सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि ₹2700 की कैंसर की दवा पर MRP ₹27,000 क्यों है। कोर्ट ने दवाओं की कीमतों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह नरसंहार है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मंगलवार को दवाओं की कीमत और जेनेरिक दवाओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता मौजूद थे। कोर्ट ने कहा- यह नरसंहार है। यह कैसे हो रहा है? कॉर्पोरेट किसी को नहीं बख्शते, शव भी बाहर नहीं जाने देते
कोर्ट का कमेंट- बोझ टैक्सपेयर्स पर, सरकार बोली- फायदा निजी अस्पतालों को

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अगर मरीज सरकारी योजना में इलाज करा रहा है तो इतनी बढ़ी हुई कीमत का भुगतान कौन करता है। इसका बोझ सरकारी खजाने और टैक्सपेयर्स पर ही पड़ता है। प्राइवेट हॉस्पिटल इंडस्ट्री की तरह काम कर रहे हैं। वे अपनी फार्मेसी से ही दवा खरीदने को मजबूर करते हैं।
- सरकार की ओर से तुषार मेहता ने कहा- फार्मा कंपनियां लाभ कमाने वाली नहीं हैं। ऐसा लगता है कि लाभ कमाने वाले निजी अस्पताल हैं।
- याचिकाकर्ता का दलील- जिन दवाओं की कीमत सरकार तय करती है, उनका बाजार में हिस्सा कम है। जिनकी कीमत सरकार तय नहीं करती, उनकी करीब 80% से ज्यादा हिस्सेदारी है।
- याचिकाकर्ताओं ने कहा- इससे दवाओं की कीमत और मरीजों के इलाज का खर्च बढ़ सकता है। कई मरीज इलाज के लिए अपनी संपत्ति या गहने तक बेचने को मजबूर होते हैं।
कैसे तय होती है दवा की कीमत, 4 पॉइंट
1. ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) जरूरी दवाओं की कीमत कंट्रोल करता है। 2013 के DPCO तहत नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स (NLEM) में शामिल दवाओं की अधिकतम कीमत सरकार तय करती है।
2. बाजार में बिक रही दवाओं की कीमत के आधार पर जरूरी दवाओं की अधिकतम सीमा तय की जाती है। इससे ज्यादा कीमत पर दवा बेचना गैरकानूनी है।
3. स्वास्थ्य मंत्रालय दवाओं की सुरक्षा, असर और कीमत को देखते हुए जरूरी दवाओं की लिस्ट बनाता है। इसमें देश में आम बीमारियों और लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों का ध्यान रखा जाता है।
4. इस लिस्ट की समय-समय पर समीक्षा की जाती है और जरूरत के अनुसार नई दवाएं जोड़ी जाती हैं। जो दवाएं इस सूची में नहीं होतीं, उनकी कीमतों पर सरकार का सीधा नियंत्रण कम होता है।

पिछली सुनवाई में पूछा था- 10 गुना कीमत क्यों वसूल रहे

इससे पहले 22 सितंबर की सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने कहा- “यह मरीजों के साथ दिनदहाड़े डकैती है। जरूरी दवाओं के लिए ऐसी कीमतें कैसे तय करने दी जा सकती हैं।