विकास के लिए सीएम और आमजन सब बराबर…उज्जैन में पैतृक घर तोड़ने मोहन ने चलाई पहली गेती… कौशल किशोर चतुर्वेदी

विकास के लिए सीएम और आमजन सब बराबर…उज्जैन में पैतृक घर तोड़ने मोहन ने चलाई पहली गेती…
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सितंबर 2026 के अंतिम रविवार को ट्रेंड सेटर बनकर पूरे देश के सामने आए। उज्जैन में उन्होंने अपने पैतृक मकान को तोड़ने के लिए पहली गेती चलाकर यह आदर्श सामने रखा कि जब बात प्रदेश के विकास की हो तो सूबे का मुखिया और आम आदमी सभी बराबर हैं। विकास के लिए त्याग की भावना सबके मन में होनी चाहिए। उज्जैन में सड़क चौड़ी होने के लिए कई मकान टूटने हैं। सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है, जिसके तहत तहत सीएम मोहन यादव का पैतृक मकान भी जद में आ रहा है। जिस मकान का जितना हिस्सा टूटना है, उस पर लाल निशान लगाया जा चुका है। इसमें मुख्यमंत्री और उनके संबंधियों के मकान भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 के लिए हो रहे विकास कार्यों के रास्ते में आ रहे अपने पैतृक मकान को तोड़ने के लिए न केवल हामी भरी बल्कि खुद आगे आकर यह साबित किया है कि विकास के रास्ते में आस्था, प्रेम, भावना कुछ भी बाधक नहीं है। और मध्य प्रदेश में सबके साथ समान व्यवहार का एक ही फार्मूला लागू है।
उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 के आयोजन को लेकर सड़क चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। इसकी जद में खुद सीएम मोहन यादव का पैतृक घर आ रहा है। ऐसे में 27 सितंबर 2026 को सीएम मोहन यादव ने खुद गेती चलाकर अपना मकान तोड़ने की शुरुआत की। सीएम के अलावा उनकी बहन और बीजेपी नेता कलावती का मकान भी जद में आया है, उसे भी तोड़ा जाएगा। हालांकि मकान को देखकर सीएम मोहन यादव भावुक हो गए। और यह स्वाभाविक भी है। जिस मकान में रहकर मोहन यादव
ने होश संभाला और राजनीति में सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़कर प्रदेश के मुखिया तक बनने का सफर तय किया, उसी मकान के एक हिस्से को अपनी आँखों के सामने टूटता देखना बहुत आसान काम नहीं है। लेकिन सड़क चौड़ीकरण के लिए परिवार ने मकान का हिस्सा तोड़ने और उसका मुआवजा नहीं लेने की बात कही है। जिसके बाद मकान तोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
उज्जैन में खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा और जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक के करीब 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। इस रास्ते में करीब 272 मकान जद में आ रहे हैं, जिन पर लाल निशान लगा दिए गए थे। जिसमें सीएम मोहन यादव का पैतृक मकान भी शामिल था। उज्जैन नगर निगम ने सड़क चौड़ीकरण के लिए मकानों को तोड़ने का काम शुरू कर दिया है। सीएम मोहन यादव ने खुद अपना मकान तोड़ने की शुरुआत कर
यही संदेश दिया है कि राष्ट्रहित राज्यहित और शहर के हित के सामने स्वहित कोई मायने नहीं रखता। मोहन यादव के इस पुश्तैनी मकान का लगभग 2.30 से 2.90 मीटर हिस्सा तोड़ा जाएगा। जिसका परिवार ने मुआवजा लेने से भी मना कर दिया है। और इससे भी बड़ी बात यह है कि खुद मकान तोड़ने के लिए पहली गेती चलाना किसी आम इंसान के वश की बात नहीं है। उज्जैन में सीएम मोहन यादव के दादा रामचंद्र यादव ने साल 1974 में यह मकान बनाया था। इसी घर में उनका जन्म हुआ था। इसी मकान में उनका बचपन बीता था। छात्र राजनीति से सियासत में उतरे सीएम मोहन यादव इसी मकान में रहते हुए पहली बार कॉलेज अध्यक्ष चुने गए थे और लंबे राजनीतिक सफर के बाद अब राज्य के मुख्यमंत्री हैं। वर्तमान में इस घर में उनके चाचा का परिवार रहता है।

उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 महाकुंभ के लिए शहर की सड़कों को चौड़ा करने का काम किया जा रहा है। अलग-अलग इलाकों में मकानों को तोड़ा जा रहा है। उज्जैन नगर निगम की तरफ से लगातार यह कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई में पूरा सहयोग कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक उदाहरण पेश करने की सफल कोशिश की है। उज्जैन में भावनात्मक हुए मुख्यमंत्री भोपाल पहुंचने के बाद भी अपनी स्वाभाविक स्थिति में नहीं पहुंच पाए। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के मामले में कांग्रेस के व्यवहार पर वार तो किया लेकिन यह आक्रामकता भी भावनात्मकता के चलते मोहन के भारी मन की गवाही दे रही थी। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है। राजनीतिक असफलता का ठीकरा कांग्रेस और विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ रहा है। कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे गए पत्र को लेकर भी विपक्ष द्वारा भ्रम फैलाया गया। चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह पत्र किसी नीतिगत विषय अथवा एसआईआर से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से संबंधित आंतरिक मामला था। चुनाव आयोग को लेकर भ्रम फैलाने पर राहुल गांधी को माफी मांगकर इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से कांग्रेस के झूठ और भ्रम की राजनीति बेनकाब हो गई है। हर पात्र नागरिक का मताधिकार सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिकता में शामिल रहता है। कुल मिलाकर मोहन का भाव यही था कि एसआईआर पर सही बात तो समझो राहुल गांधी। एसआईआर यानी समझो इसको राजकुमार यानि राहुल।
कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा खुद अपने पैतृक पैतृक मकान को तोड़कर एक अच्छा संदेश दिया गया है। जैसा कि उन्होंने खुद बताया कि उज्जैन में विकास के लिए मंदिर, मस्जिद, घर गुरुद्वारे सभी बिना किसी भेदभाव के सरकारी फैसलों को स्वीकार कर रहे हैं। शहर और सिंहस्थ के लिए विकास को लेकर त्याग का यह आत्मिक भाव श्रेष्ठता और आदर्श से भरा हुआ है। ऐसे में प्रदेश के मुखिया होने के नाते उन्होंने भी अपने कर्त्तव्य का निर्वहन किया है। ठीक ही है कि उज्जैन में पैतृक घर तोड़ने पहली गेती चलाकर मोहन ने श्रेष्ठता और आदर्श से भरा यही उदाहरण पेश किया है कि विकास के लिए सीएम और आमजन सब बराबर हैं…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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