राजा रघुवंशी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका मिलने के बाद सोनम रघुवंशी की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। साथ ही ट्रायल कोर्ट को छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाने के निर्देश दिए हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि सोनम कब जेल जाएगी, क्या उसे फिर से जमानत मिल सकती है और क्या इस साल के प्रमुख त्योहार उसे जेल में बिताने पड़ेंगे?
सुप्रीम कोर्ट के 3 बड़े निर्देश
- जमानत रद्द: 23 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सोनम की जमानत याचिका निरस्त कर दी।
- सरेंडर की समय-सीमा: आरोपी को 3 हफ्ते (लगभग 13 अगस्त तक) के भीतर संबंधित अदालत में सरेंडर करने को कहा।
- 6 महीने में ट्रायल का आदेश: निचली अदालत को निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई 6 महीने में पूरी कर फैसला सुनाया जाए। यदि इस अवधि में फैसला नहीं आता तो सोनम दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकेगी।

क्या त्योहार जेल में बीत सकते हैं?
यदि सरेंडर के बाद सोनम को नियमित जमानत नहीं मिलती तो इस साल के कई प्रमुख त्योहार वह जेल में ही बिता सकती है। सावन का महीना 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा। इसी दौरान हरियाली तीज, सावन सोमवार और अन्य धार्मिक पर्व पड़ेंगे। सरेंडर की समय-सीमा भी इसी अवधि में समाप्त हो रही है

अब तक कितने दिन जेल और कितने दिन बाहर रही?
सोनम रघुवंशी 9 जून 2025 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में मिली थी। इसके बाद उसे पुलिस रिमांड और फिर न्यायिक हिरासत में रखा गया। बाद में उसे जमानत मिली थी। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तय समय पर सरेंडर करने पर उसके अगस्त के दूसरे पखवाड़े में दोबारा जेल पहुंचने की संभावना है।
6 महीने में ट्रायल पूरा करने का आदेश क्यों अहम है?
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को छह महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है, ताकि मामला लंबे समय तक लंबित न रहे और पीड़ित पक्ष व आरोपी दोनों को समयबद्ध न्याय मिल सके। यदि इस अवधि में फैसला नहीं आता तो सोनम के पास फिर से नियमित जमानत मांगने का कानूनी विकल्प रहेगा।

राजा के परिवार ने फैसले का किया स्वागत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राजा रघुवंशी के परिवार ने संतोष जताया है। राजा की मां उमा रघुवंशी और भाई विपिन रघुवंशी ने इसे न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए उम्मीद जताई कि छह महीने के भीतर ट्रायल पूरा होगा और परिवार को न्याय मिलेगा।
