सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों की फांसी पर विवाद, गुप्त मेमो से खुलासा—मक्का में ‘अनैतिक आचरण’ के मामले में मौत की सजा पाने वाले नजरुल और स्वीटी पर लगे थे अलग-अलग आरोप

बांग्लादेश के दो नागरिकों, एक पुरुष और एक महिला, को सऊदी अरब में मौत की सजा दी गई है और उसपर बांग्लादेश के अंदर बहुत नाराजगी है. पहले तो बांग्लादेश सरकार ने जिस तरह से मामला चलाया गया और इन दोनों नागरिकों को सजा दी गई, उसपर असंतोष जताया है. पहले मीडिया में खबर आई कि दोनों पति-पत्नी है

पति-पत्नी नहीं थे मक्का में ‘अनैतिक’ अचारण पर सजा-ए-मौत पाने वाले बांग्लादेशी

और दोनों को मक्का शहर की एक मस्जिद में ‘अनैतिक’ गतिविधि करने के आरोप में दोषी ठहराने के बाद मौत के घाट उतारा गया. लेकिन अब दोनों के  अब एक सीक्रेट फाइल से यह खुलासा हुआ है कि दोनों को जब 3 साल पहले गिरफ्तार किया गया था तब दोनों पर अलग-अलग आरोप लगे थे.

बता दें कि मौत की सजा पाने वाले इन दोनों बांग्लादेशियों का नाम नजरुल इस्लाम और स्वीटी अख्तर था.

सीक्रेट फाइल में क्या खुलासा हुआ?

बांग्लादेशी अखबार ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार उसे सऊदी के जेद्दा में मौजूद बांग्लादेश के महावाणिज्य दूतावास का एक गोपनीय मेमो मिला है. इसके अनुसार 14 अक्टूबर को सऊदी अरब में फांसी दिए गए दोनों बांग्लादेशियों को अलग-अलग आरोपों के सिलसिले में अगस्त 2023 से हिरासत में रखा गया था. 18 अक्टूबर के इस मेमो में इन दोनों व्यक्तियों की पहचान नजरुल इस्लाम अब्दुल बशीर और सुएटी अख्तर (परिवार के अनुसार, स्वीटी अख्तर) के रूप में की गई है, जिन्हें मक्का में फांसी दी गई थी.

रिपोर्ट के अनुसार 30 सितंबर को बांग्लादेशी वाणिज्य दूतावास को मिली कैदियों की लिस्ट से पता चलता है कि नजरुल को 1 अगस्त 2023 को सऊदी अरब के साइबर क्राइम कानून के तहत हिरासत में लिया गया था. उसके अगले दिन, व्यभिचार (एडल्टरी) के आरोपों में सुएटी को हिरासत में लिया गया. मेमो के अनुसार नजरुल को जेद्दा करेक्शनल फैसिलिटी में और सुएटी को जेद्दा महिला जेल में रखा गया था. दोनों ‘अल मजल’ कंपनी में सफाईकर्मी के तौर पर काम करते थे.

अभी भी कई सवालों का जवाब नहीं

दोनों को जिस तरह से मौत की सजा दी गई है, उसने अपनी अस्पष्टता की वजह से कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पहली बात की सऊदी ने बांग्लादेश को इस मामले की जानकारी ही आधिकारिक तौर पर नहीं दी. बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर कह रहे हैं कि “बांग्लादेश और सऊदी अरब, दोनों ने ही जिनेवा कन्वेंशन पर साइन किए हैं. इस घटना में सूचना शेयर करने में कमी रह गई थी. हमने सऊदी अरब से स्पष्टीकरण मांगा है ताकि यह पता चल सके कि यह कमी क्यों हुई.”

डेली स्टार की इस रिपोर्ट के अनुसार कैदियों की सूची में उन दोनों में से किसी को भी मौत की सजा दिए जाने का कोई जिक्र नहीं था. हालांकि, इसमें 97 कैदियों के अपराधों का संक्षेप में विवरण दिया गया था. लेकिन संबंधित कॉलम में इन दो बांग्लादेशियों के बारे में ऐसी कोई जानकारी नहीं थी. सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने उन्हें दी गई फांसी की जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें मक्का की एक मस्जिद के अंदर एक “अनैतिक कृत्य” करने का दोषी पाया गया था.

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