रीवा में कल्पना-नवजात मौत कांड का बड़ा खुलासा: जिस डॉक्टर को 3 साल पहले सेवा से हटाने का आदेश हुआ, उसी से कराया इलाज; डॉ. सोनल अग्रवाल समेत 5 पर कार्रवाई, पिता 5 दिन से आमरण अनशन पर—‘बेटी-नाती की मौत का सच जानना है’

मध्य प्रदेश शासन ने रीवा में 3 साल पहले जिस डॉ. सोनल अग्रवाल को सेवा से हटाने का फैसला लिया था, उसी से संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के मरीजों का इलाज कराया जा रहा था। कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले में इसी डॉ. अग्रवाल समेत 5 लोगों पर एक्शन लिया गया है। मजिस्ट्रियल इन्क्वायरी के साथ स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी केस की जांच कर रहे हैं।

कल्पना के पिता पिता राम शिरोमणि मिश्रा आमरण अनशन पर बैठे हैं।

उधर, बेटी कल्पना को न्याय दिलाने के लिए पिता राम शिरोमणि मिश्रा बीते 5 दिन से रीवा के सिरमौर चौराहे पर अनशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे 10 करोड़ रुपए दोगे तो भी नहीं मानूंगा। मुझे पैसा नहीं, बेटी और नाती की मौत का सच जानना है। दोषियों को सजा होनी ही चाहिए।’

कल्पना के पिता राम शिरोमणि मिश्रा पांच दिन से अनशन पर बैठे हैं।

2023 में हुआ था सेवा से हटाने का फैसला

2023 के इस आदेश में डॉ. सोनल अग्रवाल को हटाने की बात शामिल है।

26 अगस्त को गई थी जच्चा-बच्चा की जान

दरअसल, बैकुंठपुर के हटवा निवासी कल्पना मिश्रा (25) को बीती 25 अगस्त को रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 26 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे कल्पना का सी-सेक्शन किया गया। इसके करीब तीन घंटे बाद कल्पना और उसके बच्चे की मौत हो गई।कल्पना की मौत से पहले का एक वीडियो भी सामने आया। इसमें वह महिला वार्ड से बाहर निकलकर रोते और चिल्लाते हुए मदद मांग रही है। कह रही है- इस तरह का इलाज जारी रहा तो ये लोग मुझे मार डालेंगे, मां।

कल्पना और उसके बच्चे की मौत के बाद परिजन ने अस्पताल के बाद प्रदर्शन किया था।

इलाज में लापरवाही के आरोप, पांच पर कार्रवाई

जच्चा-बच्चा की मौत से गुस्साए परिजन अस्पताल के मुख्य गेट पर बैठ गए थे। उनका कहना था कि डॉक्टर और अस्पतालकर्मियों ने इलाज में लापरवाही बरती। उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।इसके बाद 28 अगस्त को कल्पना की डिलेवरी करने वाले ड्यूटी डॉ. सोनल अग्रवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ/एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. निधि पांडे और 2 नर्सिंग ऑफिसर निलंबित कर दिए गए। 29 अगस्त को 5 सदस्यीय जांच समिति बनाई गई। 1 सितंबर को संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को हटाने का आदेश जारी हुआ। फिर 4 सितंबर को मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए।

जांच में यह देखा जा रहा है कि कल्पना को अस्पताल में भर्ती कराने से लेकर मौत तक इलाज की प्रक्रिया क्या रही? निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं और किन परिस्थितियों में जच्चा-बच्चा की जान गई? अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

डिलेवरी से पहले अस्पताल से कल्पना का वीडियो सामने आया था। इसमें वह कह रही थी- ये लोग मुझे मार डालेंगे।

पोस्टमॉर्टम में बच्चे के सिर में 14×12 सेंटीमीटर की चोट

संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने कहा था कि हॉस्पिटल में भर्ती करते वक्त कल्पना की हालत गंभीर थी। उसके प्लेटलेट्स करीब 30 हजार पर आ गए थे। ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था और लिवर से जुड़े पैरामीटर भी असामान्य थे। गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया और HELLP जैसी स्थिति थी।

उधर, सरकारी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कल्पना के बच्चे के सिर में करीब 14×12 सेंटीमीटर की गहरी चोट, दिमाग में रक्त का जमाव और रिसाव पाया गया। वहीं, कल्पना के सीने में करीब एक लीटर पानी, मस्तिष्क और फेफड़ों में गंभीर सूजन का जिक्र है।हालांकि, अंतिम चिकित्सकीय निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। लेकिन मिश्रा परिवार का आरोप है कि इलाज की पूरी फाइल जांच एजेंसियों को उपलब्ध नहीं कराई गई। पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी को लेकर भी परिवार ने शिकायत की है।

पूर्व मंत्री दिग्विजय सिंह ने दिया धरना

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सीनियर लीडर रविवार रात को रीवा पहुंचे। वे यहां जयस्तंभ चौराहे पर आयोजित कांग्रेस के धरने में शामिल हुए।उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल अपने ही गृह जिले में इसे सुधार नहीं पा रहे हैं। कहीं यह व्यापमं से हुई भर्तियों का नतीजा तो नहीं है।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग भी की।

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