सागर के छोटे से गांव अगरा में भजन गाने वाला युवक, हाथ में तंबूरा और सामने गांव की चौपाल। फिर उसी आवाज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होता है और कुछ साल बाद वही आवाज मुंबई के स्टूडियो में फिल्म ‘हनुमान अंश’ के लिए रिकॉर्ड होती है। उनका भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डारि दई’ भी खूब सुना जाता है। यह कहानी 25 साल के सुनील लोधी की है।
- पिता के पास करीब एक-दो एकड़ जमीन है, जिस पर वे खेती-मजदूरी करते हैं। साथ ही परिवार पशुपालन और दूध का काम भी करता है। सुनील चार भाई-बहनों में से एक हैं। दो बहनों की शादी हो चुकी है। आंखों की नस में जन्मजात खराबी के चलते बचपन से रोशनी नहीं थी। मां-बाप ने इलाज कराया लेकिन डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि रोशनी लौटना मुमकिन नहीं है।
- सुनील की औपचारिक पढ़ाई ज्यादा नहीं हो पाई। वे छोटे भाई के साथ स्कूल जाते थे, जहां एक शिक्षक ने उन्हें गिनती और अक्षर ज्ञान जैसी बुनियादी चीजें सिखाईं। यही शिक्षक आगे चलकर उनके पहले संगीत गुरु भी बने।
- गाने का शौक बचपन से ही था। गांव की भजन बैठकों में जाकर बड़े-बुजुर्गों से भजन सीखे, वहीं तंबूरा बजाना भी सीखा। शुरुआती दौर में गुरुजी और कुछ स्थानीय लोग मोबाइल पर उनकी आवाज रिकॉर्ड कर लिया करते थे। हालात इतने मुश्किल भी रहे कि गुजारे के लिए उन्हें ट्रेनों में भी भजन गाने पड़े।

सवाल 2- सुनील की आवाज गांव से बाहर कैसे निकली?
जवाब- रोहित साहू ‘बुंदेली दुनिया’ नाम से एक सोशल मीडिया पेज चलाते हैं। सुनील की गांव में रहने वाली चाची ने ही उन्हें रोहित से मिलवाया, यह बताते हुए कि उनका भांजा यह पेज चलाता है और उनके लिए भी रिकॉर्डिंग कर सकता है।
- रोहित ने सुनील की आवाज और लोकगीत शैली को पहचाना। मोबाइल से रिकॉर्डिंग कर उनके भजनों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना शुरू किया। इसके बाद सागर के गायक अंकित पांडे के साथ भी एक गीत रिकॉर्ड हुआ- दूल्हा बनके आ गए जीजा, जिज्जी को ब्याव माने रैया ने भौंरा। इसे भी करीब 18 लाख बार देखा गया। हालांकि, सुनील खुद मानते हैं कि इससे उतनी बड़ी पहचान नहीं मिल पाई थी।
- सुनील खुद रोहित को मामा कहकर बुलाते हैं। इस भरोसे की एक झलक तब दिखी, जब सुनील एक बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे थे, मानसिक रूप से परेशान और निराश। उसी वक्त रोहित ने उन्हें संभाला और साथ खड़े रहे। 2020 में सुनील का एक और वीडियो वायरल हुआ। इसके बाद हनुमान भजन ‘मोरे संकट के कटैया’ जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तभी सुनील की आवाज गांव की सीमा से बाहर निकली।
सवाल 3- सुनील को ‘हनुमान अंश’ में गाने का मौका कैसे मिला?
जवाब- सोशल मीडिया पर पहचान बढ़ने के साथ बेहतर मौकों की तलाश में सुनील और रोहित मुंबई पहुंचे।
- मुंबई के म्यूजिक प्रोड्यूसर पंकज VRK ने सुनील से 8 गाने रिकॉर्ड कराए। इसी मुंबई यात्रा के दौरान ॐ साईं राम स्टूडियो ने उन्हें भजन गाने के लिए आमंत्रित किया। कार्यक्रम के बाद दोनों वर्सोवा बीच पर घूमने गए। मोबाइल पर लाइव वीडियो और रील बना रहे थे, तभी फिल्म हनुमान अंश के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी का फोन आया। वे पहले ही उनकी वर्सोवा बीच से पोस्ट की गई रील देख चुके थे।
- विशाल चतुर्वेदी ने सुनील को स्टूडियो बुलाया और फिल्म में बुंदेली भजन गाने का मौका दिया। सुनील की हामी के बाद उसी रात स्टूडियो में ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया पार दई…’ रिकॉर्ड हुआ। यही गाना आगे चलकर फिल्म हनुमान अंश का हिस्सा बना। रोहित ने बताया कि कुछ अन्य फिल्मों में भी सुनील को गाने का मौका मिल सकता है। कई प्रोजेक्ट्स के लिए उन्हें कॉल्स आ रहे हैं।
- शुरुआत में ‘हनुमान अंश’ को बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिल रही थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुनील के भजन के वायरल होने से फिल्म को सोशल मीडिया पर अतिरिक्त चर्चा का मौका मिला। हालांकि, फिल्म की सफलता में इस एक गाने का ठीक कितना योगदान रहा, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा किसी ने जारी नहीं किया।

सवाल 4- फिल्म में गाना मिलने के बाद सुनील की जिंदगी में क्या बदला?
जवाब- करियर के लिहाज से देखें तो बदलाव साफ दिखता है। सीएम यादव ने भी सुनील की आंखों के इलाज का भरोसा दिया है।
- रोहित से हमने बात की तो उन्होंने बताया कि सुनील को फिल्म से अच्छी फीस मिली है और वे इससे खुश हैं, लेकिन रकम बताने से रोहित ने इनकार किया। सुनील का अगला सपना बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल के साथ गाना गाने का है, जिनकी आवाज को वे बेहद पसंद करते हैं।
- सुनील बताते हैं कि एक रिकॉर्डिंग के सिलसिले में वे झांसी गए थे। रात 12 बजे स्टेशन से ऑटो वाले ने उन्हें बीच रास्ते में उतार दिया। उस वक्त उनकी जेब में सिर्फ 150-200 रुपए थे। यानी वायरल होने और स्टूडियो तक पहुंचने के बाद भी, रोजमर्रा के खर्च की तंगी उनके साथ काफी वक्त तक बनी रही।
- फिल्म की सफलता के बाद गुरुवार को सुनील पहली बार अपने परिवार के साथ सागर के सिनेमाहॉल पहुंचे और वहीं बड़े पर्दे पर पहली बार ‘हनुमान अंश’ देखी। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने उन्हें उनकी पसंद की एक नई पल्सर बाइक उपहार में दी।
- गुरुवार देर शाम सुनील अपने परिवार के साथ भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मिलने पहुंचे। सीएम ने सरकार की तरफ से एक लाख रुपए की सम्मान निधि देने का आश्वासन दिया है। सीएम ने सुनील की आंखों की रोशनी लौटाने के लिए जरूरी इलाज में मदद और संगीत विद्यालय से औपचारिक शिक्षा दिलाने में सहयोग का भरोसा भी दिया है।

मुख्यमंत्री यादव ने गुरुवार देर शाम सीएम हाउस में सुनील और उनके परिवार से मुलाकात की।