
अटल जी से सत्ता और विपक्ष, दोनों को राजनीतिक मर्यादा सीखने की जरूरत है…
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्व. अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के महान पुरोधा थे। उन्होंने देश को विकास और सुशासन की नई दिशा दिखाई। स्व. अटल जी भारतीय राजनीति और राष्ट्रजीवन का गौरव हैं। उनका जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों के लिये प्रतिबद्धता का उदाहरण है। उनके विचार युगों तक हम सबको सदैव प्रेरणा देते रहेंगे। श्रद्धेय अटल जी का जीवन हम सभी के लिए मार्गदर्शक प्रकाशपुंज है। वे शुचिता और विनम्रता की प्रतिमूर्ति थे। उनके राष्ट्रवाद और सुशासन के आदर्शों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण करते हुए 21 सितंबर 2026 को भोपाल में
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा व्यक्त किए गए यह विचार अक्षरश: सत्य हैं। पर सबसे बड़ी बात यह है कि अटल का आचरण वर्तमान राजनीति में कहीं भी दिखाई नहीं देता है। स्व. अटल जी का सम्पूर्ण जीवन देशसेवा और जनसेवा को समर्पित रहा। उनके व्यक्तित्व में लोककल्याण और राजनीतिक शुचिता ही सदैव अटल रहे। राजनीति में शुचिता, विचारों में दृढ़ता और व्यवहार में सौम्यता, इन तीन महान गुणों का संगम अटल जी के व्यक्तित्व की पहचान थी। शायद अब शुचिता और सौम्यता जैसे गुण भी राजनीति में अपवाद स्वरूप ही नजर आ सकते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जो सबसे बड़ी बात कही वह यह है कि अटल जी ने सत्ता और विपक्ष, दोनों में लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी यह सीख आज भी प्रासंगिक है कि सत्ता आती-जाती रहती है, सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन देश और लोकतंत्र बने रहना चाहिए। लेकिन यदि ईमानदारी से कहा जाए और सत्ता-विपक्ष के सभी राजनेता ईमानदारी से, अपने अंतर्मन में झाँक कर सच्चे मन से स्वीकार करें तो अटल जी के यह गुण अब राजनीति से विलोपित हो चुके हैं। राजनीतिक मर्यादा अब अतीत में समा चुकी है। और कोई भी राजनेता ऐसा नहीं बचा जो भागीरथ बनकर अटल जी के इन गुणों की गंगा राजनैतिक धरा पर लाने में सक्षम हो।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के दिखाए रास्ते, उनके राष्ट्रवाद और सुशासन के मॉडल को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। आज जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है, तब अटल जी के विचारों और आदर्शों को आत्मसात करना सभी का दायित्व है। पर विडम्बना यही है कि
अटल जी के विचारों और आदर्शों को आत्मसात करने की हिम्मत अब किसी में बची ही नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. अटल जी ने हमें यह सिखाया कि सत्ता में रहते हुए किस प्रकार का आचरण होना चाहिए और विपक्ष में रहते हुए राजनीतिक मर्यादाओं का पालन कैसे किया जाता है। अटल जी ने विपक्ष में रहते हुए सबसे लम्बे समय तक विपक्ष के नेता का दायित्व निभाया। आपातकाल के दौर में जब लोकतंत्र पर कुठाराघात हुआ, तो उन्होंने करीब 19 माह तक जेल में बिताए थे। भारतीय राजनीति का इतिहास रहा है कि जब राष्ट्र पर संकट आता है, तो हम भारतीय दलों की सीमाएं भूल कर एक संकल्प के साथ खड़े हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में जब बांग्लादेश युद्ध चल रहा था, तो श्रद्धेय अटल जी ने खुले दिल से प्रधानमंत्री और सरकार का समर्थन किया था।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अटलजी के संसदीय जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने संसद में खड़े होकर कहा था कि सत्ता तो आती-जाती रहती है और सरकारें भी बदलती रहती हैं, लेकिन देश बना रहना चाहिए, देश का लोकतंत्र कायम रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इसे भारत के लोकतंत्र की गरिमा और अटल जी के महान व्यक्तित्व का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि हमारे बीच ऐसे अटल जी रहे हैं, जिन्होंने सरकार के नेता के साथ विपक्ष के नेता की भूमिका और उसके दायित्वों का भी आदर्श प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के अटल जी से संबंधित
भावों की प्रकटीकरण
के लिए, वह साधुवाद के पात्र हैं।
लेकिन फिर वही बात कि अटल जी को सच्चे मन से अपने आचरण में उतारने की जरूरत है। और यह दावा किया जा सकता है कि सत्ता और विपक्ष मिलकर जब तक लोकतंत्र के दो पहियों की तरह मिलकर अपनी अपनी भूमिका ईमानदारी से नहीं निभाएंगे, तब तक लोक लोकतंत्र की गाड़ी अनाड़ियों की तरह सभी दिशाओं में अपने वजूद को तलाशती रहेगी। और यह बात एक हजार फीसदी सच है कि अटल जी से सत्ता और विपक्ष, दोनों को राजनीतिक मर्यादा सीखने की जरूरत है… आओ भारत के हम सभी नागरिक और सभी राजनेता यह प्रतिज्ञा लें कि अटल जी के आचरण से सीख लेकर हम सभी तरह की बुराइयों का त्याग करते हुए ईमानदारी से, मर्यादा में रहकर सत्य विश्वास और पारदर्शिता का नया इतिहास रचेंगे…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।