मध्य प्रदेश चुनाव आयोग में बिल पास कराने के बदले 15% कमीशन मांगे जाने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। दैनिक भास्कर डिजिटल के स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है।
समिति को तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।दरअसल डिजिटल ने 26 अगस्त को इस मामले का खुलासा किया था। के स्टिंग ऑपरेशन में चुनाव आयोग के कर्मचारियों और अधिकारियों पर बिल भुगतान के बदले कथित कमीशन मांगने के आरोप सामने आए थे।
स्टिंग में करीब 1.80 करोड़ रुपए के लंबित बिलों के भुगतान के बदले 15% यानी करीब 27 लाख रुपए नकद मांगने की बातचीत रिकॉर्ड हुई थी। इसमें दलालों और कर्मचारियों की ओर से दावा किया गया था कि ‘कमीशन’ देने के बाद 4 से 5 दिन में पूरी रकम संबंधित खाते में पहुंच जाएगी।मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के आधिकारिक X हैंडल से जांच कमेटी बनाए जाने की सूचना दी गई।
कमेटी में शामिल हैं ये 3 वरिष्ठ अफसर
मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति की कमान संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राम प्रताप सिंह जादौन को सौंपी गई है। उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजय श्रीवास्तव और वीरेंद्र सिंह इसके सदस्य हैं। समिति में एक संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और दो उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इन्हें पूरे मामले की जांच कर तीन दिन में रिपोर्ट सौंपनी है।
करोड़ों के बिलों के भुगतान के लिए मांगा जा रहा था 15% कमीशन मामला उन फर्मों से जुड़ा है, जिन्होंने विधानसभा चुनाव 2023, लोकसभा चुनाव 2024 और SIR 2025 के दौरान सेवाएं दी थीं। इन फर्मों ने वीडियोग्राफी, वाहनों में GPS और मतदान केंद्रों पर CCTV लगाने का काम किया था। काम पूरा होने के बावजूद उनके करोड़ों रुपए के बिल महीनों से आयोग में लंबित थे।
आरोप है कि इन बिलों को मंजूर कराने के बदले 15% कमीशन मांगा जा रहा था। के स्टिंग में इस कथित नेटवर्क में आयोग की बजट शाखा के कर्मचारियों, एक निजी दलाल और कुछ अधिकारियों की भूमिका के आरोप सामने आए हैं।