनों से भी बेहतर साबित हुए.
जब लुई विटॉन का 70 साल की उम्र में निधन हुआ, तो उनके बेटे जॉर्जेस ने सूटकेस का कारोबार संभाला. अपने पिता की याद में, उन्होंने मशहूर ‘कैनवस मोनोग्राम’ बनाया. 1896 में उनके पिता के शुरुआती अक्षरों (LV) को एक खास फूलों के डिजाइन के साथ मिलाया गया. उन्होंने एक ऐसा ब्रांड क्रेज शुरू किया जो आज भी कायम है.
कितने महंगे हैं इसके प्रोडक्ट?
जो कंपनी कभी सिर्फ सूटकेस बनाया करती थी, आज वह सिर्फ सूटकेस ही नहीं, बल्कि और भी कई प्रोडक्ट्स बनाती है. इसकी शुरुआत हैंडबैग और पर्स से हुई थी, और बाद में कपड़े, गहने, घड़ियां और परफ्यूम भी इसमें शामिल हो गए.

लुई विटॉन का एक वॉलेट भी 55,000 रुपये का आता है. अगर आप इसका एक परफ्यूम खरीदना चाहते हैं तो उसकी कीमत भी 34,500 रुपये है. लुई विटॉन का एक छोटा सा हैंडबैग भी 2,15,000 रुपये का आता है. वहीं, इसके बैकपैक की शुरुआती कीमत ही 4,20,000 रुपये है.
लुई विटॉन शू भी बेचता है. इसके स्नीकर शू की शुरुआती कीमत 1,30,000 रुपये है. इसकी टाई भी 28,000 रुपये की मिलती है. अगर आप इसका हाफ स्लीव शर्ट खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए 1,85,000 रुपये खर्च करने होंगे.
आज कितनी बड़ी है कंपनी?
1987 में, परिवार की इस कंपनी का विलय शराब बनाने वाली कंपनी ‘मोएट हेनेसी’ (Moët Hennessy) के साथ हुआ और ‘LVMH’ नाम का लिस्टेड लग्जरी गुड्स ग्रुप बना.LVMH के मालिक बर्नार्ड अर्नॉल्ट हैं. बर्नॉर्ड अर्नॉल्ट की नेटवर्थ 157 अरब डॉलर है. अप्रैल 2023 में LVMH 500 अरब डॉलर की वैल्यू वाली पहली यूरोपियन कंपनी बनी थी.आज इस कंपनी की मार्केट 223 अरब डॉलर से ज्यादा है. भारतीय करंसी में यह रकम 21 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा होती है.