
वैश्विक शांति की भीख मांगता अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस…
पहली खबर रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन रविवार 20 सितंबर 2026 को मॉस्को और आसपास के इलाकों में यूक्रेन ने 1600 से ज्यादा ड्रोन से हमला किया। इनमें करीब 450 ड्रोन मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, हमले में कम से कम 2 लोगों की मौत हुई। इनमें एक 44 साल की महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति शामिल हैं। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन के मुताबिक राजधानी की एक बड़ी ऑयल रिफाइनरी को भी नुकसान पहुंचा है।
दूसरी खबर अमेरिका फिर ईरान में हमले शुरू करेगा? यूरोप में सीक्रेट मीटिंग का दावा, ईरानी आर्मी ने अरब देशों को चेताया। अमेरिका और ईरान में तनातनी लगातार जारी है। सैन्य हमले बंद होने के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य और तेहरान की सत्ता पर बयान देते रहे हैं, जिससे तनाव बढ़ा है।
यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब की राजधानी रियाद के साथ-साथ देश के लाल सागर तट पर स्थित ऊर्जा संयंत्रों को ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। सऊदी अधिकारियों ने कहा कि शनिवार को रियाद की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोककर नष्ट कर दिया गया।
यह देश-दुनिया की तीन सबसे बड़ी खबरें हैं। अन्तरराष्ट्रीय शांति दिवस
खिड़की खोलकर पूरी दुनिया में झांककर अशांत हो गया है। रूस और अमेरिका दुनिया के दो सबसे ताकतवर देश हैं। और दोनों ही युद्ध के प्रति इतने आशक्त हैं कि तीसरा विश्व युद्ध सीमा पर खड़ा नजर आ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस, जिसे आधिकारिक तौर पर विश्व शांति दिवस के रूप में भी जाना जाता है,संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त एकदिनध है जो प्रतिवर्ष 21 सितंबर को मनाया जाता है। यह विश्व शांति को समर्पित है, और विशेष रूप से युद्ध और हिंसा की अनुपस्थिति को। लेकिन इसका समर्पण अब खोखड़ा हो गया है। कह सकते हैं कि अब संयुक्त राष्ट्र खुद कमजोर होकर पूरी तरह से अशांति के सागर में डूबा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र संघ को राह दिखाने वाले अब खुद भी राह भटक गए हैं। खुद सनकी और पागल नजर आ रहे हैं। कितनी दुखद बात है कि इस दिन के उद्घाटन के लिए, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (न्यूयॉर्क शहर में) में संयुक्त राष्ट्र शांति घंटी बजाई जाती है। यह घंटी अफ्रीका को छोड़कर सभी महाद्वीपों के लोगों द्वारा दान किए गए सिक्कों से बनी है, और जापान के संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से “युद्ध की मानवीय कीमत की याद दिलाने” के रूप में एक उपहार थी। इसके किनारे पर लिखा है, “पूर्ण विश्व शांति अमर रहे”। लेकिन विश्व शांति अब पूरी तरह से मर गई है। जो युद्ध में नहीं है वह युद्ध की तैयारियों में जुटे हैं। और जो युद्ध में है, उनके लिए युद्धविराम जैसे शब्द भी अर्थहीन हो चुके हैं। उम्मीद यही है कि एक न एक दिन फिर शांति लौटेगी और फिर शांति दिवस का अंतर्राष्ट्रीय तौर पर सम्मान।
वापस लौटेगा… फिलहाल तो यही सच है कि अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस वैश्विक शांति की भीख मांगता नजर आ रहा है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।