भागीरथपुरा में दूषित पानी से 36 मौतों के मामले में हाई कोर्ट में पेश जांच आयोग की 600 पेजों की रिपोर्ट का सार शनिवार को सामने आया है। कुछ याचिकाकर्ताओं ने इस रिपोर्ट का अध्ययन किया। जिसके अनुसार, भागीरथपुरा में पानी सप्लाई की लाइन कई जगह से सड़ गई थी। इसे बदलने की कवायद वर्ष 2019-20 से शुरू हो गई थी।

रिपोर्ट में जिम्मेदारों में तत्कालीन निगमायुक्त आशीष सिंह के नाम का उल्लेख है। इसके अलावा तत्कालीन अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, संदीप सोनी और पीएचई के कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव का भी जिक्र किया गया है। इसमें संजीव श्रीवास्तव की लापरवाही ज्यादा मानी गई है।
खास बात यह है कि मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) को इस मामले में जिम्मेदार नहीं माना है। यहां बता दें कि घटना के बाद तत्कालीन निगमायुक्त दिलीप यादव, अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को हटा दिया गया था। सिसोनिया और संजीव श्रीवास्तव को भी निलंबित कर दिया गया था।
20-20 लाख मुआवजे का सुझाव जल प्रदाय व्यवस्था की निगरानी, पाइपलाइन और टंकियों के रखरखाव तथा समय पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। प्रशासनिक अफसरों की लापरवाही रही। दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में मृतकों के परिजन को 20-20 लाख रुपए क्षतिपूर्ति दी जाए।
नया आवेदन : भागीरथपुरा मामले को लेकर हाई कोर्ट में रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए शुक्रवार को नया आवेदन लगाया गया।