सिंहस्थ-2028: उज्जैन में 92.25 करोड़ से बनेंगे 9 भव्य प्रवेश द्वार, शहर में प्रवेश करते ही होगा कुंभ नगरी का अहसास; यूडीए डेढ़ साल में करेगा निर्माण, दो द्वारों से शुरुआत

सिंहस्थ कुंभ 2028 में उज्जैन आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को शहर में प्रवेश करते ही कुंभ नगरी में आने का अहसास होगा। इसके लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) शहर के 9 प्रमुख स्थानों पर 92.25 करोड़ रुपए की लागत से भव्य प्रवेश द्वार बनवाएगा।

परियोजना के तहत फिलहाल दो द्वारों के निर्माण से शुरुआत की जा रही है। सभी द्वारों का निर्माण कार्यादेश जारी होने के बाद 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

पांच साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी रहेगी

यूडीए अध्यक्ष रवि सोलंकी ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को दिव्य और अलौकिक अनुभव देने के उद्देश्य से इन द्वारों का निर्माण किया जाएगा। निर्माण एजेंसियों को द्वार बनाने के साथ ही पांच साल तक उनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।

तीन चरणों में बनेंगे 9 द्वार

यूडीए ने पूरी परियोजना को तीन भागों में बांटा है। पहले भाग में त्रिशूल द्वार, विक्रमादित्य द्वार और डमरू द्वार का निर्माण प्रस्तावित है। दूसरे भाग में अमृत द्वार, पंचजन्य द्वार और गज द्वार बनाए जाएंगे। वहीं, तीसरे भाग में कालगणना द्वार, उज्जैनी द्वार और सिंहस्थ द्वार का निर्माण किया जाएगा।

डेढ़ साल में पूरा करना है काम

परियोजना के तहत सभी 9 प्रवेश द्वारों का निर्माण डेढ़ साल में पूरा करने का लक्ष्य है। इसके लिए कार्यादेश जारी होने के बाद 18 महीने की समय-सीमा तय की गई है। निर्माण के बाद पांच साल तक द्वारों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित निर्माण एजेंसियों की होगी। इन द्वारों के जरिए सिंहस्थ के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने की योजना है।

 

पीले, गुलाबी और सफेद पत्थरों का इस्तेमाल

नए प्रवेश द्वार पर सनातन परंपरा, सिंहस्थ संस्कृति और राजकीय गौरव को दर्शाया जाएगा। इन्हें बनाने में पीले, गुलाबी और सफेद पत्थरों का इस्तेमाल होगा। इन गेट के निर्माण का उद्देश्य सिर्फ सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि सिंहस्थ के दौरान बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और आगंतुकों को उज्जैन की परंपरा और विरासत की जानकारी देना भी है। इसके चलते इन पर खगोल कालगणना, सिंहस्थ संस्कृति और सनातन परंपरा को उकेरा जाएगा।

बंसी पहाड़पुर और जैसलमेर के पत्थरों से बनेंगे

उज्जैन में बनने वाले प्रवेश द्वारों को भव्य स्वरूप देने के लिए बंसी पहाड़पुर और जैसलमेर के पत्थरों से कलात्मक नक्काशी कर बनाया जायेगा। हालांकि कुम्भ में समय अब कम बचा है इसे में कयास लागाये जा रहे है कि वे समय पर तैयार होकर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए खड़े हो पाएंगे या नहीं।

6 तस्वीरों में देखिए नौ द्वारों की डिजाइन…

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