
नेपाल बह रहा है और न्यूयॉर्क जल रहा है…
यह दुनिया कितनी बेढंगी है, इसका अनुमान नेपाल और न्यूयॉर्क की घटनाओं से लगाया जा सकता है। इधर नेपाल त्रासदी ने यह अहसास कराया है कि इंसान की औकात प्राकृतिक कहर के सामने दो कौड़ी की भी नहीं है। लोगों के सामने से इंसान बहते नजर आए तो मकान, दुकान और पुल, पनबिजली परियोजनाओं का पता ही नहीं चला। उधर, न्यूयॉर्क में इस बात को लेकर बहस जारी है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डाक्टर मोहन भागवत द्वारा पाँच हज़ार लोगों की भीड़ को संबोधित करना सही है अथवा गलत। न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी के समर्थक आरएसएस पर प्रतिबंध तक की बात कर रहे हैं। मानो आरएसएस और मोहन भागवत के कहर से पूरा अमेरिका ही जलकर खाक होने वाला हो। बात बस इतनी सी है कि जब तक कहर नहीं है तब तक इंसान अहंकार में डूबा एक-दूसरे के प्रति नफरत से भरा हुआ है। यानि कि जब तक प्रकृति शांत है तब तक व्यक्ति कहर बरपाने को हरदम तैयार है। यह समझने को कोई भी तैयार नहीं है कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ ही प्रकृति के साथ खिलवाड़ न कर जीवन को संवारा जाए तो शायद एक बेहतर दुनिया बनाई जा सकती है।
नेपाल के भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने तीन ज़िलों में भारी तबाही मचाकर इंसानों का भ्रम तोड़ दिया है। इसमें कम से कम 165 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि सुरक्षा बलों के जवान और विदेशी पर्यटकों समेत बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। इस आपदा में जान-माल का भारी नुक़सान हुआ है। यह हाल के वर्षों में नेपाल की सबसे भीषण आपदाओं में से एक है। बाढ़ उस समय आई जब एक हिमस्खलन ने भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ल्हेंदे का बहाव रोक दिया। इसके बाद बाढ़ सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी के नजदीक तिमुरे में पहुँची। सैकड़ों लोगों की आबादी वाले इस इलाक़े का बड़ा हिस्सा बह गया और इसके बाद बाढ़ का पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ा।
इलाके में बारिश की कोई सूचना नहीं थी, इसलिए लोगों को इस आपदा की कोई चेतावनी नहीं मिली। बाढ़ आने के समय लोग रोजमर्रा के काम में व्यस्त थे।
तब ऊपर से तेजी से आती पानी की एक विशाल दीवार के साथ धुएं के गुबार ने पलों में सब कुछ तहस-नहस कर दिया। बाढ़ एक लहर की तरह आई, जिसकी ऊंचाई करीब 100 मीटर रही होगी और बाजार को अपने साथ बहा ले गई। कुछ ही पलों में पूरा बाजार ख़त्म हो गया। बाढ़ ने कई पनबिजली परियोजनाओं और वाणिज्यिक बैंकों को तबाह कर दिया है। नेपाली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में कई पुल और करीब 40 किलोमीटर हाइवे बह गए हैं। निजी और सार्वजनिक संपत्तियों को हुए कुल नुकसान का अभी तक कोई आकलन नहीं हो पाया है। लापता पर्यटकों में सबसे अधिक संख्या भारतीयों की बताई जा रही है और इनका आंकड़ा 100 से अधिक है।
नेपाल के पर्यटक बोर्ड ने टूर ऑपरेटरों का हवाला देते हुए कहा कि लापता भारतीयों में से अधिकांश कैलाश मानसरोवर जा रहे यात्री थे। कुल मिलाकर यहाँ से मिल रही लाशों की स्थिति देखकर मन इतना व्याकुल हो रहा है कि आखिर इंसान से चूक कहाँ हुई है जो ऐसी भयावह स्थिति निर्मित होती है।
उधर 29 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वेयर गार्डेन (एमएसजी) में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क में तमाशा जारी है। ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन अमेरिकन हिन्दूज फोर इंगेजमेंट एंड डायलॉग कर रहा है। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 5,000 भारतीय-अमेरिकियों के शामिल होने की उम्मीद है। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ज़ोहरान ममदानी को लेकर भारतीय मूल के अमेरिकी आपस में बँटे हुए दिख रहे हैं। दरअसल ममदानी ने कहा था कि वह 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वेयर गार्डेन (एमएसजी) में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि शायद उनके पास इस कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार नहीं है। ममदानी ने इस कार्यक्रम को रद्द करने के सवाल पर कहा था कि उनके परिवार ने उन्हें भारत की जो तस्वीर सिखाई, वह एक बहुलतावादी समाज और एक धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र की थी, जिसमें हर व्यक्ति को अपनाने की भावना है। उन्होंने कहा था कि बहिष्कारवादी सोच पर आधारित किसी आंदोलन का उभार बेहद परेशान करने वाला है। ममदानी के इस बयान पर भारत में बहुत ही ध्रुवीकृत प्रतिक्रिया आई। आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने एक्स पर लिखा है, ”न्यूयॉर्क में आयोजित यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन एक अंतरधार्मिक आयोजन की मिसाल है, जहाँ आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी विविध, बहुसांस्कृतिक और विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोगों से संवाद करेंगे।” कुल मिलाकर अमेरिका में भी, आरएसएस को लेकर वही बहस हो रही है जैसी तीखी नोकझोंक भारत में दिखाई देती है। इसे भारतीय भावनाओं का वैश्वीकरण के रूप में देखा जा सकता है।
बात फिर वहीं आ जाती है कि नेपाल से न्यूयॉर्क तक की घटनाएं यही साबित कर रही हैं कि प्राकृतिक कहर बरपने के पहले तक इंसान खुद भी बिना कहर बरपाए नहीं रह सकता है। प्रकृति द्वारा अहंकार को चकनाचूर करने तक इंसान कभी भी बिना अहंकार के जीवन नहीं जी सकता है। नेपाल की घटना यही संदेश दे रही है कि सुधर जाओ, अभी भी वक्त है। इसके विपरीत, न्यूयॉर्क और अमेरिका से यही संदेश आ रहा है कि हम कभी नहीं सुधरेंगे। बात चाहे डॉ. मोहन भागवत और ममदानी की हो अथवा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वर्सेस पूरी दुनिया की। बिना चश्मा लगाए, यह देखा जा सकता है कि नेपाल प्राकृतिक कहर में बह रहा है और न्यूयॉर्क नफरत की आग में जल रहा है… इसे इन शब्दों में भी समझा जा सकता है कि नेपाल में भ्रम टूट रहा है और न्यूयॉर्क में भ्रम पल बढ़ रहा है।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।