वर्ल्ड कप जिताया, एशिया कप दिलाया, फिर भी छिन गई कप्तानी… सूर्यकुमार यादव का छलका दर्द, बोले- “दिल टूट गया था, मैं हैरान था, जब सब अच्छा चल रहा था तो बदलाव क्यों?”

भारत के T20 स्टार सूर्यकुमार यादव ने लगभग दो साल तक टीम की कप्तानी सफलतापूर्वक करने के बावजूद उसे गंवाने से हुई निराशा के बारे में खुलकर बात की. खुलकर बात करते हुए, सूर्या ने माना कि जब उन्हें इस फैसले के बारे में पता चला तो उनका “दिल टूट गया”, हालांकि उन्होंने चयनकर्ताओं के फैसले का सम्मान किया. सूर्या ने बताया कि उन्हें टीम की घोषणा से दो-तीन दिन पहले ही इस बदलाव के बारे में बता दिया गया था.

हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन उन्हें इस फैसले को समझने में मुश्किल हुई, खासकर तब जब उन्होंने भारत को T20 वर्ल्ड कप और एशिया कप जैसे बड़े टूर्नामेंट जिताने में मदद की थी. सूर्या ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि वे भविष्य की चुनौतियों, जैसे कि ओलंपिक और एक और T20 वर्ल्ड कप में टीम को आगे ले जाएंगे.

मैं हैरान औऱ निराश था

आकाश चोपड़ा के साथ इंटरव्यू में सूर्या ने टीम से बाहर और कप्तानी गंवाए जाने को लेकर बात की और कहा, “मैं हैरान था. जब मेरे बिना टीम चुनी गई तो मैं मुस्कुरा रहा था. मैं पूरा साल 2 साल क्रिकेट खेला टीम के साथ तो..मैंने सोचा था कि यहां से टीम को आगे ले जाउंगा, ओलंपिक आएगा.. फिर टी-20 वर्ल्ड कप, मैं टीम को और आगे ले जाता चाहता था. आगे काफी चैलेंज आएगा लेकिन जो आप सोचते हो और सामने वाला क्या सोचता है, यह अलग  दो बातें होती है. उनकी सोच का भी सम्मान करना जरूरी है, मुझे भी अपनी सोच के साथ चलना जरूरी है. अगर उन्होंने सोचा कि बदलाव करना एक अच्छा कॉल है तो यह उनकी सोच थी. लेकिन मैंने उस समय कोई रिएक्ट नहीं किया.”

सूर्या ने आगे कहा, “मुझे लगा कि यह उनका कॉल था. उन्होंने यह फैसला किया. उन्हें लगा होगा कि यह टीम किसी और की कप्तानी में और भी अच्छा कर सकती है तो मुझे इससे कोई परेशानी नहीं है. क्योंकि मैंने देखा कि अय्यर एक बेहतर क्रिकेटर हैं और उनके साथ मैंने काफी क्रिकेट खेली है. मुझे पता है कि वह कप्तानी के लिए अच्छा विकल्प है. मैंने इसलिए इसपर कोई रिएक्ट नहीं किया”.

मैं टीम को आगे ले जाता चाहता था

सूर्या ने कहा, “लेकिन हां मैं काफी निराश था, क्योंकि आप दो साल से कोई भी सीरीज नहीं हारे हो और वर्ल्ड कप भी जीते हो, एशिया कप भी जीते, ऐसे में आप ये चाहते हैं कि इस टीम को और भी आगे ले जाएं, लेकिन यह सब आपके बस में नहीं है. जब सबकुछ अच्छा ही चल रहा है तो बदलाव क्यों, मेरे दिमाग में ये सब चल रहा था. मैं बैठकर 1 से दो महीने बस यही सोच रहा था कि ऐसा मेरे साथ कैसे हो सकता है. अभी तो वर्ल्ड कप जीते थे. हां आईपीएल में अच्छा नहीं था. लेकिन परिवार वालों ने उस समय मेरे को समझाया, उन्होंने कहा कि यह जिन्दगी का एक हिस्सा हैं”.

मुझे टीम के ऐलान के पहले ही बता दिया था

उन्होंने मुझे कॉल किया था. उन्होंने मुझे टीम के ऐलान के दो से तीन पहले बता दिया था. जिसने भी यह कॉल लिया होगा वह टीम की बेहतरीन के लिए ही सोच रहा होगा. आपने कॉल ले लिया.. मुझे बता दिया. मैंने उस समय कोई रिएक्ट नहीं किया. लेकिन हां दिल जरूर टूटा था. बंदा रेडी है. जब आपको कभी भी लगेगा कि मैं टीम के लिए योगदान दे सकता हूं तो मैं रेडी हूं, जब भी आपको लगेगा कि मेरी जरूरत है आप मुझे बुला सकते हैं. मैं अभी भी क्रिकेट खेल रहा हूं”.

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