
‘जन तर’ – ‘मन तर’…
नीट पेपर लीक मामला इतना ज्यादा तूल पकड़ जाएगा,यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने सोचा भी नहीं होगा। ‘कॉकरोच’ शब्द को पकड़कर अमेरिका में बैठे अभिजीत दिपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाकर युवाओं के मन पर ऐसा जादू डाला कि फिलहाल मोदी सरकार की साँसें फूलती नजर आ रही हैं। वहीं, कांग्रेस सहित समूचा विपक्ष कॉकरोच की पीठ पर सवार होकर सत्ता तक पहुंचने की दूरी को पाटने में लगा है। 12 साल सत्ता में पूरी कर चुकी मोदी सरकार ने भले ही बड़े-बड़े आंदोलनों की कोई परवाह नहीं की हो और मुद्दों को अपनी रणनीति के मुताबिक जिंदा और दफन किया हो, लेकिन इस बार न तो मुद्दे को जिंदा करने का मौका मोदी सरकार को मिला और न ही इस मुद्दे के दफन होने का कोई सूत्र मोदी सरकार के हाथ में नजर आ रहा है। और शायद यह पहली बार ही है जब मोदी को अपना मौन तोड़ने में जल्दबाजी दिखानी पड़ी है। और यह पहली बार ही है जब कॉकरोच जनता पार्टी के युवा आंदोलन पर कब्जा करते हुए राहुल गांधी ने पूरी कमान अपने हाथ में लेने में सफलता हासिल कर ली है। सोनम बांगचुक का चेहरा फिलहाल पार्श्व में जाता नजर आ रहा है और अभिजीत दिपके का चेहरा भी ओझल होता दिख रहा है। अब अगर कोई चेहरे सामने हैं तो वह राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और डिंपल यादव के हैं। इसके अलावा
खलनायक के रूप में मोदी सरकार और दिल्ली पुलिस नजर आ रही है। इसे कॉकरोच जनता पार्टी की सफलता माना जाए या पप्पू ब्रांड के रूप में प्रचारित किए गए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की, यह तय कर पाना शायद जल्दबाजी होगी।
सबसे पहले हम यही देखते हैं कि मोदी ने इतनी जल्दी चुप्पी तोड़कर क्या कोशिश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई 2026 को कहा कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मोदी ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक के दोषियों को सजा दिलाने के लिए सरकार ने फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का फ़ैसला किया है। इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार की ओर से लिए जा रहे फैसलों की कड़ी में ये एक अहम कदम है।युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री का यह बयान प्रश्नपत्र लीक समेत विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है। पीएम मोदी को जवाब देते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा है, आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचाया है। आपने न सिर्फ हमारी शिक्षा व्यवस्था पर कब्जा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया। इसके जिम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया। राहुल ने कहा कि छात्रों की मांगें साफ हैं। पहला धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं। दूसरा छात्रों से माफी मांगिए और तीसरा छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। यानि कि मामला साफ है, फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैकफुट पर नजर आ रहे हैं तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी फॉरवर्ड खेलते हुए गोल करते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य वर्तमान स्थिति में कांग्रेस और समूचे विपक्ष को संजीवनी देता दिखाई दे रहा है लेकिन पिछले 12 वर्ष का मोदी युग सबको इस संशय में डाले हुए है कि पता नहीं कब बाजी पलट जाए और फिलहाल नायक दिख रहे सभी खलनायक नजर आने लगें और युवा एक बार फिर मोदी के साथ खड़ा नजर आए। या खुद अभिजीत दिपके आंदोलन के राजनीतिकरण होने की बात कहकर पूरे मामले से पल्ला झाड़ ले और युवाओं से शांतिपूर्वक अपने-अपने घर जाने की अपील कर दे। खैर हो, कुछ भी सकता है लेकिन फिलहाल तो यही नजर आ रहा है कि कहीं धर्मेन्द्र प्रधान खुद ही नैतिकता के आधार पर अपना इस्तीफा लेकर कॉकरोज जनता पार्टी के मंच पर पहुंच जाएं और वहीं से कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष को आईना दिखाएं कि उनके नाम पर भारतीय जनता पार्टी के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार वह राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव सहित विपक्ष को कभी नहीं लेने देंगे। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्ष की मांग को मानते हुए अपने मंत्री का इस्तीफा कतई नहीं होने देंगे। ऐसे में रास्ता नैतिकता का ही बचता है। और वैसे देखा जाए तो नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मियाद पूरी तरह से निकल चुकी है। और वैसे भी, नैतिकता के आधार पर इस्तीफा जैसी बात दस्तावेजों में समा चुकी है।
इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि युवा यदि ठान ले तो कोई भी काम असंभव नहीं है। युवा अगर अंगड़ाई लेता है तो धरा भी डोलने लगती है। और जेन-जी के नाम पर इन्हीं युवाओं को मुद्दा आधारित एकता के बंधन में बांधकर सरकारों को गिराने का खेल फिलहाल बहुत पॉपुलर है। नेपाल और बांग्लादेश सहित पूरी दुनिया में इसका असर दिखाई दे चुका है। पर भारत जैसे लोकतंत्र में शायद
ऐसे किसी घटनाक्रम की कल्पना अभी तक नहीं की गई है। पर जंतर-मंतर इस बात की गवाही दे रहा है कि भारत में भी युवाओं की भावनाओं को एक सूत्र में बांधकर मोदी सरकार को भी आईना दिखाया जा सकता है। जंतर-मंतर इस बात का साक्षी है कि युवा जन सरकार की मनमानियों से तर नजर आ रहा है तो
समूचे विपक्ष का मन भी तर है। कॉकरोच जनता पार्टी ने वह कर दिखाया है जो शायद कांग्रेस पार्टी और विपक्ष को करने में लंबा समय लगने वाला था… फिलहाल तो जंतर-मंतर पर जाकर देखा जा सकता है यहाँ ‘जन तर’ है और हर ‘मन भी तर’ नजर आ रहा है।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं