उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए 5 हजार करोड़ रुपए के विकास कार्य हो रहे हैं। इसमें बिजली लाइन शिफ्टिंग के लिए 250 करोड़ रुपए मंजूर हैं। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की निगरानी में 75 लाइनों की शिफ्टिंग चल रही ह
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए 5 हजार करोड़ रुपए के विकास कार्य हो रहे हैं। इसमें बिजली लाइन शिफ्टिंग के लिए 250 करोड़ रुपए मंजूर हैं। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की निगरानी में 75 लाइनों की शिफ्टिंग चल रही है। इनमें से 3 लाइनों की पड़ताल की तो गड़बड़ी सामने आई। जहां नए पोल लगाए जाने थे, वहां सिर्फ 20% नए पोल लगाए गए। 80% पुराने पोल को सिल्वर पेंट कर दोबारा इस्तेमाल किया गया। पुराने केबल, तार और कंडक्टर भी लगाए गए, जबकि नियमों के मुताबिक नई सामग्री का इस्तेमाल होना चाहिए था।
इसके बावजूद संबंधित फर्म्स को 4.51 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। पड़ताल में यह आरोप भी सामने आया कि कागजों पर दर्ज ठेकेदारों के बजाय बिजली कंपनी के अफसरों ने पेटी कॉन्ट्रैक्ट लेकर अपने लोगों से काम कराया।
पार्ट-1 में पढ़िए-3 लाइनों की ग्राउंड पड़ताल में क्या मिला और पुरानी सामग्री के इस्तेमाल पर क्या सवाल उठे हैं।

4 पॉइंट्स में समझिए ने कैसे की पड़ताल
दस्तावेजी जांच: बिजली कंपनी के नियमों और उनके उल्लंघन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल।ग्राउंड वेरिफिकेशन: तीनों लाइनों पर जाकर पोल और सामग्री की भौतिक जांच।कर्मचारी स्टिंग: पेटी कॉन्ट्रैक्टर के रूप में काम कर रहे बिजली विभाग के कर्मचारियों का स्टिंग।लैब स्टिंग: अप्रूवल सर्टिफिकेट जारी करने वाली लैब की जांच।
के पहले दो बिंदुओं की सिलसिलेवार पड़ताल1: नियमों की अनदेखी, शिफ्टिंग में पुरानी सामग्री का इस्तेमाल
सरकारी नियमों के मुताबिक, PWD या स्मार्ट सिटी जैसी एजेंसियां सड़क चौड़ीकरण के लिए बिजली लाइन शिफ्ट कराते समय ‘5% सुपरविजन योजना’ चुनती हैं। इसमें निर्माण एजेंसी निजी ठेकेदार चुनती है और कुल लागत का 5% सुपरविजन चार्ज बिजली विभाग में जमा करती है।
विभागीय नियम और जमीन पर स्थिति
नियम 1: केवल A-क्लास ठेकेदार काम करेगा
जमीन पर: दस्तावेजों में A-क्लास ठेकेदार दर्ज थे, लेकिन आरोप है कि बिजली कंपनी के अफसरों ने पेटी कॉन्ट्रैक्ट लेकर अपने लोगों से काम कराया।
नियम 2: काम से पहले GIS (एप बेस्ड फोटो सर्वे) जरूरी
जमीन पर: 95% से ज्यादा कामों में GIS सर्वे नहीं कराया गया। इससे पुराने पोल, तार और ट्रांसफॉर्मर की जियो-टैग्ड तस्वीरें रिकॉर्ड में नहीं आईं। पड़ताल के मुताबिक, इसी वजह से फाइलों में मौके से ‘कोई उपयोगी सामान नहीं निकला’ दर्ज करने की गुंजाइश बनी।
नियम 3: 100% पुरानी सामग्री सरकारी स्टोर में जमा होगी
जमीन पर: पुरानी लाइनों से उतारे गए RS Joist पोल, H-Beam, XLPE केबल और तांबे के कंडक्टर स्टोर में जमा नहीं कराए गए। रिकॉर्ड में इनके बदले सड़ा-गला और जंग लगा लोहे का कबाड़ दिखाया गया।
2: ग्राउंड जीरो पर तीन लाइनों की पड़ताल

यह उज्जैन का घनी आबादी वाला रहवासी और व्यावसायिक इलाका है। सिंहस्थ के लिए सड़क 15 फीट चौड़ी की गई और बिजली लाइन शिफ्ट हुई।जैन मंदिर के सामने पड़ताल में लाइन पर पुराने पोल और पुराने डिस्ट्रीब्यूशन पैनल (DP) मिले। करीब एक साल पहले शिफ्ट किए गए इन पोल पर सिल्वर पेंट किया गया था, जो हाथ से खुरचने पर निकल रहा था।
दुकानदार बोले- 9 साल पुरानी DP दोबारा लगाई
कॉम्प्लेक्स से सटी बिजली DP को लेकर बर्तन दुकानदार इब्राहिम ने कहा, “यह मेरी दुकान के शटर से बिल्कुल सटी है। हमेशा करंट का डर रहता है। अफसरों से शिकायत की तो बोले कि यह नहीं हटेगी।9 साल पहले कॉम्प्लेक्स बनने पर यह DP लगी थी। लाइन शिफ्टिंग में नई DP लगाने के बजाय इसी को दोबारा यहीं लगा दिया।”

सुरक्षा मानकों पर सवाल: न कंक्रीट बेस, न पर्याप्त दूरी
शहरी इलाकों में 11 KV लाइन की घरों से दूरी कम से कम 5 फीट होनी चाहिए। यहां यह दूरी 1 से 2 फीट बताई गई है। किसी पोल पर कंक्रीट मफिंग भी नहीं मिली। इससे आंधी-तूफान में पोल गिरने का जोखिम हो सकता है।

इस वीआईपी रूट पर पड़ताल के दौरान नई लाइन में पुरानी केबल लटकी मिली। कई पोल बीच से वेल्डिंग कर जोड़े गए थे और उन पर पेंट किया गया था।दस्तावेजों के मुताबिक, यहां से निकले 190 पुराने पोल स्टोर में जमा होने थे, लेकिन रिकॉर्ड में सिर्फ 53 जमा हैं। मौके पर 25 पोल पर वेल्डिंग के जोड़ और करीब 100 पुराने पोल मिले। पोल के बीच ज्यादा दूरी के कारण भारी केबल नीचे लटकती दिखी
सिंहस्थ 2028 में इस रूट से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों समेत वीवीआईपी मूवमेंट प्रस्तावित है। पड़ताल में करीब 70% पुराने पोल लगे मिले।खेती की जमीन पर लगाए गए इन पोल में कंक्रीट मफिंग नहीं मिली और कुछ पोल झुके हुए थे। पोल पर किया गया सिल्वर पेंट हाथ लगाने पर निकल रहा था।

ट्रांसफॉर्मर का भी रिकॉर्ड नहीं मिला
सदावल हेलीपैड के पास पुरानी लाइन पर ट्रांसफॉर्मर के पोल मौजूद हैं, लेकिन ट्रांसफॉर्मर नहीं मिला। सरकारी रिकॉर्ड में इसकी रिटर्न एंट्री भी नहीं है।सूत्रों के मुताबिक, सिंहस्थ क्षेत्र से ऐसे 40 से ज्यादा ट्रांसफॉर्मर का रिकॉर्ड नहीं मिला। इनके बाजार में बेचे जाने या पार्ट्स निकालकर ठिकाने लगाने की आशंका जताई गई है।